सचिन पायलट के पंचायतीराज विभाग के विज्ञापन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का फोटो नहीं।

सचिन पायलट के पंचायतीराज विभाग के विज्ञापन में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का फोटो नहीं।
अकेले पायलट के फोटो के क्या मायने हैं?
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दावा तो यही किया जाता है कि मई में होने वाला लोकसभा का चुनाव राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट मिल कर लड़ेंगे। ऐसा दावा दोनों नेताओं ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने भी किया है, लेकिन ऐसा दावा सरकारी स्तर पर सही प्रतीत नहीं हो रहा है। सरकार के प्रचार प्रसार के लिए राजस्थान में भी जनसम्पर्क निदेशालय बना हुआ है। यह निदेशालय जब भी किसी विभाग का विज्ञापन जारी करता है तो उसमें संबंधित विभाग के मंत्री के साथ-साथ मुख्यमंत्री का फोटो अनिवार्य तौर पर लगाया जाता है। मंत्री का फोटो लगे या नहीं, लेकिन मुख्यमंत्री का फोटो लगाया जाता है। किसानों की कर्जमाफी के पूरे पृष्ठ के विज्ञापन में सिर्फ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का फोटो ही लगा हुआ है, सहकारिता अथवा कृषि मंत्री के फोटो भी नहीं है। जब मुख्यमंत्री का फोटो लग रहा हो तो अपने फोटो के लिए कोई मंत्री मांग भी नहीं कर सकता है। लेकिन राजस्थान के पंचायती राज विभाग ऐसा है, जहां मुख्यमंत्री के बजाए सिर्फ विभाग के मंत्री सचिन पायलट का ही फोटो प्रकाशित होता है। प्रधानमंत्री आवास योजना में नाम जुड़वाने के लिए 23 व 24 फरवरी को प्रदेशभर में ग्राम पंचायत स्तर पर आम सभाएं की जा रही है। जनसम्पर्क निदेशालय की ओर से पंचायतीराज विभाग का विज्ञापन 16 फरवरी को प्रदेश के दैनिक अखबारों में प्रकाशित करवाया गया। इस विज्ञापन में सिर्फ सचिन पायलट का ही फोटो है। जनसम्पर्क निदेशालय और पंचायतीराज विभाग में अब यह पूछने की किसी की भी हिम्मत नहीं है कि इस विज्ञापन में मुख्यमंत्री का फोटो क्यों नहीं है? गंभीर बात यह भी है कि पायलट के फोटो के नीचे नाम के साथ सिर्फ उपमुख्यमंत्री लिखा गया है। यानि पायलट के नाम के साथ पंचायतीराज मंत्री के शब्द से भी परहेज किया गया है। संविधान में उपमुख्यमंत्री का कोई पद नहीं है, इसलिए पायलट ने भी केबिनेट मंत्री की ही शपथ ली थी, लेकिन अब पायलट को सिर्फ मंत्री कहवाना पसंद नहीं है। पायलट के समर्थकों का कहना है कि वे मुख्यमंत्री पद के दावेदार थे, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने अशोक गहलोत को मुख्यमंत्री बना दिया। समर्थकों को हाईकमान का फैसला अभी तक भी रास नहीं आया है। इसका ताजा उदाहरण पंचायती राज विभाग के विज्ञापन का है कि ऐसी हिमाकत पंचायतीराज विभाग की कर सकता है। यदि और कोई विभाग होता तो अब तक सीएमओ संबंधित मंत्री को तलब कर लेता। सीएमओ में भी इतनी हिम्मत नहीं है कि पंचायतीराज विभाग के किसी अधिकारी को तलब करे। सचिन पायलट पंचायतीराज विभाग सहित पांच विभागों के केबिनेट मंत्री हैं। पायलट प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी बने हुए हैं।
एस.पी.मित्तल) (18-02-19)
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