260 पाकिस्तानी जायरीन की खिदमत के लिए तैयार अजमेर प्रशासन। 15 दिनों तक बंद रहेगा लड़कियों का सरकारी स्कूल।

260 पाकिस्तानी जायरीन की खिदमत के लिए तैयार अजमेर प्रशासन।
15 दिनों तक बंद रहेगा लड़कियों का सरकारी स्कूल।
जायरीन के आवभगत की जिम्मेदारी एडीसी सत्तार खान को सौंपी।
ख्वाजा उर्स में जायरीन का सैलाब, शरद पवार की ओर से भी चढ़ी चादर। 

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अजमेर में चल रहे ख्वाजा साहब के 808वें सालाना उर्स में शरीक होने के लिए पाकिस्तान से सरकारी स्तर पर 260 सदस्यीय जायरीन दल 28 फरवरी की रात को अजमेर पहुंच रहा है। हालांकि ख्वाजा उर्स धार्मिक दृष्टि से एक मार्च को सम्पन्न हो जाएगा, लेकिन पाक जायरीन दल 7 मार्च तक अजमेर में ही रहेगा। भारत और पाकिस्तान के बीच जब संबंध सामान्य (खुशनुमा) होते हैं, तभी पाक दल ख्वाजा साहब के उर्स में आता है। संबंध खराब (तनावपूर्ण) होने पर जायरीन पाकिस्तान से सरकारी स्तर पर नहीं आते है। माना जा रहा है कि मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य है, इसलिए पाकिस्तान के जायरीन को भारत सरकार ने वीजा दिया है।
खिदमत के लिए तैयार है प्रशासन:
चूंकि पाक जायरीन सरकारी स्तर पर आ रहे हैं, इसलिए अजमेर जिला प्रशासन भी खिदमत के लिए तैयार है। 260 जायरीन के फ्री आवास की व्यवस्था पुरानी मंडी स्थित सेंट्रल गल्र्स स्कूल के कमरों में की गई है। जायरीन के आने से पहले ही स्कूल परिसर की मरम्मत और साफ सफाई का कार्य करवाया गया है। प्रशासन ने पहले वरिष्ठ आरएएस भगवंत सिंह राठौड़ को सम्पर्क अधिकारी नियुक्त किया था, लेकिन अब अजमेर के अतिरिक्त संभागीय आयुक्त सत्तार खान को सम्पर्क अधिकारी नियुक्त किया गया है। राठौड़ सहायक अधिकारी की भूमिका में रहेंगे। सेंट्राल गल्र्स स्कूल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। पाक जायरीन अपनी सरकार की ओर से मजार शरीफ पर चादर भी पेश करेंगे। पाक जायरीन को अजमेर में कोई परेशानी न हो, इसका प्रशासन ने पूरा ख्साल रखा है।
15 दिनों तक बंद रहेगा लड़कियों का स्कूल:
पाक जायरीन की खिदमत के लिए सरकार का सेंट्रल गल्र्स स्कूल 15 दिनों तब बंद रहेगा। प्रशासन ने गत 26 फरवरी से ही स्कूल परिसर को अपने कब्जे में ले लिया है। चूंकि पाक जायरीन 7 मार्च को रवाना होंगे, इसलिए 8 मार्च तक लड़कियों का यह स्कूल बंद रहेगा। स्कूल में करीब डेढ़ हजार छात्राएं पढ़ती हैं। बालिका शिक्षा में यह स्कूल महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। पाक जायरीन दल जब भी उर्स में आता है तो इसी स्कूल में ठहराया जाता है।
जायरीन का सैलाब:
ख्वाजा साहब का छह दिवसीय उर्स 25 फरवरी से ही शुरू हो चुका है। उर्स में जुम्मे की नमाज 28 फरवरी को होगी, इसलिए 27 फरवरी को अजमेर में जायरीन का सैलाब रहा। उर्स में जुम्मे की नमाज का खास महत्व होता है, इसलिए 28 फरवरी को होने वाली नमाज में शरीक होने के लिए बड़ी संख्या में जायरीन अजमेर पहुंच गए है। यही वजह है कि अजमेर में जायरीन का सैलाब नजर आ रहा है। ख्वाजा साहब की दरगाह से सटे खादिम मोहल्ला दरगाह बाजार, लखन कोटड़ी, अंदर कोट, लौंगिया, गंज आदि क्षेत्रों में पैर रखने की जगह भी नहीं है। इसी प्रकार कायड़ विश्राम स्थली पर जायरीन की हजारों बसें आ चुकी है। उर्स के दौरान ख्वाजा साहब की मजार पर राजनेताओं की चादरें चढाने का सिलसिला भी जारी है। 27 फरवरी को एनसीपी के प्रमुख शरद पवार और उनकी पुत्री सांसद सुप्रिया सूले की ओर से ख्वाजा साहब की मजार पर चादर पेश की गई। पवार ने अपने संदेश में उर्स में शरीक होने वाले जायरीन को शुभकामनाएं भी दी है। पवार की ओर से यह चादर पंडित विमल पारीक और महाराष्ट्र से आए नेताओं द्वारा सूफी परंपरा के अनुरूप पेश की गई।
(एस.पी.मित्तल) (27-02-2020)
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