कांग्रेस के दबंग नेता रघु शर्मा के गुस्से का शिकार हुए सीनियर आरएएस हेमंत स्वरूप माथुर। रघु शर्मा के फोटो वाले विज्ञापन पर ग्राम पंचायत को पत्र लिखना और कुछ सरपंचों के भ्रष्टाचार को उजागर करना भारी पड़ा। शिखरानी   (मसूदा) के सरपंच ने तो अपनी पत्नी, माता-पिता और बहन के नाम ही पट्टे जारी कर दिए।

सीनियर आरएएस हेमंत स्वरूप माथुर को गत 3 दिसंबर को जब अजमेर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) के पद से एपीओ किया गया तो आरोप लगाया कि माथुर मनरेगा में कार्यों की स्वीकृति जारी नहीं कर रहे हैं, इससे ग्रामीणों को रोजगार नहीं मिल रहा है। लेकिन जिला प्रशासन द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि चार माह पहले जब माथुर ने सीईओ का पद संभाला था, तब अजमेर जिले में मनरेगा में मात्र 15 हजार ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा था, जबकि 15 नवंबर के आंकड़े बताते हैं कि जिले में करीब एक लाख ग्रामीणों को मनरेगा में काम मिल रहा है। यदि कार्यों की स्वीकृतियां जारी नहीं होती तो एक लाख लोगों को काम पर कैसे लगाया जाता। यानी कुछ सरपंचों ने माथुर पर जो आरोप लगाए वे झूठे थे। जानकारों की माने तो सीनियर आरएएस हेमंत स्वरूप माथुर कांग्रेस के दबंग नेता और गुजरात के प्रभारी रघु शर्मा के गुस्से का शिकार हुए हैं। रघु शर्मा अजमेर जिले के केकड़ी विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक हैं। इसलिए अजमेर जिले की राजनीति रघु शर्मा की दबंगई से चलती है। 28 नवंबर को प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों में सरवाड़ पंचायत समिति में आने वाले मेहरु कलां ग्राम पंचायत का आधे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित हुआ। यह विज्ञापन सावर पंचायत समिति के वार्ड चार के उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रुकमा देवी की जीत पर जारी किया गया था। ग्राम पंचायत द्वारा जारी इस विज्ञापन पर कांग्रेस के क्षेत्रीय विधायक ही हैसियत से रघु शर्मा का फोटो भी लगाया गया। इतना ही नहीं इस विज्ञापन में आशाराम मीणा और राजू जैन की फोटो सरपंच प्रतिनिधि के तौर पर लगाई गई। चूंकि राज्य सरकार ने ऐसे सजावटी और राजनीति से प्रेरित विज्ञापनों पर रोक लगा रखी है, इसलिए मेहरुकला ग्राम पंचायत के इस विज्ञापन को लेकर 28 नवंबर को ही जिला परिषद सीईओ माथुर ने सावर पंचायत समिति के विकास अधिकारी को एक पत्र लिखकर राज्य सरकार की एडवाइजरी के बारे में बताया और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए कि अखबारों में प्रकाशित सजावटी विज्ञापनों के भुगतान में सरकार के आदेशों की पालना की जाए। स्वाभाविक था कि यदि सरकारी आदेशों की पालना होती है तो मेहरु कलां ग्राम पंचायत 28 नवंबर वाले विज्ञापन का भुगतान नहीं कर सकती है। लेकिन जिस विज्ञापन पर कांग्रेस के दबंग नेता रघु शर्मा का फोटो छपा हो, उस विज्ञापन के भुगतान को रोकने की हिम्मत किस में है? सीईओ के पत्र के बाद सरपंच और ग्राम सेवक भी सरकारी कोष से भुगतान नहीं कर सकते हैं। जब यह मामला रघु शर्मा के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को शिकायत की। बाद में सीएमओ के दखल से तीन दिसंबर को माथुर को एपीओ कर दिया गया। हालांकि जिला कलेक्टर अंशदीप ने अपने अधीनस्थ अधिकारी की कार्यकुशलता के बारे में उच्च अधिकारियों को बताया, लेकिन रघु के गुस्से के आगे किसी की भी नहीं चली। सावर पंचायत समिति भी रघु के निर्वाचन क्षेत्र केकड़ी में आती है। रघु शर्मा के गुस्से का कारण सरवाड़ की ताजपुरा ग्राम पंचायत के सरपंच प्रधान गुर्जर पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप भी है। संभागीय आयुक्त के आदेशों पर सरपंच के खिलाफ जांच हुई तो 90 लाख रुपए का भ्रष्टाचार उजागर हुआ। पंचायत राज्य मंत्री रमेश मीणा ने इस जांच रिपोर्ट के आधार पर सरपंच प्रधान गुर्जर के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने के आदेश दिए। पंचायतीराज विभाग के मंत्री के आदेश के बाद सीईओ माथुर अपने स्तर पर मामले का रफा-दफा या लंबित नहीं कर सके थे, वैसे भी जांच के बाद एफआईआर दर्ज होती ही है। रघु शर्मा के समर्थकों को उम्मीद थी कि सीईओ माथुर इशारे को समझेंगे, लेकिन माथुर ने अपने विभाग के मंत्री के आदेशों की पालना करते हुए एफआईआर दर्ज करवा दी। सीईओ माथुर पर जिन सरपंचों ने मनरेगा की स्वीकृतियों में विलंब का आरोप लगाया, उनमें से अधिकांश पर भ्रष्टाचार या नियमों की अवहेलना करने के संगीन आरोप हैं। मसूदा पंचायत समिति की शिखरानी ग्राम पंचायत के सरपंच सुरेंद्र सिंह राठौड़ ने तो अपनी पत्नी मीनू कंवर (मसूदा की प्रधान), प्रकाश कंवर माताजी, शैतान सिंह पिता जी तथा बहन उषा कंवर के नाम ही 300-300 वर्ग गज के पट्टे जारी कर दिए। इस ग्राम पंचायत में फर्जी पट्टे जारी होने के मामले में भी सामने आए हैं। प्रधान मीनू कंवर पर तो झूठा शपथ पत्र देने का भी आरोप है। भिनाय ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती अर्चना सुराणा को भी नियमों की अवहेलना करने का दोषी माना गया है। सुराणा के विरुद्ध भी संभागीय आयुक्त के निर्देश पर ही जांच हुई है। 
माकड़वाली:
अजमेर शहर की सीमा से लगी माकड़वाली ग्राम पंचायत में अजमेर विकास प्राधिकरण की 65 बीघा भूमि को खुर्दबुर्द किया गया है। यहां भी सरपंच और ग्राम सेवक पर गंभीर आरोप है। माकड़वाली में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत जिला प्रमुख सुशील कंवर पलाड़ा की जनसुनवाई में भी हुई। जिला प्रमुख के आदेश पर ही पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने की कार्यवाही की गई है। 
चाचियावास:
अजमेर ग्रामीण पंचायत समिति के अधीन आने वाली चाचियावास ग्राम पंचायत की सरपंच संजू देवी गुर्जर के विरुद्ध भी पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 38 में कार्यवाही करने की अनुशंसा की गई है। इसके साथ ही ग्राम विकास अधिकारी प्रताप सिंह रावत को निलंबित करने के आदेश भी जारी किए गए हैं। इस ग्राम पंचायत पर फर्जी पट्टे जारी करने के गंभीर आरोप हैं। 
शोकलिया:
सरवाड़ पंचायत समिति के अधीन आने वाली शोकलिया ग्राम पंचायत में हुए भ्रष्टाचार की जांच के लिए भी एक कमेटी गठित की गई है। इसी पंचायत समिति के कांग्रेसी नेता गोपाल सिंह ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी को शिकायत की जिसमें मनरेगा के कार्यों में भ्रष्टाचार होने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जानकारों के अनुसार शोकलिया में हुए भ्रष्टाचारों की जांच कराने पर भी रघु शर्मा के समर्थक बेहद नाराज थे। सूत्रों का कहना है कि यदि केकड़ी विधानसभा क्षेत्र की पंचायतों की जांच करवाई जाए तो बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार उजागर होगा। हालांकि जिला परिषद के सीईओ हेमंत स्वरूप माथुर ने अपनी ओर से किसी सरपंच के भ्रष्टाचार की जांच की पहल नहीं की, लेकिन राज्य सरकार और संभागीय आयुक्त के निर्देश पर जो कार्यवाही की उससे भी रघु शर्मा के समर्थक खासे नाराज रहे। 

S.P.MITTAL BLOGGER (07-12-2022)
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