- Next story मोदी जी! आखिर कब तक देश विरोधी तत्वों से भारत को बचाओगे? सवाल छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि हर ऐसे आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता का है। नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। री-नीट के रिजल्ट के बाद आंदोलन का क्या तुक था? जसवंत दारा का सटीक और प्रभावी कार्टून। ================ 25 जुलाई को दोपहर बाद जब धर्मेन्द्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया, तभी से मीडिया में प्रसारित हो रहा है, यह छात्रों और देश के युवाओं की जीत है। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घमंड के साथ कहा, हमने मोदी सरकार को झुका दिया। इसमें कोई दो राय नहीं कि छात्रों और युवाओं के देशव्यापी आंदोलन के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धर्मेन्द्र प्रधान से इस्तीफा लेना पड़ा। लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह आंदोलन सिर्फ छात्रों और युवाओं का था? दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट बताती है कि जंतर मंतर के आंदोलन में देश विरोधी तत्व भी शामिल हो गए थे। आदतन अपराधियों ने भी स्टूडेंट का चोला ओढ़ लिया था। यही वजह रही कि 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान जबरदस्त हिंसा हुई। दिल्ली की तरह यह आंदोलन देश भर में फैल गया और जगह जगह हिंसा होने लगी। सरकार भी मानती है कि इस हिंसा में युवाओं का कोई योगदान नहीं है, लेकिन आंदोलन में देश विरोधी तत्वों की सक्रियता से आंदोलन हिंसक हुआ। यह पहला मौका नहीं है, जब ऐसे आंदोलन में हिंसा हुई। इससे पहले सीएए (नागरिकता संशोधन कानून), किसान आंदोलन आदि के दौरान भी देश विरोधी तत्वों की सक्रियता देखने को मिली थी। किसान आंदोलन में तो सरकार को संसद में पारित कानूनों को वापस लेना पड़ा था। ताजा छात्र आंदोलन को देखते हुए धर्मेन्द्र प्रधान ने जो इस्तीफा दिया उसमें भी यह लिखा है कि राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे और बच्चे अपनी पढ़ाई और करियर पर फोकस करें, इसलिए मैं इस्तीफा दे रहा हंू। धर्मेन्द्र प्रधान का यह कथन बताता है कि छात्र आंदोलन के नाम पर देश के हालात बिगाड़ने की साजिश हो रही थी। इसलिए सवाल उठता है कि आखिर देश विरोधी ताकतों से भारत को कब तक बचाया जाएगा। हर बार देश विरोधी ताकतें ज्यादा शक्ति के साथ भारत पर हमला करती हैं। यह कहा जा सकता है कि भारत में देश विरोधी ताकतें लगातार मजबूत हो रही है। ऐसी ताकतें सिर्फ मौके का इंतजार करती है। ऐसे आंदोलनों में जिस तरह पीएम मोदी को गालियां दी जाती है उससे भी जाहिर है कि देश विरोधी ताकतें अपने मंसूबों में मोदी को सबसे बड़ा बाधक मानती है। यानी जब तक मोदी की सत्ता रहेगी, तब तक देश विरोधी ताकतों को भारत को तोडऩे का अवसर नहीं मिलेगा। यही वजह है कि ऐसे आंदोलनों में सीधे मोदी को ही टारगेट किया जाता है। धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा करवाकर पीएम मोदी ने सिर्फ अराजकता के माहौल को टाला है। देश में राष्ट्रविरोधी ताकतें कभी भी हालातों को बिगाड़ सकती है। यदि धर्मेन्द्र प्रधान को नीट पेपर लीक पर इस्तीफा देना था तो 10 मई को ही दे देना चाहिए था। नीट यूजी की परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। परीक्षा होने के साथ ही पेपर लीक की खबरें आ गई थी, लेकिन तब प्रधान ने इस्तीफा नहीं दिा। प्रधान के शिक्षा मंत्री रहते हुए ही 21 जून को दुबारा से परीक्षा हुई और 16 जुलाई को परिणाम भी घोषित कर दिया गया। यानी कॉकरोच जनता पार्टी ने जुलाई माह में जो आंदोलन शुरू किया उसमें नीट यूजी पेपर लीक का तो कोई मुद्दा नहीं था। विपक्ष के नेता अब भले ही धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय ले, लेकिन मई में पेपर लीक के समय कोई भी राजनीतिक दल सरकार के खिलाफ आंदोलन को खड़ा नहीं कर सका। जुलाई में आंदोलन तब शुरू हुआ, जब कॉकरोच पार्टी के संस्थापक दीपके अमेरिका से भारत आए। यानी विदेश से आकर एक व्यक्ति ने देशभर में आंदोलन को खड़ा किया। जिस तरह से नीट पेपर लीक पर अब आंदोलन किया गया उसकी जांच होगी तो देश विरोधी ताकतों के चेहरे पर से नकाब भी उतर जाएगी। संसद में चर्चा हो: नीट पेपर लीक और कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ताकि देशवासियों को आंदोलन की हकीकत का पता चल सके। अच्छा हो कि इस चर्चा में विपक्ष भी भाग लें। सरकार की ओर से सार्वजनिक परीक्षा प्रणाली 2024 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव रखा जाएगा। इस संशोधित प्रस्ताव में ही आंदोलन पर चर्चा होनी चाहिए। दारा का कार्टून: शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा और छात्रों के आंदोलन में देश विरोधी ताकतों की भूमिका को लेकर कार्टूनिस्ट जसवंत दारा ने सटीक और प्रभावी कार्टून बनाया है। इस कार्टून को मेरे फेसबुक पेज www.facebook.com/SPMittalblog पर देखा जा सकता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 26-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story अशोक गहलोत और गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पेपर लीक पर पोल खुल जाएगी, इसलिए कांग्रेस संसद में चर्चा नहीं होने दे रही। राजस्थान में रीट का पेपर लीक होने पर डोटासरा ने कहा था कि शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दें? ================ नीट पेपर लीक के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्ष 20 जुलाई से संसद में हंगामा कर रहा है। सरकार की ओर से बार बार आग्रह किया जा रहा है कि पेपर लीक पर चर्चा के लिए तैयार है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने भी कहा है कि विपक्ष के नेता जितने समय के लिए चाहे उतने समय तक पेपर लीक पर चर्चा करवाने को तैयार है। लेकिन इसके बाद भी संसद के दोनों सदनों में पेपर लीक पर चर्चा नहीं हो रही है। असल में कांग्रेस को पता है कि यदि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। कांग्रेस ने खासकर राहुल गांधी ने पेपर लीक को लेकर जो मांगे सरकार के समक्ष रखी है, उनकी हवा चर्चा के दौरान निकल जाएगी। असल में राजस्थान में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री रहते हुए वर्ष 2018 से 2023 के बीच 19 परीक्षाओं के पेपर आउट हुए। बार बार पेपर लीक की घटनाओं पर गहलोत ने कहा था कि पेपर लीक को रोकना अकेले किसी सरकार के बस में नहीं है, क्योंकि इसमें संगठित गिरोह शामिल है। तब गहलोत ने इसे देशव्यापी समस्या बताया था। पेपर लीक पर गहलोत ने जो कुछ कहा उसे भाजपा के सांसद संसद में चर्चा के दौरान बताएंगे और जब गहलोत के कथन एक एक कर बताए जाएंगे तो कांग्रेस की मौजूदा मांगों की हवा निकल जाएगी। कांग्रेस अभी नीट पेपर लीक पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा भी मांग रही है। लेकिन राजस्थान में गोविंद सिंह डोटासरा जब कांग्रेस सरकार में शिक्षा मंत्री थे, तब शिक्षक पात्रता परीक्षा रीट का पेपर लीक हुआ। तब 20 लाख से ज्यादा युवाओं को दोबारा से परीक्षा देनी पड़ी थी। तब शिक्षा मंत्री के नाते डोटासरा से इस्तीफे की मांग की गई, लेकिन तब डोटासरा ने कहा कि रीट का पेपर लीक होने पर शिक्षा मंत्री इस्तीफा क्यों दे? परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की है। यानी तब कांग्रेस ही शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज कर चुकी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आज नीट पेपर लीक पर कांग्रेस किस मुंह से शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रही है? संसद में चर्चा के दौरान भाजपा के सांसद डोटासरा के कथन का भी उल्लेख करेंगे। इतना ही नहीं संसद में चर्चा के दौरान कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के बयानों को भी पढ़ा जाएगा। पायलट, गहलोत सरकार में डिप्टी सीएम थे और तब उन्होंने पेपर लीक पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। पायलट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग में सीएम गहलोत द्वारा की गई सदस्यों की नियुक्ति पर भी ऐतराज जताया था। इतना ही नहीं अपनी ही सरकार के खिलाफ पायलट ने अजमेर से जयपुर तक पद यात्रा भी निकाली। संसद को यह भी बताया जाएगा कि कि गहलोत द्वारा आयोग में नियुक्त सदस्य बाबूलाल कटारा तो स्वयं ही परीक्षा के प्रश्न पत्रों को बेचने का काम कर रहा था। कटारा अभी जेल में है तथा गहलोत द्वारा नियुक्त दो महिला सदस्य श्रीमती संगीता आर्य और श्रीमती मंजू शर्मा आरोपों के बाद इस्तीफा दे चुकी है। संसद को यह भी बताया जाएगा कि आयोग में एक सदस्य की नियुक्ति के बाद अशोक गहलोत को सार्वजनिक तौर पर माफी मांगनी पड़ी थी। तब गहलोत ने कहा था कि मुझे इस सदस्य की पृष्ठभूमि पता होती तो मैं नियुक्ति नहीं करता। कांग्रेस को पता है कि पेपर लीक पर चर्चा हुई तो गहलोत और डोटासरा की वजह से पोल खुल जाएगी। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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