एमडीएस यूनिवर्सिटी का सफर 38 वर्ष पहले दयानंद कॉलेज के हॉस्टल से शुरू हुआ था। प्रो. रामवली उपाध्याय प्रथम कुलपति थे। वर्तमान कुलगुरु सुरेश अग्रवाल के नवाचारों की प्रदेशभर में गूंज। एक अगस्त को 39वें स्थापना दिवस समारोह में राज्यपाल बागड़े शामिल होंगे। ============== अजमेर स्थित महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय (एमडीएसयू) एक अगस्त को अपना 39वां स्थापना दिवस धूमधाम से मना रहा है। इस विश्वविद्यालय के पास आज भले ही विशालतम संसाधन और संपत्तियां हो, लेकिन इसकी शुरुआत अजमेर के निजी क्षेत्र के दयानंद कॉलेज के हॉस्टल से हुई थी। तब सरकार के पास अजमेर में ऐसा कोई भवन नहीं था, जिसमें विश्वविद्यालय को संचालित किया जा सके। ऐसी स्थिति में सरकार को दयानंद कॉलेज के हॉस्टल को किराये पर लेना पड़ा। हास्टल के जिन कमरों में कभी विद्यार्थी रहते थे, उन्हीं कमरों में विश्वविद्यालय का संचालन किया गया। यह विश्वविद्यालय करीब कुछ वर्षों तक किराये के परिसर में ही चला। वर्ष 1990 में निकटवर्ती कायड़ ग्राम में विश्वविद्यालय को आवंटित भूमि पर दो तीन भवन निर्मित हुए और फिर इस विश्वविद्यालय को स्थानांतरित किया गया। आवंटित भूमि पर सबसे ज्यादा भवनों का निर्माण पीएल चतुर्वेदी के कुलपति रहते हुए हुआ। प्रो. चतुर्वेदी 12 जनवरी 1995 से 2 दिसंबर 1999 तक कुलपति रहे। यहां उल्लेखनीय है कि प्रो. पीएल चतुर्वेदी वर्तमान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी के पिता थे। पहले इस विश्वविद्यालय का नाम अजमेर विश्वविद्यालय रखा गया, चूंकि अजमेर में स्वामी दयानंद का निर्वाण हुआ, इसलिए विश्वविद्यालय का नाम आगे चलकर महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय रखा गया। आज गर्व के साथ कहा जा सकता है कि प्रदेश के उच्च शिक्षा के क्षेत्र में यह विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जब विश्वविद्यालय की शुरुआत हुई, तब प्रो. रामवली उपाध्याय प्रथम कुलपति बने। मौजूदा समय में प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल कुलगुरु के तौर पर कार्य कर रहे हैं। यह संयोग ही है कि प्रो. अग्रवाल का एक वर्ष का कार्यकाल हाल ही में पूरा हुआ है। प्रो. अग्रवाल ने अल्प अवधि में ही विश्वविद्यालय में जो नवाचार किए हैं, उसकी गूंज पूरे प्रदेश में है। कुलाधिपति और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े भी प्रो. अग्रवाल की कार्यशैली की प्रशंसा कर चुके है। यदि सरकार ने प्रो. अग्रवाल के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तो आने वाले दिनों प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की प्रवेश प्रक्रिया एक समान ही होगी। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि 39वें स्थापना दिवस का मुख्य समारोह एक अगस्त को विश्वविद्यालय परिसर स्थित बृहस्पति भवन में प्रात: साढ़े 11 बजे होगा। इस समारोह के मुख्य अतिथि कुलाधिपति और राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े होंगे। जबकि विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और कैबिनेट मंत्री सुरेश सिंह रावत विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे। इस समारोह में विश्वविद्यालय के अब तक के सफर की विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रो. अग्रवाल ने बताया कि स्थापना दिवस के समारोह की शुरुआत 31 जुलाई से ही हो रही है। इस दिन 108 दीपों से दीप यज्ञ और स्काई नॉर्टन के आयोजन होंगे। 3 अगस्त को आत्ममंथन दिवस, 4 अगस्त को विभागीय उपलब्धियों की प्रदर्शनी, पांच अगस्त को सांस्कृतिक एवं गुरु वंदन का कार्यक्रम, 6 अगस्त को विश्वविद्यालय की भावी कार्य योजना और विकास पर मंथन होगा। 7 अगस्त को समापन समारोह आयोजित होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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