- Next story अजमेर में गहलोत और पायलट गुट फिर आमने-सामने। नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस की फूट चौराहे पर। पायलट समर्थकों ने धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल पर ऐतराज जताया। ================ अगले महीने जब अजमेर नगर निगम के चुनाव होने हैं, तब कांग्रेस की फूट चौराहे पर है। चुनाव से पूर्व, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के समर्थक आमने सामने हो गए है। पायलट समर्थक माने जाने वाले पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत दो बार दक्षिण क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के नेतृत्व में पायलट समर्थकों ने 7 अगस्त को एक बैठक की। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए। विजय जैन और हेमंत भाटी ने आरोप लगाया कि आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल से अजमेर शहर में कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। मौजूदा शहर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल भी राठौड़ के दबाव में काम कर रहे हैं। इससे पुराने और निष्ठावान कांग्रेसियों की की उपेक्षा हो रही है। मौजूदा समय में अजमेर शहर में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त माहोल है। इस बार नगर निगम का मेयर कांग्रेस का बन सकता है, लेकिन धर्मेन्द्र राठौड़ की विभाजनकारी नीतियों के कारण कांग्रेस का कार्यकर्ता निराश है। जैन और भाटी ने कहा कि आखिर धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर की राजनीति में क्यों सक्रिय हैै? राठौड़ ने तो पूर्व में बानसूर (जयपुर ग्रामीण) से चुनाव लड़ा। उनकी राजनीतिक गतिविधियां बानसूर में ही रही है। लेकिन राठौड़ अब अजमेर में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे कांग्रेस का कार्यकर्ता स्वीकार नहीं करेगा। जैन और भाट ने कहा कि हमारा प्रयास कांग्रेस को मजबूत करने का है। जबकि धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर में कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। जैन और भाटी के आरोपों के जवाब में राठौड़ का कहना रहा है कि वे गत 8 वर्षों से अजमेर की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं। उनका पैतृक गांव अजमेर के निकट नांद है। उन्होंने गत 8 वर्षों से अजमेर में कांग्रेस संगठन को मजबूती दी है। आज जो लोग कांग्रेस को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, उन्हीं के कारण अजमेर शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर गत पांच बार से लगातार कांग्रेस उम्मीदवारों की हार हो रही है। कांग्रेस को नगर निगम में भी अपना बोर्ड बनाने का अवसर नहीं मिल रहा है। राठौड़ ने कहा कि शहर अध्यक्ष जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट है। मैंने तो प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान किया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि धर्मेन्द्र राठौड़ को पूर्व सीएम गहलोत का कट्टर समर्थक माना जाता है। सितंबर 2022 में अब अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस के विधायकों की समानांतर बैठक हुई, तब जिन 3 कांग्रेसी नेताओं को हाईकमान ने अनुशासनहीनता का नोटिस दिया, उसमें धर्मेन्द्र राठौड़ भी शामिल थे। आज भी राठौड़, गहलोत के साथ खड़े हैं। राठौड़ का कहना है कि मैं अशोक गहलोत का पक्का समर्थक हंू। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों में से सिर्फ 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी। सवाल- क्या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा वंचित 82 जातियों के लोगों को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीद बनाएंगे? आखिर क्यों 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, निकाय प्रमुख आदि बनते हैं? ================ 5 अगस्त को जयपुर में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने 900 पन्नों वाली आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण होगा, लेकिन इस रिपोर्ट में चौकाने वाली बात यह है कि राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की 92 जातियों हैं, लेकिन इनमें से 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी है। यानी इन 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, शहरी निकायों के प्रमुख आदि बनते हैं। शेष वंचित 82 जातियों के लोग पार्षद और सरपंच भी नहीं बन पाते। इस बड़े अंतर को देखते हुए ही आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश भाटी ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट केवल जनसंख्या को आधार मानकर नहीं बनाई है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी देखकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर के 74 लाख 85 हजार ओबीसी वर्ग के परिवारों से संवाद किया गया है। यह वाकई अजीत बात है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की ऐसी 82 जातियां हैं, जिनका कोई भी प्रतिनिधि आज तक सांसद, विधायक आदि नहीं बन सकता है। यानी 92 जातियों का समूह होने के बाद भी सिर्फ 10 जातियों के लोग ही मलाई खा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए? कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश भर में जाति आधारित जनगणना की मांग की तो उनका तर्क था कि वंचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। राहुल गांधी कहना रहा कि जाति आधारित जनगणना से पता चल जाएगा कि अभी तक राजनीति में किन जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की मांग पर जाति आधारित जनगणना करवाने का निर्णय लिया है, लेकिन जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की रिपोर्ट उजागर हो गई है, तब सवाल उठता है कि क्या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इसी वर्ष होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में ओबीसी की वंचित 82 जातियों के लोगों को उम्मीदवार बनाएंगे? राहुल गांधी का सपना तभी पूरा होगा, जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की 82 जातियों के लोगों को आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। डोटासरा को अच्छी तरह पता है कि ओबीसी की वे 10 जातियां कौनसी है, जो राजनीति की मलाई खा रही है। यदि वंचित जातियों के लोगों को ओबीसी का लाभ दिया जाता है तो इस वर्ग में सामाजिक समानता भी आएगी। मौजूदा समय में सिर्फ 10 जातियों के लोग ही ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे का लाभ प्राप्त कर रहे है। यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में भी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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