- Next story ब्यावर की भी सीमेंट फैक्ट्री से ग्रामीणों का जीना मुश्किल। प्रतिबंधित केमिकल कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण, पानी जमीन सब कुछ खराब हो रहा है। ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप: पर्यावरण विभाग के अधिकारी तो अंधे हैं। ================ राजस्थान के ब्यावर के निकट अंधेरी देवरी में श्री सीमेंट का जो प्लांट (फैक्ट्री) लगा हुआ है उसकी वजह से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। यह प्लांट देश के सुविख्यात बांगड़ औद्योगिक घराने का है। यूं तो बांगड़ घराना समाजसेवा का दावा करता है,लेकिन ब्यावर प्लांट की वजह से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग हो रहा है। यह केमिकल सीमेंट बनाने के काम आने वाले पत्थरों को बरीक किया जाता है, लेकिन कोयले की कीमत बढ़ने के कारण बांगड़ समूह श्री सीमेंट फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग कर रहा है। यही कारण है कि फैक्ट्री से जो धुंआ निकलता है, उसकी वजह से आस पास के लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। कई ग्रामीणों को चर्म रोग हो गया है। घरों पर मिट्टी की परत आ रही है। इस जहरीली परत को बार बार हटाना भी कठिन है। फैक्ट्री से जो जरीला पानी निकलता है उसकी वजह से खेती की जमीन बंजर हो रही है ।आसपास के कुओं और तालाबों का पानी भी जहरीला हो गया है। पीड़ित ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप है। उल्टे ग्रामीणों को ही धमकी दी जा रही है कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि श्री सीमेंट के खिलाफ कोई धरना प्रदर्शन हो। जहां तक पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल है तो इस विभाग के अधिकारी अंधे है। उन्हें फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआ और पानी नजर नही नहीं आ रहा है। कहा जा सकता है कि ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं यहां यह कि ग्रामीणों को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि ब्यावर की प्रभारी राज्य के उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है, ग्रामीणों को पीड़ा मंत्री तक पहुंच गई है। लेकिन दीया कुमारी ने भी अभी तक श्री सीमेंट के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश नहीं दिए है। प्रभारी मंत्री की खामोशी से ब्यावर के पुलिस और जिला प्रशासन की मौज हो गई है। श्री सीमेंट की फैक्ट्री जिस अंधेरी देवरी गांव में स्थित है, वह मसूदा विधानसभा क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में मसूदा से भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत है, लेकिन कानावत के कानों में भी ग्रामीणों की आवाज सुनाई नहीं दे रही। ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत भी विधायक कानावत के साथ ही खड़े हे। ब्यावर जिला राजसमंद संसदीय क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में श्रीमती महिमा कुमारी भाजपा की सांसद है। शायद महिला कुमारी को भी यह भी पता नहीं होगा कि श्री सीमेंट की फैक्ट्री की वजह से ग्रामीणों को परेशान हो रही है। महिमा कुमारी मेवाड़ राजघराने की सदस्य हे। हो सकता है कि सांसद होने के कारण महिमा कुमारी के बांगड़ समूह से अच्छे संबंध हो। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा कर्म हमारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा। मन चंगा तो कठौती में गंगा। गुरु ग्रंथ साहिब में भी 41 वाणियों के शब्द। संत रविदास जी का यह विचार आम लोगों तक पहुंचना जरूरी। भाजपा की तरह कांग्रेस भी पहल कर सकती है। ================ संत कवि रविदास जी 650 वीं जयंती पर भाजपा पूरे देश में श्री गुरु रविदास महाराज समरसता संकल्प अभियान चला रही है। इसी के अंतर्गत 5 अगस्त को जयपुर में आयोजित एक समारोह में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने 245 रज कलश रथ को हरी झंडी दिखाई। ये रथ प्रदेश के सभी 25 लोकसभा क्षेत्रों में संत कवि रविदास के विचारों का प्रचार-प्रसार करेंगे। कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों के मद्देनजर रज कलश रथ को घुमाया जा रहा है। कांग्रेस का अपना तर्क हो सकता है कि लेकिन मौजूदा समय में समाज में जो जातिवाद हावी है,उसका मुकाबला संत कवि रविदास के विचारों से ही किया जा सकता है। 650 वर्ष पहले समाज को जो वातावरण था उसी में चर्मकार रविदास जी ने लिखा, जाति भी ओछी, जनम भी ओछा, ओछा करम हारा। हम रैदास राम राई को, कह रैदास बिचारा। यानी हमारी जाति, जनम और कर्म छोटा है, लेकिन हम तो राजाराम के अनुचर है। अर्थात् जो राम काज में रत भक्त है, उसका कर्म, जन्म और जाति कमतर कैसे हो सकता है। उस समय रैदास जैसा संत कवि ही लिख सकता था, मन चंगा तो कठौती में गंगा। यानी मन पवित्र है तो घर पर गंगा स्नान का पुण्य मिलता सकता है। चूंकि रविदास चर्मकार थे, इसलिए उनके पास चमड़ा भिगोने का का छोटा बर्तन होता था। इस बात को ही कठौती कहा गया है। संत रविदास जी ने अपनी रचनाएं 1489 से 1471 ईवी के बीच लिखी। यह वह दौर था, जब भारत पर लोदी वंश के शासक राज कर रहे थे, इस से पहले हिंदू समाज पर कासिम, गजनवी, गौरी, खिलजी, गुलाम वंश, तुगलक, तैमूर के अत्याचार हो चुके थे। यह वही दौर था जब तलवार की नोंक पर हिंदुओं का धर्म परिवर्तन कराया जा रहा था। तब संपूर्ण हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए संत रविदास जी ने रचनाएं लिखी। रविदास जी की रचनाएं यह बताती है कि हिंदू समाज को आज 650 वर्ष बाद भी एकजुट करने की जरूरत है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि रविदास जी द्वारा लिखित 41 वाणियोंं को सिख समुदाय के गुरु ग्रंथ साहिब में शब्द के रूप में शामिल किया गया है। इससे भी रविदास के विचारों की मानता का अंदाजा लगाया जा सकता है। रविदास जी के विचारों को रथ के जरिए भले ही भाजपा ने पहुंचाने का काम किया हो, लेकिन यह काम कांग्रेस भी कर सकती है। भाजपा ने रथ रवाना किए हैं उनमें एक कलश भी रखा हुआ है। इस कलश में वाराणसी के क्षीर, गोवर्धन पुर की रज (मिट्टी) भी भरी हुई है। चूंकि गोवर्धन पुर ही संत रविदास जी की कर्मस्थली रहा, इसलिए अब मिट्टी को पवित्र मानकर उनके विचारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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