- Next story 61 वर्षीय अभिनेता आमिर खान भले ही तीसरी शादी करे, लेकिन कम से कम सामाजिक मर्यादाओं का तो पालन करें। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय पहली और दूसरी पत्नियों तथा उनके बच्चों को उपस्थित रखने का क्या तुक है? जो लोग आमिर को अपना हीरो मानते हैं उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। ================ मुंबइया हिन्दी फिल्मों के अभिनेता 61 वर्षीय आमिर खान ने 5 जुलाई को 47 वर्षीय गौरी स्प्रैट से तीसरी शादी कर ली। आमिर खान गौरी के साथ पिछले कुछ वर्षों से लिवइन में रह रहे थे। आमिर और गौरी ने जब भारतीय विवाह कानून के अंतर्गत अपने विवाह का रजिस्ट्रेशन करवाया तब आमिर की पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव के साथ साथ उनके बच्चे भी उपस्थित रहे। तीसरी पत्नी गौरी के पहले विवाह से उत्पन्न बेटा भी उपस्थित रहा। आमिर खान तीसरी के बाद भले ही चौथी शादी भी करें, लेकिन उन्हें सामाजिक मर्यादाओं का तो ख्याल रखना ही चाहिए। तीसरी शादी के रजिस्ट्रेशन के समय उपस्थित पहली और दूसरी पत्नी और उनके बच्चों के फोटो और वीडियो न्यूज़ चैनलों और अखबारों में प्रसारित हो रहे हैं। सवाल उठता है कि तीसरी शादी के समय पहली और दूसरी पत्नी को उपस्थित रख आमिर खान भारत के सभ्य समाज को क्या संदेश देना चाहते हैं? भारत सनातन संस्कृति वाला देश है, जहां भगवान राम को मर्यादा पुरुष माना जाता है जो लोग आमिर खान को अपना हीरो मानते हैं, उन्हें आमिर खान की इस बेहयाई को भी समझना चाहिए। क्या भारत के सभ्य समाज में यह संभव है कि एक व्यक्ति जब तीसरी शादी करे तो उसकी पहली व दूसरी पत्नी व बच्चे भी उपस्थित रहे? समझ में नहीं आता कि पहली पत्नी रीना दत्त और दूसरी पत्नी किरण राव आमिर की तीसरी शादी के समय क्यों उपस्थित रही? यहां अभिनेता सलमान खान का हाल ही में दिए गए बयान का उल्लेख करना जरूरी है। सलमान खान की उम्र भी 60 वर्ष हो गई है, लेकिन उन्होंने कहा कि वे विवाह इसलिए नहीं कर रहे हैं उन्हें तलाक से डर लगता है, बीवी जब तलाक लेती है तो बड़ी मात्रा में पैसा भी ले जाती है, एक और सलमान खान तलाक के डर से विवाह नहीं कर रहे तो दूसरी ओर आमिर खान तीसरे विवाह के अवसर पर पहली और दूसरी बीवी को उपस्थित रख रहे हैँ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story आखिर अशोक गहलोत को किसने बताया कि सुखजिंदर सिंह रंधावा कांग्रेस से बगावत कर रहे हैं? क्या ऐसा बयान राजस्थान की राजनीति कमेटी को लेकर दबाव बनाने के लिए दिया गया? पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से भले ही भाजपा के नेता न मिले, लेकिन पूर्व सीएम गहलोत मिलते हैं। ================= 3 जुलाई को राजस्थान के कांग्रेस प्रभारी और पंजाब से लोकसभा के सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद रंधावा ने कहा कि पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान बिगड़ती कानून व्यवस्था को लेकर उन्होंने अमित शाह से मुलाकात की। इस मुलाकात में पंजाब के बिगड़ते हालातों की जानकारी दी। लेकिन इस मुलाकात को तब तूल मिला, जब राजस्थान के पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर बयान जारी किया। गहलोत ने लिखा कि अमित शाह और रंधावा की मुलाकात के कोई सियासी मायने नहीं निकाले जाने चाहिए। रंधावा कांग्रेस के वफादार नेता है। वे कोई गलत कदम नहीं उठाएंगे। गहलोत का आशय रहा कि रंधावा कांग्रेस से बगावत नहीं कर रहे हैं। सवाल उठता है कि आखिर गहलोत को किसने कहा कि रंधावा कांग्रेस से बगावत नहीं कर रहे हैं? किसी भी बड़े नेता अथवा मीडिया घराने ने अमित शाह और रंधावा की मुलाकात के सियासी मायने नहीं निकाले, लेकिन फिर भ गहलोत ने रंधावा को कटघरे में खड़ा करने के लिए अपना बयान जारी कर दिया। जबकि सच्चाई यह है कि रंधावा दिल्ली में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के साथ मिलकर प्रदेश की राजनैतिक कमेटी बनाने में व्यस्त हैं। डोटासरा दो दिन से दिल्ली में रंधावा के साथ ही कमेटी के सदस्यों के नाम पर विचार कर रहे हैं। राहुल गांधी के निर्देश पर बनने वाली इस राजनैतिक कमेटी की देखरेख में ही ढाई वर्ष बाद होने वाले विधानसभा के चुनाव कराए जाएंगे। उम्मीदवारों के चयन में भी इस कमेटी की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। जो रंधावा प्रदेश प्रभारी की हैसियत से राजनैतिक कमेटी बनाने में व्यस्त है वो रंधावा कांग्रेस के साथ कैसे बगावत कर सकते हैं? लेकिन गहलोत बिना किसी आधार के बयान जारी कर रंधावा की विश्वसनीयता और वफादारी पर सवाल खड़े कर दिए। जानकार सूत्रों की माने तो राजनैतिक कमेटी में स्वयं और अपने समर्थकों को शामिल करने को लेकर ही गहलोत ने बयान जारी किया। देखना होगा कि गहलोत के इस दबाव वाले बयान का रंधावा पर कितना असर पड़ता है। कांग्रेस की राजनीति में रंधावा को सख्त मिजाज का नेता माना जाता है। धनखड़ से गहलोत ही मिले: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इन दिनों जयपुर में एक निजी अस्पताल में भर्ती है। 2 जुलाई को धनखड़ की एंजियोप्लास्टी हुई। धनखड़ के स्वास्थ्य को देखते हुए किसी भी व्यक्ति को मिलने नहीं दिया जा रहा। यहां तक की भाजपा के बड़े नेता भी धनखड़ से नहीं मिल पा रहे हैं? लेकिन 3 जुलाई को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम अशोक गहलोत ने धनखड़ से मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी। गहलोत को प्रदेश प्रभारी रंधावा के केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मिलने पर तो सियासत नजर आती है, लेकिन जब स्वयं पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ से मिलते हैं तो सियासत नहीं होती। मालूम हो कि धनखड़ को उपराष्ट्रपति के पद से अचानक इस्तीफा देना पड़ा था, जबकि उनका दो वर्ष का कार्यकाल शेष था। राजस्थान की राजनीति में सक्रिय रहे धनखड़ जब भी दिल्ली से जयपुर आते हैं, तब अशोक गहलोत मुलाकात करते हैं। गत बार तो धनखड़ ने मुलाकात के लिए गहलोत को राजभवन में आमंत्रित किया। स्वाभाविक है कि एंजियोप्लास्टी के बाद अनेक भाजपा नेताओं ने भी धनखड़ से मुलाकात की अनुमति मांगी, लेकिन धनखड़ ने 3 जुलाई को अशोक गहलोत को ही मिलने की अनुमति दी। धनखड़ के अचानक इस्तीफे के बाद गहलोत ने कहा था कि धनखड़ के पास अनेक राज हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 04-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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