राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों में से सिर्फ 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी। सवाल- क्या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा वंचित 82 जातियों के लोगों को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीद बनाएंगे? आखिर क्यों 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, निकाय प्रमुख आदि बनते हैं? ================ 5 अगस्त को जयपुर में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने 900 पन्नों वाली आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण होगा, लेकिन इस रिपोर्ट में चौकाने वाली बात यह है कि राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की 92 जातियों हैं, लेकिन इनमें से 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी है। यानी इन 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, शहरी निकायों के प्रमुख आदि बनते हैं। शेष वंचित 82 जातियों के लोग पार्षद और सरपंच भी नहीं बन पाते। इस बड़े अंतर को देखते हुए ही आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश भाटी ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट केवल जनसंख्या को आधार मानकर नहीं बनाई है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी देखकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर के 74 लाख 85 हजार ओबीसी वर्ग के परिवारों से संवाद किया गया है। यह वाकई अजीत बात है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की ऐसी 82 जातियां हैं, जिनका कोई भी प्रतिनिधि आज तक सांसद, विधायक आदि नहीं बन सकता है। यानी 92 जातियों का समूह होने के बाद भी सिर्फ 10 जातियों के लोग ही मलाई खा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए? कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश भर में जाति आधारित जनगणना की मांग की तो उनका तर्क था कि वंचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। राहुल गांधी कहना रहा कि जाति आधारित जनगणना से पता चल जाएगा कि अभी तक राजनीति में किन जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की मांग पर जाति आधारित जनगणना करवाने का निर्णय लिया है, लेकिन जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की रिपोर्ट उजागर हो गई है, तब सवाल उठता है कि क्या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इसी वर्ष होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में ओबीसी की वंचित 82 जातियों के लोगों को उम्मीदवार बनाएंगे? राहुल गांधी का सपना तभी पूरा होगा, जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की 82 जातियों के लोगों को आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। डोटासरा को अच्छी तरह पता है कि ओबीसी की वे 10 जातियां कौनसी है, जो राजनीति की मलाई खा रही है। यदि वंचित जातियों के लोगों को ओबीसी का लाभ दिया जाता है तो इस वर्ग में सामाजिक समानता भी आएगी। मौजूदा समय में सिर्फ 10 जातियों के लोग ही ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे का लाभ प्राप्त कर रहे है। यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में भी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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