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14 व 15 जुलाई को राजस्थान में इंटरनेट सेवाएं बंद करने पर खुद स्पष्ट नहीं है पुलिस महकमा। दो दिन में 4 पारियों में होनी है कांस्टेबल परीक्षा।

by Sp mittal · July 13, 2018

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  • Next story तो क्या भारत में हरे रंग पर चांद सितारे वाला झंडा बैन हो जाएगा?
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    राजस्थान में 9 सितंबर से पेयजल सप्लाई ठप करने की फिर धमकी। ठेकेदारों की बार बार धमकी से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। आखिर बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ का भुगतान क्यों नहीं किया जाता? सप्लाई बंद होगी तो अजमेर, जयपुर, टोंक के एक करोड़ से भी ज्यादा लोग परेशान होंगे। ================ राजस्थान पीएचडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने 8 सितंबर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि 9 सितंबर से राजस्थान भर में पेयजल की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विश्नोई की ओर से कहा गया है कि सरकार ने ठेकेदारों का बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार अब जलदाय विभाग की पाइप लाइनों के संरक्षण और पेयजल की सप्लाई का काम नहीं कर सकते हैं। यह बकाया राशि पिछले 35 माह से चली आ रही है। सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार लिखित समझौता किया, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा। अब कोई भी ठेकेदार बकाया राशि के भुगतान के बगैर पेयजल सप्लाई का काम नहीं कर सकता है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी धमकी पूर्व में भी दी गई थी, लेकिन तब सरकार ने हाथों हाथ समझौता कर लिया। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। ठेकेदारों ने 9 सितंबर को पेयजल सप्लाई तब ठप करने की धमकी दी है, जब 9 सितंबर को शहरी निकाय के प्रथम चरण के चुनाव का मतदान का होना है। यदि मतदान वाले दिन प्रदेश भर में पेयजल की सप्लाई नहीं होती है, तो इससे उत्पन्न हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी माने या नहीं लेकिन ठेकेदारों की बार बार धमकी से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि बकाया भुगतान के लिए ठेकेदार पेयजल सप्लाई बंद करने की धमकी देते हैं, तो फिर सरकार के हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार ठेकेदारों को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही? जब सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए लिखित में समझौता कर रखा है तब ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। यह भी सोचनीय मुद्दा है कि पेयजल सप्लाई के लिए सरकार पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर है। सारे संसाधन सरकार के है, लेकिन नियंत्रण निजी क्षेत्र का हो गया है। कहा जा सकता है कि सरकार निजी क्षेत्र पर निर्भर है। 9 सितंबर से पेयजल की सप्लाई ठप होती है तो अजमेर, जयपुर, टोंक जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को परेशानी होगी। इन तीनों जिलों के लोग बीसलपुर बांध के पानी पर निर्भर है। बांध से प्रतिदिन 1200 टीएमसी पानी की सप्लाई तीनों जिलों में होती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    मेरे रिटायरमेंट का इंतजार हो रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की यह टिप्पणी जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से जुड़ी है? अरावली पर्वतमाला का संरक्षण भी जरूरी। ================ सब जानते हैं कि 7 सितंबर तक राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यशैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने लगातार पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के आरोपों की जांच के आदेश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिए हैं। न्यायिक क्षेत्रों में चर्चा है कि सीजेआई सूर्यकांत न्यायाधीश शर्मा को बचाने का काम कर रहे हैं। देश के न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने किसी प्रदेश के एक्टिंग सीजे पर ऐसे आरोप लगाए हैं। अभी यह मामला गर्माया हुआ ही है कि 7 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा के प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा, क्या मेरे रिटायरमेंट का इंतजार किया जा रहा है। मालूम हो कि सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे। 7 सितंबर को अरावली पर्वतमाला की परिभाषा की सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी की ओर से आग्रह किया गया कि परिभाषा तय करने के लिए 6 माह का समय और दिया जाए। कमेटी की इस मांग पर ही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, क्या कमेटी अपनी रिपोर्ट मेरे रिटायरमेंट के बाद देना चाहती है। सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि कमेटी का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा और कमेटी को तय समय के अनुसार 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 2 दिसंबर निर्धारित की गई। असल में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा का मामला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से जुड़ा हुआ है। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से खनन हो रहा है। केंद्र सरकार ने भी खनन माफियाओं को मदद करने के लिए अरावली पहाडिय़ों की ऊंचाई को सौ मीटर माना ताकि सौ मीटर से कम वाली पहाडिय़ों खनन का कार्य विधिवत हो सके। सीजेआई सूर्यकांत ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए ही हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया था। लेकिन अब यह कमेटी ही निर्धारित समय में रिपोर्ट देने में असमर्थता जता रही है। इसलिए 7 सितंबर को सूर्यकांत की रिटायरमेंट वाली टिप्पणी बहुत मायने रखती है। इस टिप्पणी को जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है, उसकी वजह से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान हो रहा है। सवाल उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पत्रों पर ही कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है, तो फिर आम व्यक्ति की शिकायत पर क्या कार्यवाही होगी। सूत्रों के अनुसार जस्टिस संदीप मेहता इस बात से बेहद खफा है कि उनके पत्रों के बाद भी सीजेआई सूर्यकांत ने राजस्थान में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों पर रोक नहीं लगाई। पिछले 10 माह से जस्टिस शर्मा को ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाए रखा गया है। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिनसे संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक फैसलों पर सवाल उठते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि 7 सितंबर को जस्टिस संजय अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल लिया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत अपना मुकाबला मौजूदा सीएम भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो करने का मामला। ================ राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को जितवाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बड़े शहरों में रोड शो कर रहे है। 5 सितंबर को सीएम शर्मा ने भीलवाड़ा और उदयपुर, 6 सितंबर को अजमेर, बीकानेर और जोधपुर में रोड शो किया। 7 सितंबर को अलवर, भरतपुर में रोड शो कर रहे है। 8 सितंबर को जयपुर में करेंगे। सीएम शर्मा के लगातार रोड शो करने पर पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एतराज जताया है। गहलोत का कहना है कि शहरी निकाय का चुनाव वार्ड स्तर का होता है, इसलिए मुख्यमंत्री पद पर आसीन नेता को प्रचार नहीं करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए शहरी निकाय चुनावों में कभी भी कांग्रेस का प्रचार नहीं किया। समझ में नहीं आता कि गहलोत अपनी तुलना भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? गहलोत को यह समझना चाहिए कि शर्मा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के लिए वार्ड को लेकर लोकसभा तक का चुनाव एक समान होता है। जो मतदाता वार्ड चुनाव में मतदान करता है, वही मतदाता विधायक और सांसद भी चुनता है। वैसे भी राजनीति में गहलोत और शर्मा का मुकाबला नहीं हो सकता। गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री तीन बार केंद्रीय मंत्री और तीन बार ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। जबकि भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बनकर मुख्यमंत्री बने हैं, शर्मा विधायक बनने से पहले सिर्फ एक बार सरपंच बने। यानी राजनीति में भजनलाल शमा्र के मुकाबले अशोक गहलोत की वरिष्ठता बहुत ज्यादा है, उसमें वार्ड का चुनाव छोटा ही नजर आएगा। भजनलाल शर्मा को गहलोत की बराबरी करने के लिए कम से कम 2 बार तो मुख्यमंत्री बनना ही पड़ेगा। चूंकि शर्मा को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को रिपीट करवाना है, इसलिए वार्ड चुनाव महत्व रखता है। आज गहलोत को भले ही लोकप्रिय होने की जरुरत न हो, लेकिन भजनलाल शर्मा को है। शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो के दौरान शर्मा वार्ड स्तर के भाजपा कार्यकर्ता से भी संवाद कर रहे है। जब वार्ड स्तर का कार्यकर्ता सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करता है तो फिर उसका उत्साह चार गुना बढ़ जाता है। अशोक गहलोत भले ही वार्ड के चुनाव को निम्न स्तर का मानते हो, लेकिन भजनलाल शमा्र के लिए वार्ड स्तर का चुनाव भी मायने रखता है। सीएम शर्मा के शहरी क्षेत्रों में रोड शो की वजह से भाजपा को फायदा हो रहा है। भाजपा के बागी उम्मीदवार अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन भी करने लगे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    12500वां ब्लॉग पिता स्वर्गीय कृष्णगोपाल जी गुप्ता को समर्पित। दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन नहीं खरीदी। ================ पाठकों के समक्ष जब मैं आज दिनांक 7 सितंबर 2026 को अपना 12500वां ब्लॉग प्रस्तुत कर रहा हंू, तब राजस्थान भर में शहरी निकाय के चुनावों का शोर है। 10245 वार्डों में 38 हजार से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन चुनावों में सभी उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे है। यह ब्लॉग मेरे स्वर्गीय पिता कृष्णगोपाल जी गुप्ता को इसलिए समर्पित कर रहा हंू कि वे दो बार अजमेर नगर परिषद के वार्ड संख्या 33 से पार्षद चुने गए। पहली बार वर्ष 1964 और दूसरी बार 1977 में पार्षद बने। उस समय वार्ड पार्षद का चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं होता था। उम्मीदवार को निर्दलीय नामांकन दाखिल करना होता था। बाद में राजनीतिक दल अपने समर्थन की घोषणा करते थे, लेकिन पिता ने दो बार किसी राजनीतिक दल का समर्थन लिए बगैर चुनाव जीता। तब राजनीतिक दल से ज्यादा उम्मीदवार की छवि मायने रखती थी। आज भले ही वार्ड चुनाव का उम्मीदवार लाखों रुपया खर्च कर रहा हो, लेकिन तब पिताजी ने कुछ रुपयों में ही चुनाव जीता। अजमेर में गोपाल भैया के नाम से लोकप्रिय पिताजी ने दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन भी नहीं खरीदी और न ही अपने घर के मकान का जुगाड़ किया। पूरा जीवन किराये के मकान में गुजार दिया। तब भले ही ज्वाला प्रसाद शर्मा, माणकचंद सोगानी जैसे कांग्रेस के नेता नगर परिषद के अध्यक्ष रहे हों, लेकिन निर्दलीय पार्षद के तौर पर भी पिता का पूरा सम्मान होता था। नगर परिषद के कार्यालय में जाने के लिए वाहन के तौर पर साइकिल का ही उपयोग होता था। चूंकि रेल दुर्घटना में पिता का एक पैर क्षत्रिस्त हो गया था, इसलिए गोपाल भैया साइकिल के कैरियर पर बैठकर ही नगर परिषद के कार्यालय पहुंचते थे। ऐसे पिता को 12500वां ब्लॉग समर्पित कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। यह पिता का आशीर्वाद ही है कि आज मेरे ब्लॉग राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के हिन्दी भाषी राज्यों में प्रमुखता के साथ पढ़े जाते हैं। राजस्थान में तो वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से गांव ढाणी तक में ब्लॉक की पहुंच है। 25 लाख से ज्यादा पाठकों से सीधा संवाद है। जब कोई ब्लॉग वायरल होता है तो फिर करोड़ों लोगों तक पहुंचता है, इसके साथ ही मैं राजस्थान के प्रमुख न्यूज़ चैनल फर्स्ट इंडिया, सच बेधड़क, न्यूज 18, जीटीवी, एनडीटीवी आदि पर प्रतिदिन सायं पांच बजे और रात 8 बजे की लाइव डिबेट में भाग लेता हूं। यह सब पिता के आशीर्वाद से ही संभव है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी, लेकिन उनमें भाजपाई संस्कार तो है ही-मदन राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष। कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं, इसलिए स्नेहलता अग्रवाल बागी उम्मीदवार। भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद लिया। ================ राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी हो, लेकिन उनमें भाजपा के संस्कार बने हुए है। मालूम हो कि गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 4 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हे। अपनी पत्नी को चुनाव जितवाने के लिए गहलोत ने पूरी ताकत लगा रखी है। प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि मैं चाहता हूं कि गहलोत अपनी पत्नी की उम्मीदवार वापस ले और भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार मोनिका को समर्थन दे। गहलोत की नाराजगी भाजपा किसी नेता से हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत नाराजगी के कारण पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। भाजपा ने ही गहलोत को दो बार अजमेर का मेयर बनाया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के प्रति तो नाराजगी दूर हो सकती है, लेकिन पार्टी के प्रति नाराजगी दिखाने के बाद कोई गुंजाइश नहीं रहती। मालूम हो कि गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। गहलोत का यहां तक आरोप है कि उनके आर्किटेक्ट पुत्र ने जिन भवनों का निर्माण करवाया उन्हें भी नियम विरुद्ध मानते हुए देवनानी के दबाव में सीज करवा दिया गया। महिलाओं का सम्मान नहीं: अजमेर नगर निगम के वार्ड 70 से निर्दलीय उम्मीदवार स्नेहलता अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है। वे पिछले 25 साल से कांग्रेस में सक्रिय हैं। मौजूदा समय में ब्लॉक, महासचिव, सेवादल की सह-उपाध्यक्ष आदि पदों पर आसीन हंू। इसके अलावा वर्ष 2007 से राष्ट्रीय पंचायत परिषद की सदस्य भी हैं। कांग्रेस में अपनी सक्रियता को देखते हुए ही उन्होंने वार्ड 70 से टिकट मांगा था। लेकिन शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता ने उनकी अनदेखी की। वार्ड 70 सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित रहा,लेकिन डॉ. जयपाल और रलावता ने आपसी मिलीभगत कर ओबीसी वर्ग की गीता गुर्जर को कांग्रेस का उम्मीदवार बनवा दिया। चूंकि मेरे साथ अन्याय हुआ,इसलिए मैं अब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हंू। मुझे अपने वार्ड में व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। चुनाव अधिकारी ने अलमारी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। कांग्रेस से हुई उपेक्षा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214865836 पर स्नेहलता अग्रवाल से ली जा सकती है। मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद: नगर निगम के वार्ड 38 के भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने 6 सितंबर को राजगढ़ स्थित मसाणिया भैरव धाम के उपासक चंपालाल महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर बाशानी ने धाम पर स्थित मनोकामना स्तंभ की परिक्रमा भी की और धाम में स्थित मसाणिया भैरव मंदिर के दर्शन भी किए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    Hacked By 0x1999 – Indonesian Code Party – Jatim4u

    14 Apr, 2016

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    राजस्थान में 9 सितंबर से पेयजल सप्लाई ठप करने की फिर धमकी। ठेकेदारों की बार बार धमकी से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। आखिर बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ का भुगतान क्यों नहीं किया जाता? सप्लाई बंद होगी तो अजमेर, जयपुर, टोंक के एक करोड़ से भी ज्यादा लोग परेशान होंगे। ================ राजस्थान पीएचडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने 8 सितंबर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि 9 सितंबर से राजस्थान भर में पेयजल की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विश्नोई की ओर से कहा गया है कि सरकार ने ठेकेदारों का बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार अब जलदाय विभाग की पाइप लाइनों के संरक्षण और पेयजल की सप्लाई का काम नहीं कर सकते हैं। यह बकाया राशि पिछले 35 माह से चली आ रही है। सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार लिखित समझौता किया, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा। अब कोई भी ठेकेदार बकाया राशि के भुगतान के बगैर पेयजल सप्लाई का काम नहीं कर सकता है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी धमकी पूर्व में भी दी गई थी, लेकिन तब सरकार ने हाथों हाथ समझौता कर लिया। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। ठेकेदारों ने 9 सितंबर को पेयजल सप्लाई तब ठप करने की धमकी दी है, जब 9 सितंबर को शहरी निकाय के प्रथम चरण के चुनाव का मतदान का होना है। यदि मतदान वाले दिन प्रदेश भर में पेयजल की सप्लाई नहीं होती है, तो इससे उत्पन्न हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी माने या नहीं लेकिन ठेकेदारों की बार बार धमकी से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि बकाया भुगतान के लिए ठेकेदार पेयजल सप्लाई बंद करने की धमकी देते हैं, तो फिर सरकार के हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार ठेकेदारों को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही? जब सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए लिखित में समझौता कर रखा है तब ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। यह भी सोचनीय मुद्दा है कि पेयजल सप्लाई के लिए सरकार पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर है। सारे संसाधन सरकार के है, लेकिन नियंत्रण निजी क्षेत्र का हो गया है। कहा जा सकता है कि सरकार निजी क्षेत्र पर निर्भर है। 9 सितंबर से पेयजल की सप्लाई ठप होती है तो अजमेर, जयपुर, टोंक जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को परेशानी होगी। इन तीनों जिलों के लोग बीसलपुर बांध के पानी पर निर्भर है। बांध से प्रतिदिन 1200 टीएमसी पानी की सप्लाई तीनों जिलों में होती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    सूफीवाद को आगे बढ़ाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इतिहास को दोहरा रहे हैं। ख्वाजा साहब के उर्स के मौके पर दीवाना आबेदीन ने मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों के समारोह में कहा।

    14 Apr, 2016

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    तो श्रीनगर के एनआईटी कैम्पस से गैर कश्मीरी विद्यार्थी आ ही गए। अब दिल्ली में फहरा रहे हैं तिरंगा।

    14 Apr, 2016

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    एडीए कराएगा राजगढ़ भैरवधाम का विकास। सांसद और विधायक कोष से मिले 30 लाख। नवरात्रा में छठ के मेले में उमड़े श्रद्धालु।

    14 Apr, 2016

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    राजस्थान में 9 सितंबर से पेयजल सप्लाई ठप करने की फिर धमकी। ठेकेदारों की बार बार धमकी से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। आखिर बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ का भुगतान क्यों नहीं किया जाता? सप्लाई बंद होगी तो अजमेर, जयपुर, टोंक के एक करोड़ से भी ज्यादा लोग परेशान होंगे। ================ राजस्थान पीएचडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने 8 सितंबर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि 9 सितंबर से राजस्थान भर में पेयजल की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विश्नोई की ओर से कहा गया है कि सरकार ने ठेकेदारों का बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार अब जलदाय विभाग की पाइप लाइनों के संरक्षण और पेयजल की सप्लाई का काम नहीं कर सकते हैं। यह बकाया राशि पिछले 35 माह से चली आ रही है। सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार लिखित समझौता किया, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा। अब कोई भी ठेकेदार बकाया राशि के भुगतान के बगैर पेयजल सप्लाई का काम नहीं कर सकता है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी धमकी पूर्व में भी दी गई थी, लेकिन तब सरकार ने हाथों हाथ समझौता कर लिया। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। ठेकेदारों ने 9 सितंबर को पेयजल सप्लाई तब ठप करने की धमकी दी है, जब 9 सितंबर को शहरी निकाय के प्रथम चरण के चुनाव का मतदान का होना है। यदि मतदान वाले दिन प्रदेश भर में पेयजल की सप्लाई नहीं होती है, तो इससे उत्पन्न हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी माने या नहीं लेकिन ठेकेदारों की बार बार धमकी से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि बकाया भुगतान के लिए ठेकेदार पेयजल सप्लाई बंद करने की धमकी देते हैं, तो फिर सरकार के हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार ठेकेदारों को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही? जब सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए लिखित में समझौता कर रखा है तब ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। यह भी सोचनीय मुद्दा है कि पेयजल सप्लाई के लिए सरकार पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर है। सारे संसाधन सरकार के है, लेकिन नियंत्रण निजी क्षेत्र का हो गया है। कहा जा सकता है कि सरकार निजी क्षेत्र पर निर्भर है। 9 सितंबर से पेयजल की सप्लाई ठप होती है तो अजमेर, जयपुर, टोंक जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को परेशानी होगी। इन तीनों जिलों के लोग बीसलपुर बांध के पानी पर निर्भर है। बांध से प्रतिदिन 1200 टीएमसी पानी की सप्लाई तीनों जिलों में होती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    मेरे रिटायरमेंट का इंतजार हो रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की यह टिप्पणी जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से जुड़ी है? अरावली पर्वतमाला का संरक्षण भी जरूरी। ================ सब जानते हैं कि 7 सितंबर तक राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यशैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने लगातार पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के आरोपों की जांच के आदेश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिए हैं। न्यायिक क्षेत्रों में चर्चा है कि सीजेआई सूर्यकांत न्यायाधीश शर्मा को बचाने का काम कर रहे हैं। देश के न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने किसी प्रदेश के एक्टिंग सीजे पर ऐसे आरोप लगाए हैं। अभी यह मामला गर्माया हुआ ही है कि 7 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा के प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा, क्या मेरे रिटायरमेंट का इंतजार किया जा रहा है। मालूम हो कि सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे। 7 सितंबर को अरावली पर्वतमाला की परिभाषा की सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी की ओर से आग्रह किया गया कि परिभाषा तय करने के लिए 6 माह का समय और दिया जाए। कमेटी की इस मांग पर ही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, क्या कमेटी अपनी रिपोर्ट मेरे रिटायरमेंट के बाद देना चाहती है। सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि कमेटी का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा और कमेटी को तय समय के अनुसार 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 2 दिसंबर निर्धारित की गई। असल में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा का मामला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से जुड़ा हुआ है। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से खनन हो रहा है। केंद्र सरकार ने भी खनन माफियाओं को मदद करने के लिए अरावली पहाडिय़ों की ऊंचाई को सौ मीटर माना ताकि सौ मीटर से कम वाली पहाडिय़ों खनन का कार्य विधिवत हो सके। सीजेआई सूर्यकांत ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए ही हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया था। लेकिन अब यह कमेटी ही निर्धारित समय में रिपोर्ट देने में असमर्थता जता रही है। इसलिए 7 सितंबर को सूर्यकांत की रिटायरमेंट वाली टिप्पणी बहुत मायने रखती है। इस टिप्पणी को जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है, उसकी वजह से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान हो रहा है। सवाल उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पत्रों पर ही कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है, तो फिर आम व्यक्ति की शिकायत पर क्या कार्यवाही होगी। सूत्रों के अनुसार जस्टिस संदीप मेहता इस बात से बेहद खफा है कि उनके पत्रों के बाद भी सीजेआई सूर्यकांत ने राजस्थान में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों पर रोक नहीं लगाई। पिछले 10 माह से जस्टिस शर्मा को ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाए रखा गया है। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिनसे संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक फैसलों पर सवाल उठते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि 7 सितंबर को जस्टिस संजय अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल लिया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत अपना मुकाबला मौजूदा सीएम भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो करने का मामला। ================ राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को जितवाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बड़े शहरों में रोड शो कर रहे है। 5 सितंबर को सीएम शर्मा ने भीलवाड़ा और उदयपुर, 6 सितंबर को अजमेर, बीकानेर और जोधपुर में रोड शो किया। 7 सितंबर को अलवर, भरतपुर में रोड शो कर रहे है। 8 सितंबर को जयपुर में करेंगे। सीएम शर्मा के लगातार रोड शो करने पर पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एतराज जताया है। गहलोत का कहना है कि शहरी निकाय का चुनाव वार्ड स्तर का होता है, इसलिए मुख्यमंत्री पद पर आसीन नेता को प्रचार नहीं करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए शहरी निकाय चुनावों में कभी भी कांग्रेस का प्रचार नहीं किया। समझ में नहीं आता कि गहलोत अपनी तुलना भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? गहलोत को यह समझना चाहिए कि शर्मा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के लिए वार्ड को लेकर लोकसभा तक का चुनाव एक समान होता है। जो मतदाता वार्ड चुनाव में मतदान करता है, वही मतदाता विधायक और सांसद भी चुनता है। वैसे भी राजनीति में गहलोत और शर्मा का मुकाबला नहीं हो सकता। गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री तीन बार केंद्रीय मंत्री और तीन बार ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। जबकि भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बनकर मुख्यमंत्री बने हैं, शर्मा विधायक बनने से पहले सिर्फ एक बार सरपंच बने। यानी राजनीति में भजनलाल शमा्र के मुकाबले अशोक गहलोत की वरिष्ठता बहुत ज्यादा है, उसमें वार्ड का चुनाव छोटा ही नजर आएगा। भजनलाल शर्मा को गहलोत की बराबरी करने के लिए कम से कम 2 बार तो मुख्यमंत्री बनना ही पड़ेगा। चूंकि शर्मा को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को रिपीट करवाना है, इसलिए वार्ड चुनाव महत्व रखता है। आज गहलोत को भले ही लोकप्रिय होने की जरुरत न हो, लेकिन भजनलाल शर्मा को है। शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो के दौरान शर्मा वार्ड स्तर के भाजपा कार्यकर्ता से भी संवाद कर रहे है। जब वार्ड स्तर का कार्यकर्ता सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करता है तो फिर उसका उत्साह चार गुना बढ़ जाता है। अशोक गहलोत भले ही वार्ड के चुनाव को निम्न स्तर का मानते हो, लेकिन भजनलाल शमा्र के लिए वार्ड स्तर का चुनाव भी मायने रखता है। सीएम शर्मा के शहरी क्षेत्रों में रोड शो की वजह से भाजपा को फायदा हो रहा है। भाजपा के बागी उम्मीदवार अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन भी करने लगे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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    12500वां ब्लॉग पिता स्वर्गीय कृष्णगोपाल जी गुप्ता को समर्पित। दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन नहीं खरीदी। ================ पाठकों के समक्ष जब मैं आज दिनांक 7 सितंबर 2026 को अपना 12500वां ब्लॉग प्रस्तुत कर रहा हंू, तब राजस्थान भर में शहरी निकाय के चुनावों का शोर है। 10245 वार्डों में 38 हजार से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन चुनावों में सभी उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे है। यह ब्लॉग मेरे स्वर्गीय पिता कृष्णगोपाल जी गुप्ता को इसलिए समर्पित कर रहा हंू कि वे दो बार अजमेर नगर परिषद के वार्ड संख्या 33 से पार्षद चुने गए। पहली बार वर्ष 1964 और दूसरी बार 1977 में पार्षद बने। उस समय वार्ड पार्षद का चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं होता था। उम्मीदवार को निर्दलीय नामांकन दाखिल करना होता था। बाद में राजनीतिक दल अपने समर्थन की घोषणा करते थे, लेकिन पिता ने दो बार किसी राजनीतिक दल का समर्थन लिए बगैर चुनाव जीता। तब राजनीतिक दल से ज्यादा उम्मीदवार की छवि मायने रखती थी। आज भले ही वार्ड चुनाव का उम्मीदवार लाखों रुपया खर्च कर रहा हो, लेकिन तब पिताजी ने कुछ रुपयों में ही चुनाव जीता। अजमेर में गोपाल भैया के नाम से लोकप्रिय पिताजी ने दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन भी नहीं खरीदी और न ही अपने घर के मकान का जुगाड़ किया। पूरा जीवन किराये के मकान में गुजार दिया। तब भले ही ज्वाला प्रसाद शर्मा, माणकचंद सोगानी जैसे कांग्रेस के नेता नगर परिषद के अध्यक्ष रहे हों, लेकिन निर्दलीय पार्षद के तौर पर भी पिता का पूरा सम्मान होता था। नगर परिषद के कार्यालय में जाने के लिए वाहन के तौर पर साइकिल का ही उपयोग होता था। चूंकि रेल दुर्घटना में पिता का एक पैर क्षत्रिस्त हो गया था, इसलिए गोपाल भैया साइकिल के कैरियर पर बैठकर ही नगर परिषद के कार्यालय पहुंचते थे। ऐसे पिता को 12500वां ब्लॉग समर्पित कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। यह पिता का आशीर्वाद ही है कि आज मेरे ब्लॉग राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के हिन्दी भाषी राज्यों में प्रमुखता के साथ पढ़े जाते हैं। राजस्थान में तो वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से गांव ढाणी तक में ब्लॉक की पहुंच है। 25 लाख से ज्यादा पाठकों से सीधा संवाद है। जब कोई ब्लॉग वायरल होता है तो फिर करोड़ों लोगों तक पहुंचता है, इसके साथ ही मैं राजस्थान के प्रमुख न्यूज़ चैनल फर्स्ट इंडिया, सच बेधड़क, न्यूज 18, जीटीवी, एनडीटीवी आदि पर प्रतिदिन सायं पांच बजे और रात 8 बजे की लाइव डिबेट में भाग लेता हूं। यह सब पिता के आशीर्वाद से ही संभव है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

    8 Sep, 2026

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  • राजस्थान में 9 सितंबर से पेयजल सप्लाई ठप करने की फिर धमकी। ठेकेदारों की बार बार धमकी से भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। आखिर बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ का भुगतान क्यों नहीं किया जाता? सप्लाई बंद होगी तो अजमेर, जयपुर, टोंक के एक करोड़ से भी ज्यादा लोग परेशान होंगे। ================ राजस्थान पीएचडी कांट्रेक्टर एसोसिएशन की संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओम प्रकाश विश्नोई ने 8 सितंबर को प्रदेश के प्रमुख दैनिक पत्रों में पूरे पृष्ठ का विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। इस विज्ञापन में कहा गया है कि 9 सितंबर से राजस्थान भर में पेयजल की सप्लाई बंद कर दी जाएगी। विश्नोई की ओर से कहा गया है कि सरकार ने ठेकेदारों का बकाया साढ़े तीन हजार करोड़ रुपए का भुगतान नहीं किया है। ऐसी स्थिति में ठेकेदार अब जलदाय विभाग की पाइप लाइनों के संरक्षण और पेयजल की सप्लाई का काम नहीं कर सकते हैं। यह बकाया राशि पिछले 35 माह से चली आ रही है। सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए कई बार लिखित समझौता किया, लेकिन इसके बाद भी ठेकेदारों को भुगतान नहीं हो रहा। अब कोई भी ठेकेदार बकाया राशि के भुगतान के बगैर पेयजल सप्लाई का काम नहीं कर सकता है। ठेकेदारों द्वारा ऐसी धमकी पूर्व में भी दी गई थी, लेकिन तब सरकार ने हाथों हाथ समझौता कर लिया। लेकिन इस बार मामला गंभीर हो गया है। ठेकेदारों ने 9 सितंबर को पेयजल सप्लाई तब ठप करने की धमकी दी है, जब 9 सितंबर को शहरी निकाय के प्रथम चरण के चुनाव का मतदान का होना है। यदि मतदान वाले दिन प्रदेश भर में पेयजल की सप्लाई नहीं होती है, तो इससे उत्पन्न हालातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी माने या नहीं लेकिन ठेकेदारों की बार बार धमकी से भाजपा सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि बकाया भुगतान के लिए ठेकेदार पेयजल सप्लाई बंद करने की धमकी देते हैं, तो फिर सरकार के हालातों का अंदाजा लगा लेना चाहिए। सवाल यह भी है कि सरकार ठेकेदारों को बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं कर रही? जब सरकार ने बकाया राशि के भुगतान के लिए लिखित में समझौता कर रखा है तब ठेकेदारों को भुगतान किया जाना चाहिए। यह भी सोचनीय मुद्दा है कि पेयजल सप्लाई के लिए सरकार पूरी तरह निजी क्षेत्र पर निर्भर है। सारे संसाधन सरकार के है, लेकिन नियंत्रण निजी क्षेत्र का हो गया है। कहा जा सकता है कि सरकार निजी क्षेत्र पर निर्भर है। 9 सितंबर से पेयजल की सप्लाई ठप होती है तो अजमेर, जयपुर, टोंक जिले के एक करोड़ से भी ज्यादा लोगों को परेशानी होगी। इन तीनों जिलों के लोग बीसलपुर बांध के पानी पर निर्भर है। बांध से प्रतिदिन 1200 टीएमसी पानी की सप्लाई तीनों जिलों में होती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • मेरे रिटायरमेंट का इंतजार हो रहा है? क्या सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की यह टिप्पणी जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से जुड़ी है? अरावली पर्वतमाला का संरक्षण भी जरूरी। ================ सब जानते हैं कि 7 सितंबर तक राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहे संजीव प्रकाश शर्मा की कार्यशैली को लेकर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश संदीप मेहता ने लगातार पत्र लिखे हैं। इन पत्रों में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जस्टिस संदीप मेहता के पत्रों के आरोपों की जांच के आदेश प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने दिए हैं। न्यायिक क्षेत्रों में चर्चा है कि सीजेआई सूर्यकांत न्यायाधीश शर्मा को बचाने का काम कर रहे हैं। देश के न्यायिक इतिहास में यह पहला अवसर है जब सुप्रीम कोर्ट के किसी जज ने किसी प्रदेश के एक्टिंग सीजे पर ऐसे आरोप लगाए हैं। अभी यह मामला गर्माया हुआ ही है कि 7 सितंबर को प्रधान न्यायाधीश ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा के प्रकरण में सुनवाई करते हुए कहा, क्या मेरे रिटायरमेंट का इंतजार किया जा रहा है। मालूम हो कि सूर्यकांत 9 फरवरी 2027 को प्रधान न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त होंगे। 7 सितंबर को अरावली पर्वतमाला की परिभाषा की सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी की ओर से आग्रह किया गया कि परिभाषा तय करने के लिए 6 माह का समय और दिया जाए। कमेटी की इस मांग पर ही सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, क्या कमेटी अपनी रिपोर्ट मेरे रिटायरमेंट के बाद देना चाहती है। सूर्यकांत ने स्पष्ट कहा कि कमेटी का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जाएगा और कमेटी को तय समय के अनुसार 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके साथ ही मामले की सुनवाई 2 दिसंबर निर्धारित की गई। असल में अरावली पर्वतमाला की परिभाषा का मामला दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से जुड़ा हुआ है। इन राज्यों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से खनन हो रहा है। केंद्र सरकार ने भी खनन माफियाओं को मदद करने के लिए अरावली पहाडिय़ों की ऊंचाई को सौ मीटर माना ताकि सौ मीटर से कम वाली पहाडिय़ों खनन का कार्य विधिवत हो सके। सीजेआई सूर्यकांत ने अरावली पर्वतमाला की परिभाषा तय करने के लिए ही हाईपावर्ड कमेटी का गठन किया था। लेकिन अब यह कमेटी ही निर्धारित समय में रिपोर्ट देने में असमर्थता जता रही है। इसलिए 7 सितंबर को सूर्यकांत की रिटायरमेंट वाली टिप्पणी बहुत मायने रखती है। इस टिप्पणी को जस्टिस संदीप मेहता और राजस्थान के हाईकोर्ट के जज संजीव प्रकाश शर्मा के विवाद से भी जोड़ कर देखा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों जो कुछ भी चल रहा है, उसकी वजह से न्यायपालिका की गरिमा को नुकसान हो रहा है। सवाल उठता है कि जब सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के पत्रों पर ही कोई कार्यवाही नहीं हो रहा है, तो फिर आम व्यक्ति की शिकायत पर क्या कार्यवाही होगी। सूत्रों के अनुसार जस्टिस संदीप मेहता इस बात से बेहद खफा है कि उनके पत्रों के बाद भी सीजेआई सूर्यकांत ने राजस्थान में संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक कार्यों पर रोक नहीं लगाई। पिछले 10 माह से जस्टिस शर्मा को ही कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश बनाए रखा गया है। जस्टिस मेहता ने अपने पत्रों में ऐसे कई उदाहरण दिए हैं, जिनसे संजीव प्रकाश शर्मा के न्यायिक फैसलों पर सवाल उठते हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि 7 सितंबर को जस्टिस संजय अग्रवाल ने राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश का पद संभाल लिया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • तीन बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत अपना मुकाबला मौजूदा सीएम भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो करने का मामला। ================ राजस्थान में 9 और 11 सितंबर को 309 शहरी निकायों के 10245 वार्डों के चुनाव होने हैं। इन चुनावों में भाजपा उम्मीदवारों को जितवाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बड़े शहरों में रोड शो कर रहे है। 5 सितंबर को सीएम शर्मा ने भीलवाड़ा और उदयपुर, 6 सितंबर को अजमेर, बीकानेर और जोधपुर में रोड शो किया। 7 सितंबर को अलवर, भरतपुर में रोड शो कर रहे है। 8 सितंबर को जयपुर में करेंगे। सीएम शर्मा के लगातार रोड शो करने पर पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने एतराज जताया है। गहलोत का कहना है कि शहरी निकाय का चुनाव वार्ड स्तर का होता है, इसलिए मुख्यमंत्री पद पर आसीन नेता को प्रचार नहीं करना चाहिए। गहलोत ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए शहरी निकाय चुनावों में कभी भी कांग्रेस का प्रचार नहीं किया। समझ में नहीं आता कि गहलोत अपनी तुलना भजनलाल शर्मा से क्यों कर रहे हैं? गहलोत को यह समझना चाहिए कि शर्मा भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री हैं और भाजपा के लिए वार्ड को लेकर लोकसभा तक का चुनाव एक समान होता है। जो मतदाता वार्ड चुनाव में मतदान करता है, वही मतदाता विधायक और सांसद भी चुनता है। वैसे भी राजनीति में गहलोत और शर्मा का मुकाबला नहीं हो सकता। गहलोत तीन बार मुख्यमंत्री तीन बार केंद्रीय मंत्री और तीन बार ही प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। जबकि भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बनकर मुख्यमंत्री बने हैं, शर्मा विधायक बनने से पहले सिर्फ एक बार सरपंच बने। यानी राजनीति में भजनलाल शमा्र के मुकाबले अशोक गहलोत की वरिष्ठता बहुत ज्यादा है, उसमें वार्ड का चुनाव छोटा ही नजर आएगा। भजनलाल शर्मा को गहलोत की बराबरी करने के लिए कम से कम 2 बार तो मुख्यमंत्री बनना ही पड़ेगा। चूंकि शर्मा को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनाव में अपनी सरकार को रिपीट करवाना है, इसलिए वार्ड चुनाव महत्व रखता है। आज गहलोत को भले ही लोकप्रिय होने की जरुरत न हो, लेकिन भजनलाल शर्मा को है। शहरी निकाय के चुनाव में रोड शो के दौरान शर्मा वार्ड स्तर के भाजपा कार्यकर्ता से भी संवाद कर रहे है। जब वार्ड स्तर का कार्यकर्ता सीधे मुख्यमंत्री से संवाद करता है तो फिर उसका उत्साह चार गुना बढ़ जाता है। अशोक गहलोत भले ही वार्ड के चुनाव को निम्न स्तर का मानते हो, लेकिन भजनलाल शमा्र के लिए वार्ड स्तर का चुनाव भी मायने रखता है। सीएम शर्मा के शहरी क्षेत्रों में रोड शो की वजह से भाजपा को फायदा हो रहा है। भाजपा के बागी उम्मीदवार अधिकृत उम्मीदवार का समर्थन भी करने लगे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • 12500वां ब्लॉग पिता स्वर्गीय कृष्णगोपाल जी गुप्ता को समर्पित। दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन नहीं खरीदी। ================ पाठकों के समक्ष जब मैं आज दिनांक 7 सितंबर 2026 को अपना 12500वां ब्लॉग प्रस्तुत कर रहा हंू, तब राजस्थान भर में शहरी निकाय के चुनावों का शोर है। 10245 वार्डों में 38 हजार से ज्यादा उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। इन चुनावों में सभी उम्मीदवार पानी की तरह पैसा बहा रहे है। यह ब्लॉग मेरे स्वर्गीय पिता कृष्णगोपाल जी गुप्ता को इसलिए समर्पित कर रहा हंू कि वे दो बार अजमेर नगर परिषद के वार्ड संख्या 33 से पार्षद चुने गए। पहली बार वर्ष 1964 और दूसरी बार 1977 में पार्षद बने। उस समय वार्ड पार्षद का चुनाव पार्टी के सिंबल पर नहीं होता था। उम्मीदवार को निर्दलीय नामांकन दाखिल करना होता था। बाद में राजनीतिक दल अपने समर्थन की घोषणा करते थे, लेकिन पिता ने दो बार किसी राजनीतिक दल का समर्थन लिए बगैर चुनाव जीता। तब राजनीतिक दल से ज्यादा उम्मीदवार की छवि मायने रखती थी। आज भले ही वार्ड चुनाव का उम्मीदवार लाखों रुपया खर्च कर रहा हो, लेकिन तब पिताजी ने कुछ रुपयों में ही चुनाव जीता। अजमेर में गोपाल भैया के नाम से लोकप्रिय पिताजी ने दो बार पार्षद रहने के बाद भी एक इंच जमीन भी नहीं खरीदी और न ही अपने घर के मकान का जुगाड़ किया। पूरा जीवन किराये के मकान में गुजार दिया। तब भले ही ज्वाला प्रसाद शर्मा, माणकचंद सोगानी जैसे कांग्रेस के नेता नगर परिषद के अध्यक्ष रहे हों, लेकिन निर्दलीय पार्षद के तौर पर भी पिता का पूरा सम्मान होता था। नगर परिषद के कार्यालय में जाने के लिए वाहन के तौर पर साइकिल का ही उपयोग होता था। चूंकि रेल दुर्घटना में पिता का एक पैर क्षत्रिस्त हो गया था, इसलिए गोपाल भैया साइकिल के कैरियर पर बैठकर ही नगर परिषद के कार्यालय पहुंचते थे। ऐसे पिता को 12500वां ब्लॉग समर्पित कर मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। यह पिता का आशीर्वाद ही है कि आज मेरे ब्लॉग राजस्थान ही नहीं बल्कि देश के हिन्दी भाषी राज्यों में प्रमुखता के साथ पढ़े जाते हैं। राजस्थान में तो वाट्सएप ग्रुप के माध्यम से गांव ढाणी तक में ब्लॉक की पहुंच है। 25 लाख से ज्यादा पाठकों से सीधा संवाद है। जब कोई ब्लॉग वायरल होता है तो फिर करोड़ों लोगों तक पहुंचता है, इसके साथ ही मैं राजस्थान के प्रमुख न्यूज़ चैनल फर्स्ट इंडिया, सच बेधड़क, न्यूज 18, जीटीवी, एनडीटीवी आदि पर प्रतिदिन सायं पांच बजे और रात 8 बजे की लाइव डिबेट में भाग लेता हूं। यह सब पिता के आशीर्वाद से ही संभव है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
  • अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी, लेकिन उनमें भाजपाई संस्कार तो है ही-मदन राठौड़, प्रदेशाध्यक्ष। कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं, इसलिए स्नेहलता अग्रवाल बागी उम्मीदवार। भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद लिया। ================ राजस्थान भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अजमेर के पूर्व मेयर धर्मेन्द्र गहलोत ने भले ही भाजपा छोड़ दी हो, लेकिन उनमें भाजपा के संस्कार बने हुए है। मालूम हो कि गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत अजमेर नगर निगम के वार्ड संख्या 4 से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर खड़ी हे। अपनी पत्नी को चुनाव जितवाने के लिए गहलोत ने पूरी ताकत लगा रखी है। प्रदेश अध्यक्ष राठौड़ ने कहा कि मैं चाहता हूं कि गहलोत अपनी पत्नी की उम्मीदवार वापस ले और भाजपा की अधिकृत उम्मीदवार मोनिका को समर्थन दे। गहलोत की नाराजगी भाजपा किसी नेता से हो सकती है, लेकिन व्यक्तिगत नाराजगी के कारण पार्टी को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए। भाजपा ने ही गहलोत को दो बार अजमेर का मेयर बनाया है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के प्रति तो नाराजगी दूर हो सकती है, लेकिन पार्टी के प्रति नाराजगी दिखाने के बाद कोई गुंजाइश नहीं रहती। मालूम हो कि गहलोत ने सार्वजनिक तौर पर अजमेर उत्तर के भाजपा विधायक वासुदेव देवनानी के प्रति अपनी नाराजगी जताई है। गहलोत का यहां तक आरोप है कि उनके आर्किटेक्ट पुत्र ने जिन भवनों का निर्माण करवाया उन्हें भी नियम विरुद्ध मानते हुए देवनानी के दबाव में सीज करवा दिया गया। महिलाओं का सम्मान नहीं: अजमेर नगर निगम के वार्ड 70 से निर्दलीय उम्मीदवार स्नेहलता अग्रवाल ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस में महिला कार्यकर्ताओं का सम्मान नहीं है। वे पिछले 25 साल से कांग्रेस में सक्रिय हैं। मौजूदा समय में ब्लॉक, महासचिव, सेवादल की सह-उपाध्यक्ष आदि पदों पर आसीन हंू। इसके अलावा वर्ष 2007 से राष्ट्रीय पंचायत परिषद की सदस्य भी हैं। कांग्रेस में अपनी सक्रियता को देखते हुए ही उन्होंने वार्ड 70 से टिकट मांगा था। लेकिन शहर जिलाध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल और वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता ने उनकी अनदेखी की। वार्ड 70 सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित रहा,लेकिन डॉ. जयपाल और रलावता ने आपसी मिलीभगत कर ओबीसी वर्ग की गीता गुर्जर को कांग्रेस का उम्मीदवार बनवा दिया। चूंकि मेरे साथ अन्याय हुआ,इसलिए मैं अब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ रही हंू। मुझे अपने वार्ड में व्यापक समर्थन भी मिल रहा है। चुनाव अधिकारी ने अलमारी का चुनाव चिन्ह आवंटित किया है। कांग्रेस से हुई उपेक्षा के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9214865836 पर स्नेहलता अग्रवाल से ली जा सकती है। मसाणिया भैरव धाम का आशीर्वाद: नगर निगम के वार्ड 38 के भाजपा उम्मीदवार गिरीश बाशानी ने 6 सितंबर को राजगढ़ स्थित मसाणिया भैरव धाम के उपासक चंपालाल महाराज का आशीर्वाद लिया। इस अवसर पर बाशानी ने धाम पर स्थित मनोकामना स्तंभ की परिक्रमा भी की और धाम में स्थित मसाणिया भैरव मंदिर के दर्शन भी किए। S.P.MITTAL BLOGGER ( 07-09-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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