गुर्जर आंदोलन में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की नीयत पर सरकार के पेरोकार विश्वेन्द्र सिंह ने शक जताया।

गुर्जर आंदोलन में कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला की नीयत पर सरकार के पेरोकार विश्वेन्द्र सिंह ने शक जताया। आखिर कर्नल का फोन बेटा विजय बैंसला क्यों अटेंड करता है?
मैं कर रहा हंू कोर्ट की अवमानना, सजा दें- कर्नल बैंसला।
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12 फरवरी को राजस्थान में गुर्जर आंदोलन का पांचवां दिन रहा। पांच प्रतिशत आरक्षण की मांग को लेकर पिछले पांच दिनों से सवाई माधोपुर के मलारना डूंगर स्टेशन के निकट रेल ट्रेक जाम है तथा प्रदेशभर में हाईवे जाम होने से अराजकता का माहौल है। आंदोलन के मुखिया कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा है कि जब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने आरक्षण देने का वायदा किया था तो अब सरकार बन जाने के बाद गुर्जरों को पांच प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा है। सरकार भले ही मौजूदा कोटे से आरक्षण दे या फिर अलग से दिलवावे, यह अब कांगे्रस सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं प्रदेश के पर्यटन मंत्री और दिग्गज जाट नेता विश्वेन्द्र सिंह ने कर्नल बैंसला की नीयत पर शक जताया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वार्ता के लिए जो मंत्रियों की कमेटी बनाई है उसके प्रमुख भी विश्वेन्द्र सिंह ही हैं। 12 फरवरी को विश्वेन्द्र सिंह ने रणथम्भौर के वन पर्यटन क्षेत्र में मीडिया से संवाद करते हुए कहा कि भाजपा के शासन में भी जब गुर्जर आंदोलन हुए तो कर्नल बैंसला ने सवाई माधोपुर और जयपुर में वार्ता की। गुर्जरों का प्रतिनिधि मंडल भी वार्ता के लिए भेजा, लेकिन इस बार कर्नल बैंसला की जिद है कि वार्ता रेल ट्रेक पर ही हो। विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि जिस रेलवे ट्रेक पर हजारों आंदोलनकारी बैठे हों, वहां वार्ता कैसे संभव है। मैं कर्नल बैंसला का बहुत आदर करता हंू इसलिए मैं कर्नल के जवाब का इंतजार कर रहा हंू, लेकिन कर्नल से सम्पर्क नहीं साधा है। मैं जब भी फोन करता हंू तो कर्नल का मोबाइल उनका बेटा विजय बैंसला अटेंड करता है। मेरे यह समझ में नहीं आता कि पिता का फोन बेटा क्यों उठाता है? विश्वेन्द्र सिंह ने कहा कि कर्नल को अपने विवेक से निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कर्नल को सरकार से बात नहीं करनी है तो बता दें। किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है। कर्नल बैंसला को यह भी समझना चाहिए कि गुर्जरों को आरक्षण देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और मई में सुनवाई होनी है। राज्य सरकार कोई निर्णय लेगी तो अब सुप्रीम कोर्ट की अवमानना भी हो सकती है। कर्नल बैंसला को ऐसा रास्ता निकलना चाहिए जिसमें संविधान के दायरे में गुर्जरों को आरक्षण मिल जाए। गुर्जर आंदोलन की वजह से रेल और सड़क मार्ग के लाखों लोगों को परेशानी तो हो रही है साथ ही पर्यटन उद्योग पर भारी असर पड़ा है। आंदोलन को देखते हुए देशी विदेशी पर्यटको ने राजस्थान के पर्यटन स्थलों की बुकिंग रद्द करवा दी है।
सजा भुगतने को तैयारः
सरकार के पेरोकार विश्वेन्द्र सिंह के आरोपों का जवाब देते हए कर्नल बैंसला ने कहा कि विश्वेन्द्र सिंह ने कहा था कि सरकार का मसोदा सामने रखा जाएगा। लेकिन आज तक भी सरकार का प्रस्ताव सामने नहीं आया है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले ट्रेक पर मसोदा मुझे दिखाए फिर वार्ता पर विचार किया जाएगा। सरकार से वार्ता तो कई बार हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मैं कोर्ट की आवमानना कर रहा हंू इसलिए सजा भुगताने को भी तैयार हंू। उन्होंने कहा कि सरकार को राजस्थान के गुर्जरों की पीड़ा को समझना चाहिए। यदि सरकार गुर्जरों की पीड़ा को नहीं समझेगी तो फिर हालात और बिगड़ेंगे।
एस.पी.मित्तल) (12-02-19)
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