क्या मोनिका के फोन की कॉल डिटेल से केकड़ी में मचेगा हंगामा।

14 अप्रैल को अजमेर के गेगल पुलिस स्टेशन पर केकड़ी के निकटवर्ती गांव बघेरा निवासी कार्तिक सांखला ने एक रिपोर्ट दर्ज करवाई है। इस रिपोर्ट में बताया गया कि उसके 23 वर्षीय भाई शुभम सांखला ने गत रात्रि को ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली। इस आत्महत्या के लिए गांव के ही रामरतन खारोल को दोषी ठहराया गया है। रिपोर्ट में कहा गया कि रामरतन की 20 वर्षीय पुत्री मोनिका ने 11 अप्रैल को गांव के घर में ही आत्महत्या की थी। मोनिका ने कथित आत्महत्या से पहले किसी को भी जिम्मेदार नहीं ठहराया। लेकिन इसके बाद भी उसके पिता रामरतन ने मेरे भाई शुभम सांखला के विरुद्ध पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई। इस रिपोर्ट से मेरा भाई अवसाद में आ गया और उसने आत्महत्या कर ली। कार्तिक ने पुलिस से आग्रह किया कि मोनिका खारोल के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकाल कर जांच की जाए। यह पता लगाया जाए कि मोनिका केकड़ी के किन किन प्रभावशाली लोगों के सम्पर्क में थी। इससे यह भी पता चलेगा कि मरने से पहले मोनिका ने किन-किन व्यक्तियों से मोबाइल फोन पर बात की थी। रिपोर्ट में पुलिस को यह भी बताया गया कि गत वर्ष मोनिका ने उसके भाई शुभम के विरुद्ध बलात्कार का मुकदमा दर्ज करवाया था, लेकिन बाद में मोनिका ने शुभम के पक्ष में बयान देकर आरोप वापस ले लिया। रिपोर्ट में इस मामले की भी जांच की मांग की गई है। माना जा रहा है कि यदि मोनिका के मोबाइल की कॉल डिटेल सामने आती है तो केकडी में इन दोनों आत्महत्याओं के मामले में हंगामा मचेगा।

ख्वाजा साहब के उर्स के लिए न मेला मजिस्ट्रेट मिला और न स्मारिका।

ख्वाजा साहब के भरोसे रहे जायरीन।
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14 अप्रैल को सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती का 6 दिवसीय सालाना उर्स धार्मिक दृष्टि से सम्पन्न हो गया। 13 अप्रैल की रात 12 बजे बाद से ही दरगाह में गुसल की रस्म शुरू हो गई थी। सुबह होते होते जायरीन ने अजमेर से लौटना भी शुरू कर दिया। इसी के साथ छठी की रस्म भी पूरी हो गई। हालांकि 15 अप्रैल को जुम्मे की नमाज का महत्त्व बना हुआ है। इसके बाद बड़े कुल की रस्म भी होगी। दरगाह से जुड़े खादिम समुदाय इस बात से संतुट है कि 6 दिवसीय उर्स में कोई अप्रिय वारदात नहीं हुई। इसके लिए ख्वाजा साहब का शुक्रिया अदा किया जा रहा है। जहां तक राज्य सरकार और जिला प्रशासन की जिम्मेदारियों का सवाल है तो शुरू से ही गैर जिम्मेदाराना रवैया सामने आया है। सरकार ने अजमेर के सिटी मजिस्ट्रेट के पद पर स्थाई नियुक्ति नहीं की, इसलिए ख्वाजा साहब के उर्स में मेला मजिस्ट्रेट नियुक्त नहीं हो पाया। इसे घोर लापरवाही और गैर जिम्मेदाराना रवैया ही कहा जाएगा कि इस बार मेला मजिस्टे्रट के बिना ही ख्वाजा साहब का उर्स सम्पन्न हो गया। हालांकि जिला कलेक्टर डॉ. आरुषि मलिक ने अपने स्तर पर आरएएस सेवा के जूनियर अधिकारी राधेश्याम मीणा को अतिरिक्त मेला मजिस्ट्रेट नियुक्त कर दिया था। कलेक्टर के इस फरमान की भी जिला प्रशासन में चर्चा है।
अब चूंकि उर्स शांतिपूर्ण सम्पन्न हो गया, इसलिए जूनियर और सीनियर सभी अधिकारी अपनी पीठ थपथपाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। प्रतिवर्ष उर्स के मौके पर जिला प्रशासन की ओर से एक स्मारिका प्रकाशित की जाती है। इस स्मारिका में उर्स के इंतजामों में लगे सभी विभागों के अधिकारियों के नाम और मोबाइल नम्बर अंकित होते हैं। साथ ही उर्स की धार्मिक रस्मों की जानकारियां एवं जायरीन के लिए आवश्यक सूचनाएं भी होती हैं। यहां तक कि विभिन्न मस्जिदों में पढ़ी जाने वाली नवाज की जानकारी भी होती है। पूरे उर्स में यह स्मारिका महत्त्वपूर्ण होती है। विभागों के अस्थाई कैम्प में यह स्मारिका बहुत काम आती है। लेकिन इस बार जिला प्रशासन की ओर से स्मारिका का प्रकाश नहीं हुआ। इससे प्रतीत होता है कि जिला प्रशासन उर्स के इंतजामों को लेकर कितना गंभीर रहा। प्रतिवर्ष उर्स के दौरान दरगाह के अंदर बुलंद दरवाजे के चबूतरे पर जिला प्रशासन का अस्थाई कैम्प लगता है, लेकिन इस बार बुलंद दरवाजे के कैम्प को लेकर भी प्रशासन ने कोई गंभीरता नहीं दिखाई। अधिकारियों के अभाव में यह कैम्प सूना ही पड़ा रहा। प्रशासन की बेरुखी के चलते कायड़ स्थित विश्राम स्थली पर भी जायरीन को अनेक परेशानी का सामना करना पड़ा। यहां तक कि उर्स मेले की पहचान कलंदरों ने पीने के पानी को लेकर प्रदर्शन तक किया। जायरीन सुविधाओं को लेकर शिकायत करते ही रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं। सवाल मेला मजिस्ट्रेट का ही नहीं है, बल्कि प्रशासन के अन्य बड़े अधिकारियों का भी है। चूंकि जिला कलेक्टर की ओर से सीनियर अधिकारियों को कोई जिम्मेमदारी नहीं दी गई, इसलिए सीनियर अधिकारी भी बचते नजर आए। इन अधिकारियों ने उस दायरे में ही काम किया जिसका दायित्व दिया गया था। 6 दिवसीय उर्स में प्रशासन में सामूहिक जिम्मेदारी का अभाव पूरी तरह देखा गया।
बिजली से परेशानी:
उर्स के दौरान दिन में कई बार बिजली गुल होने से जायरीन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बिजली निगम हर वर्ष उर्स से पहले मेंटीनेंस का कार्य करता है,तब दिन भर मेला क्षेत्र की लाईटों को बंद रखा जाता है, लेकिन उर्स के दौरान बार-बार बिजली गुल होने से प्रतीत होता है कि बिजली इंजीनियरों ने भी लापरवाही बरती है।

तो क्या पाकिस्तान अपने कश्मीर को भारत को दे देगा? दोनों कश्मीर में हो रहे है फंसाद

1947 में जब भारत विभाजित हुआ तो धरती के स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर के भी दो टुकड़े हो गए। एक भारत का कश्मीर और दूसरा पाकिस्तान का कश्मीर। भारत तो अपने कश्मीर को अभिन्न अंग मानता है, जबकि पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर को स्वतंत्र बताता है। यह बात अलग है कि इस स्वतंत्र कश्मीर पर पाकिस्तान का पूरी तरह नियंत्रण है और अब तो इस कश्मीर पर पाकिस्तान ने चीन को लाकर बैठा दिया है। पाकिस्तान जो गतिविधियों कर रहा है उससे स्वतंत्र कश्मीर के नागरिक बेहद गुस्से में हैं।
13 अप्रैल को भी स्वतंत्र कश्मीर के सैकड़ों नागरिकों ने प्रदर्शन किया। ये लोग पाकिस्तान की पुलिस पर ज्यादती के आरोप लगा रहे हैं। स्वतंत्र कश्मीर में रहने वाले मुसलामनों का कहना है कि भारत में जिस तरह आम मुसलमान खुश हंै, उसी तरह हम लोग भी रहना चाहते हैं। स्वतंत्र कश्मीर के मुसलमान जिस तरह से भारत की प्रशंसा कर रहे हैं,उससे यह सवाल उठता है कि क्या पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर को भारत को दे देगा? यह सवाल इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि हमारे कश्मीर में अलगाववादी भारत के खिलाफ है। यहां पर खुलेआम पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जाते हैं। हमारे कश्मीर में रहने वाले मुसलमानों को पाकिस्तान के कब्जे वाले मुसलमानों की परेशानियों को समझना चाहिए। केन्द्र सरकार जिस प्रकार कश्मीर में रियायती दरों पर खाद्य सामग्री उपलब्ध करवाती है,वैसी एक भी सुविधा पाकिस्तान के कश्मीर के लोगों को नहीं मिलती। कश्मीर के अलगाववादियों को पाकिस्तान के बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में पाकिस्तान की सेना के जुल्मों को भी देखना चाहिए। जिस तरह इन दोनों प्रांतों में मुसलमानों का कत्ले आम किया जाता है, वह मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। अच्छा हो कि कश्मीर के अलगाववादी नेता एक बार पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर, बलूचिस्तान व सिंध प्रांत का दौरा कर मुसलमनों की स्थिति का जायजा ले लें। अलगाववादियों को यह पता चल जाएगा कि पाकिस्तान के मुकाबले में मुसलमान कश्मीर और भारत के दूसरे हिस्सों में कितने सम्मान के साथ रह रहा है। सरकारी नौकरियों से लेकर राजनीतिक क्षेत्रों में बड़े पदों पर मुस्लिम जनप्रतिनिधि बैठे हैं। देश के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी हैं, वहीं पाकिस्तान में हिन्दुओं का रहना दुष्कर है। पाकिस्तान में जब मुलसमानों को ही कत्लेआम किया जा रहा है, तो फिर हिन्दुओं के रहने का तो सवाल ही नहीं उठता। इसे भारत की धर्मनिरपेक्षता ही कहा जाएगा कि यहां मुसलमान बराबर के अधिकार के साथ रहते हैं,बल्कि अपने धर्म के अनुरूप आचरण भी करते हैं।

शिरडी के सांई बाबा को भगवान मानने पर ही महाराष्ट्र में सूखे के हालात।

शंकराचार्य स्वरूपानंद महाराज का बयान कितना उचित।
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द्वारका पीठ और बद्रिका आश्रम के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने 11 अप्रैल को हरिद्वार में कहा है कि महाराष्ट्र में सूखे का कारण शिरडी के सांई बाबा मंदिर का होना है। महाराष्ट्र में हजारों लोग शिरडी के सांई बाबा को भगवान मानते हैं। इस मंदिर के प्रबंधकों ने हमारे देवता शिवजी, हनुमानजी आदि को सांई बाबा के साथ विराजमान कर रखा है। यह सब हमारी सनातन संस्कृति और धार्मिक मान्यता के खिलाफ है। शिरडी के सांई बाबा को किसी भी स्थिति में भगवान नहीं माना जा सकता है। महाराष्ट्र के लोगों को यह समझना चाहिए कि आखिर हर बार महाराष्ट्र में ही अकाल क्यों पड़ता है। मेरा मानना है कि महाराष्ट्र के लोग धर्म के विरुद्ध काम कर रहे हैं, इसलिए ऐसा हो रहा है।
स्वामी स्वरूपानंद शिरडी के सांई बाबा को लेकर पहले भी ऐसे बयान दे चुके हैं। इसको लेकर देशभर में विवाद भी हुआ है। सवाल उठता है कि महाराष्ट्र की वर्तमान परिस्थितियों में स्वामी स्वरूपानंद महाराज का बयान कितना उचित है? स्वामी स्वरूपानंद इस समय देश की चार में से दो शंकराचार्य की पीठ के प्रमुख है। ऐसे में देश में उनके करोड़ों अनुयायी है। लेकिन वहीं शिरडी के सांई बाबा के मंदिर के प्रति भी हजारों लोगों की आस्था है। सांई भक्त सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं है, बल्कि देशभर में फैले हुए हैं। हो सकता है कि देश के अन्य प्रांतों के मुकाबले महाराष्ट्र में सांई भक्तों की संख्या ज्यादा हो, सांई बाबा को एक चमत्कारी पुरुष माना गया है, जबकि हिन्दू देवी देवताओं को भगवान का दर्जा मिला हुआ है। हालांकि किसे भगवान माना जाए या न माना जाए, यह आस्था पर निर्भर करता है। ऐसे बहुत से लोग मिल जाएंगे जो मूर्ति पूजा के खिलाफ हैं। इसके लिए देश में बाकायदा अभियान भी चलाया गया है, लेकिन फिर भी आज तक देश के किसी भी मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कम नहीं हुई है। अनेक मंदिरों में तो मोटा शुल्क लेकर वीआईपी दर्शन की व्यवस्था है।
मेरा मानना है कि आज किसी को भगवान मानने और न मानने से पहले महाराष्ट्र में अकाल पीडि़तों की मदद करना जरूरी है। अच्छा हो कि शिरडी के सांई बाबा के मंदिर और शंकराचार्य स्वरूपानंद से जुड़े मंदिरों में जो चढ़ावा आता है, उससे महाराष्ट्र सहित देशभर में अकाल पीडि़तों की मदद की जाए ताकि किसान आत्महत्या करने से बचे सके। यदि आस्थावान लोग रहेंगे, तभी किसी धर्म का महत्त्व भी होगा।
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माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर की सभा में हंगामा।

पिछली कार्यकारिणी के पदाधिकारियों पर धन के दुरुपयोग का आरोप।
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10 अप्रैल को पुष्कर में अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन की साधारण सभा हुई। इस सभा में पिछली कार्यकारिणी के पदाधिकारियों पर धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए। वर्तमान अध्यक्ष श्यामसुंदर बिड़ला ने स्वीकार किया कि पूर्व अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा (वर्तमान में महासभा के महामंत्री) कोषाध्यक्ष कमल किशोर चांडक तथा महामंत्री सुनील कुमार भूतड़ा ने अभी तक भी साढ़े सत्तावन लाख रुपए के बारे में अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की है। यह बात सही है कि इस राशि को लम्बे समय तक इन पदाधिकारियों ने अपने पास रखा। उन्होंने माना कि यह राशि समाज के लोगों से विकास कार्य के लिए एकत्रित की गई। सभा में रामस्वरूप जैथलिया ने कहा कि उन्होंने लिखित में दिया है कि पिछली कार्यकारिणी के चार वर्ष के हिसाब-किताब को उपलब्ध करवाया जाए। लेकिन आज तक भी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि पिछली कार्यकारिणी के पदाधिकारियों ने 55 लाख रुपए स्वागत सत्कार में खर्च कर दिए। इतना ही नहीं चारभुजा जी में पहाड़ीनुमा जमीन बेवजह खरीद ली गई। बैठक में उस समय मारपीट का माहौल हो गया, जब कार्यकारिणी के सदस्य मधुसूदन मालू ने वर्तमान अध्यक्ष पर आरोप लगाए। बाद में बड़ी मुश्किल से मालू के माफी मांगने के बाद मामला शांत हुआ। बैठक में कहा गया कि अध्यक्ष श्यामसुंदर बिड़ला सेवा सदन के कार्य के एवज में एक रुपया भी सदन के कोष से नहीं लेते हैं। निर्माण कार्य भी रियायती दरों पर करवाए जा रहे हैं। बैठक में रामपाल सोनी, दामोदर बंग, राधागोविन्द सोनी आदि पदाधिकारियों ने विचार व्यक्त किए।
(एस.पी. मित्तल)  (11-04-2016)
(spmittal.blogspot.in) M-09829071511

एडीए कराएगा राजगढ़ भैरवधाम का विकास। सांसद और विधायक कोष से मिले 30 लाख। नवरात्रा में छठ के मेले में उमड़े श्रद्धालु।

अजमेर के निकटवर्ती राजगढ़ गांव स्थित मसाणिया भैरवधाम का विकास अब अजमेर विकास प्राधिकरण कराएगा। 12 अप्रैल को नवरात्र महोत्सव में भैरवधाम पर छठ के मेले का आयोजन हुआ। इस मेले में देशभर से हजारों श्रद्धालुओं ने भैरवधाम के उपासक चम्पालाल महाराज से चमत्कारिक चिमटी (भभूती) प्राप्त की और मनोकामना स्तंभ की परिक्रमा की। मान्यता है कि भैरवधाम की भभूती लगाने से शरीर के सारे कष्ट और रोग दूर हो जाते हैं। साथ ही मनोकामना स्तम्भ की परिक्रमा लगाने से सभी कामनाएं पूरी होती हैं। छठ के मेले पर भैरवधाम परिसर में ही एक समारोह आयोजित हुआ। समारोह में यह बात सामने आई कि भैरवधाम पर प्रत्येक रविवार को राजस्थान सहित गुजरात, मध्यप्रदेश महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा आदि राज्यों के श्रद्धालु आते हैं। उपासक चम्पालाल महाराज के दर्शन, चिमटी लेने और मनोकामना स्तम्भ की परिक्रमा करने के लिए शनिवार रात को ही हजारों श्रद्धालु राजगढ़ में डेरा डाल लेते हैं। समारोह में उपस्थित केन्द्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री और अजमेर के सांसद सांवरलाल जाट ने घोषणा की कि श्रद्धालुओं के विश्रामगृह के लिए 20 लाख रुपए की राशि सांसद कोष से दी जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भावनाओं के अनपुरूप ही भैरवधाम पर बेटी बचाने का संकल्प करवाया जा रहा है। समारोह में उपस्थित नसीराबाद के विधायक रामनारायण गुर्जर ने कहा यहां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वे अपने विधायक कोष से 10 लाख रुपए की राशि देंगे। उन्होंने माना कि भैरवधाम से सामाजिक बुराइयों को मिटाने के लिए सकारात्मक संदेश जा रहा है। समारोह में उपस्थित अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष शिव शंकर हेड़ा ने कहा कि भैरवधाम का विकास करने में प्राधिकरण कोई कमी नहीं रखेगा। सांसद और विधायक कोष की राशि विश्रामगृह के लिए कम पड़ती है तो शेष राशि प्राधिकरण के द्वारा खर्च की जाएगी। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने की जिम्ममेदारी हमारी है। उपासक चम्पालाल महाराज ने शराब न पीने और बेटी बचाने का जो अभियान चलाया है, उसकी प्रशंसा देशभर में हो रही है। समारोह में सरकार के मुख्य सचेतक कालूलाल गुर्जर ने कहा कि भैरवधाम के विकास में राज्य सरकार हर संभव मदद करेगी। समारोह में पूर्व विधायक श्रीगोपाल बाहेती ने कहा कि शराब छोडऩे और बेटी बचाने का जो अभियान भैरवधाम से शुरू हुआ है, उसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार बिहार में पूर्ण शराबबंदी की गई है, उसी प्रकार राजस्थान में भी होनी चाहिए। डॉ. बाहेती ने शराब की लत और कन्या भू्रण हत्या पर कविताएं भी सुनाई। समारोह में मेरा कहना रहा कि जो काम सरकार का है उसे भैरवधाम से किया जा रहा है। जिस प्रकार सरकार अस्पतालों में जरुरतमंद लोगों का मुफ्त इलाज करवाती है, उसी प्रकार भैरव धाम पर बिना कोई चढ़ावा लिए ईश्वरीय चमत्कार से व्यक्ति को रोग मुक्त किया जाता है। मनोकामना स्तम्भ की परिक्रमा कर लेने से मन में संतोष की प्राप्ति होती है। उपासक चम्पालाल महाराज ने अब तक कोई 25 लाख श्रद्धालुओं को शराब छोडऩे और बेटी बचाने का संकल्प करवाया है। सरकार इन्हीं कार्य पर करोड़ों रुपए खर्च करती है, जबकि भैरव धाम पर यह कार्य नि:शुल्क हो रहे हैं। समारोह में नगर निगम के मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, डिप्टी मेयर सम्पत सांखला, स्वामी न्यूज चैनल के एमडी कंवल प्रकाश किशनानी आदि ने भी विचार प्रकट किए। इस अवसर पर उपासक चम्पालाल महाराज ने कहा कि भैरवधाम पर जो श्रद्धालु आते हैं, उन्हें इस बात की परवाह नहीं कि यहां कोई सुविधा है या नहीं। यहां आने वाले श्रद्धालु कालो के काल मसाणिया भैरव के भरोसे रहते हैं। मसाणिया भैरव की कृपा से ही कैंसर जैसे रोग दूर होते हैं।
उमड़े श्रद्धालु:
12 अप्रैल को छठ के मेले में भाग लेने के लिए भैरवधाम पर हजारों श्रद्धालु उमड़े। मेले की शुरुआत भैरवधाम पर झंडा रोहण के साथ की गई। सभी श्रद्धालुओं को भैरवधाम की ओर से भोजन करवाया गया। समारोह को सफल बनाने में अविनाश सेन, प्रकाश रांका, आशीष चौधरी, ओम प्रकाश सेन आदि की सक्रिय भूमिका रही।
नोट- फोटोज मेरे ब्लॉग spmittal.blogspot.in तथा फेसबुक अकाउंट पर देखें।
(एस.पी. मित्तल)  (12-04-2016)
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सूफीवाद को आगे बढ़ाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इतिहास को दोहरा रहे हैं। ख्वाजा साहब के उर्स के मौके पर दीवाना आबेदीन ने मुस्लिम धर्मगुरुओं और विद्वानों के समारोह में कहा।

सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान सज्जादानशीन जैनुअल आबेदीन ने कहा है कि जिस प्रकार मुगल, मराठा और अंग्रेज शासकों ने समाज में सूफी धर्मगुरुओं का मान-सम्मान किया, उसी प्रकार अब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सूफीवाद को आगे बढ़ा रहे हैं। मोदी ऐसा इसलिए कर रहे हैं कि क्योंकि सूफी समुदाय ही बिना धार्मिक भेदभाव के सबको साथ लेकर चल सकता है।
13 अप्रैल को अजमेर में खान का शरीफ में मुस्लिम विद्वानों और धर्मगुरुओं की एक सभा को संबोधित करते हुए दीवान आबेदीन ने कहा कि पिछले दिनों दिल्ली में जो अन्र्तराष्ट्रीय सूफी कांफ्रेंस हुई, उसका पूरी दुनिया में सकारात्मक संदेश गया है।
इस पारंपरिक आयोजन में देश के प्रमुख चिश्तिया दरगाहों के सज्जादानशीन व धर्म प्रमुखों ने भाग लिया। इनमें शाह हसनी मियां नियाजी बरेली शरीफ, मोहम्मद शब्बीरूल हसन गुलबर्गा शरीफ  कर्नाटक, अहमद निजामी दिल्ली, सैयद तुराब अली हलकट्टा शरीफ  आंध्रप्रदेश, सैयद जियाउद्दीन अमेटा शरीफ गुजरात, बादशाह मियां जियाई जयपुर, सैयद बदरूद्दीन दरबारे बारिया चटगांव बंगलादेश, सहित भागलपुर बिहार, फुलवारी शरीफ  यूपी, उत्तरांचल प्रदेश से गंगोह शरीफ दरबाह साबिर पाक कलियर के अलीशाह मियां, गुलबर्गा शरीफ में स्थित ख्वाजा बंदा नवाज गेसू दराज की दरगाह के सज्जदानशीन सैयद शाह खुसरो हुसैनी, नायब सज्जादानशीन सैयद यद्दुलाह हसैनी, दरगाह सूफी कमालुद्दीन चिश्ती के सज्जानशीन गुलाम नजमी फारूकी, नागौर शरीफ  के पीर अब्दुल बाकी, दिल्ली स्थित दरगाह हजरत निजामुद्दीन के सैयद मोहम्मद निजामी सहित देशभर के सज्जादगान मौजूद थे।
सूफीवाद को धर्मान्तरण की बुनियाद बताने वालों की दलीलों को खारिज करत हुए दरगाह दीवान ने कहा कि धर्म के नाम पर नफरत फैलाने वाले लोगों को गरीब नवाज की दरगाह से सबक लेना चाहिए। ख्वाजा के दर पर हिन्दू हों या मुस्लिम या किसी भी अन्य धर्म को मानने वाले, सभी जियारत करने आते हैं। उन्होने कहा कि हजरत गरीब नवाज ने कभी भी अजमेर में इस्लाम का प्रचार-प्रसार नहीं किया। यहां उन्होंने अपने जीवन के अंत तक रहकर हिन्दू और मुसलमानों के बीच एकता कायम रखते हुए गरीब, लाचार, अपाहिजों और दुखियों की सेवा की।
सज्जादानशीन ने इस्लाम का उदारवादी चेहरा प्रस्तुत करते हुए कहा कि सूफी मुसलमान हमेशा से उदारवादी हैं, जो इस्लाम की सबसे प्यारी पहचान है। सूफी परम्पराओं को लेकर आज भी इस्लामिक कट्टरवाद के खिलाफ खड़े है इस्लाम में भी कट्टरपंथी लोगों का बोलबाला रहा है, लेकिन नरमपंथी सूफीवाद ने उन्हें हमेशा पराजित किया है इसीलिए उदारवादी मुस्लिम आज पहाड़ जैसी चुनौती का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह देश में सूफीवाद का बड़ा केंद्र हैं यहां से पूरी दुनिया में इस्लाम के शांति और भाईचारे का पैगाम जारी है। इतना ही नहीं इस्लाम के नैतिक मूल्यों को स्थापित करने और आतंकवाद के खिलाफ  वैचारिक लड़ाई में सूफीवाद अहम भूमिका निभा सकता है।
आतंकवाद की आलोचना:
दीवान आबेदीन ने जेहाद के नाम पर आतंकवाद की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि जेहाद के नाम पर बेगुनाहों की जान लेना बेहद ही शर्मनाक है। कुछ लोग जेहाद की आड़ में जब हत्याएं करते हैं तो पूरा इस्लाम बदनाम होता है। आज इसी प्रवृति से इस्लाम को भारी नुकसान हो रहा है। हम सबको मिलकर इन साजिशों का पर्दाफाश करना चाहिए।
(एस.पी. मित्तल)  (13-04-2016)
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