- Next story अजमेर के जिला कलेक्टर लोकबंधु को राज्य स्तरीय सम्मान उनके मधुर और शालीन व्यवहार के कारण भी मिला है। रात्रि चौपाल के लिए प्रदेश भर में चर्चित है। ============= अजमेर के जिला कलेक्टर लोक बंधु को 15 अगस्त को बीकानेर में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में प्रशंसीय राज्य सेवा एवं कुशल कार्य निष्पादन के लिए योग्यता प्रमाण पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। कलेक्टर को यह सम्मान राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दिया। इसमें कोई दो राय नहीं की सरकारी योजनाओं की क्रियान्विति और जनकल्याणकारी का लाभ जरूरतमंद लोगों को दिलवाने में कलेक्टर लोक बंधु की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जो आम रास्ते कब्जों के कारण बंद थे, उन्हें भी खुलवा कर लोगों को राहत पहुंचाई गई। सरकारी और वन भूमि से अतिक्रमण हटाने के लिए भी अभियान चलाए गए। लेकिन प्रदेश के प्रशासनिक क्षेत्रों में लोक बंधु की सबसे ज्यादा चर्चा रात्रि चौपाल को लेकर है। कलेक्टर पद की अनेक व्यवस्थाओं के बावजूद लोकबंधु ने ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रि चौपाल लगाने में कोई कसरनहीं छोड़ी। कई बार तो जिला मुख्यालय पर रात 8 बजे तक काम करने के बाद लोकबंधु रात 9 बजे संबंधित गांव में रात्रि चौपाल के कार्यक्रम में शामिल हुए। लेाक बंधु ने सिर्फ दिखाने के लिए रात्रि चौपाल नहीं की, बल्कि ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान मौके पर ही किया। लोक बंधु का राज्य स्तर पर यह सम्मान उनके मधुर और शालीन व्यवहार के कारण भी हुआ है। सत्तारूढ़ नेताओं के साथ ही नहीं बल्कि विपक्ष के नेताओं के साथ भी कलेक्टर ने हमेशा शालीन व्यवहार किया। कई बार ऐसे मौके आए जब कलेक्टर ने प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से अपने कक्ष से बाहर आकर भी संवाद किया। कलेक्टर के व्यवहार को लेकर विपक्षी दलों के नेताओं को भी कोई शिकायत नहीं है। राजनीतिक दृष्टि से अजमेर का महत्व इसलिए भी है कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, कैबिनेट मंत्री सुरेश रावत अजमेर जिले से ही विधायक है। देवनानी का निर्वाचन क्षेत्र उत्तर और सुरेश रावत का निर्वाचन क्षेत्र पुष्कर की सीमाएं आपस में मिली हुई है। इसके बाद भी लोकबंधु इन दोनों ताकतवर नेताओं के बीच तालमेल बनाए रखते हैं। हाल ही में पुष्कर घाटी में हाईट गेट को लेकर विवाद की स्थिति हुई, लेकिन लोकबंधु ने अपने शालीन व्यवहार और प्रशासनिक कूटनीति के तहत पुष्कर और अजमेर उत्तर के लोगों को नियंत्रण में रखा। लोकबंधु देवनानी और सुरेश रावत के साथ साथ अजमेर के सांसद और केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी के सम्मान में कोई कसर नहीं छोड़ते। चूंकि किशनगढ़ में कांग्रेस के विधायक डॉ. विकास चौधरी है, लेकिन फिर भी लोकबंधु भाजपा और कांग्रेस के बीच तालमेल बनाए हैं। विकास चौधरी जिले में कांग्रेस के एक मात्र विधायक है। चौधरी देहात कांग्रेस के जिलाध्यक्ष भी हैं। विधायक चौधरी को भी कलेक्टर के व्यवहार से कोई शिकायत नहीं है। कई जिलों के कलेक्टरों का तबादला एक वर्ष बाद ही हो जाता है। लेकिन लोकबंधु को अजमेर में दो वर्ष हो रहे हैं। लोकबंधु का अपने अधीनस्थ अधिकारियों से भ अच्छा तालमेल है। यही वजह है कि अधीनस्थ अधिकारी कलेक्टर से जब चाहे तब बिना झिझक संवाद कर सकते हैं। कलेक्टर ने जो व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा है उसमें अधीनस्थ अधिकारियों को सवालों के जवाब तत्काल देते हैं। किसी भी अधीनस्थ अधिकारी की समस्या को लोकबंधु कभी नहीं टालते। जनसमस्याओं के निदान को लोकबंधु पहली प्राथमिकता देते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story शहरी चुनाव का असर देखने के लिए पंचायती चुनाव की लॉटरी प्रक्रिया को टाला। लेकिन अब राजस्थान भर में आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति। ============= राजस्थान के इतिहास में संभवत यह पहला अवसर है, जब वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत शहरी निकायों और पंचायती राज के चुनाव एक साथ हो रहे है। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को इसी वर्ष 15 नवंबर तक दोनों संस्थाओं के चुनाव करवाने है। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 अगस्त को पंचायती राज से जुड़ी जिला परिषद के वार्ड, पंचायत समितियों के प्रधान और वार्ड सदस्यों, ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षित वार्डों की लॉटरी निकालनी थी, लेकिन 16 अगस्त को रविवार के अवकाश के बावजूद राज्य सरकार ने लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया। अब अगले माह सितंबर में 71 और 18 तारीख को आरक्षित वर्गों की लॉटरी निकालने की घोषणा की गई है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि लॉटरी प्रक्रिया को अचानक स्थगित क्यों किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पहले शहरी निकायों का चुनाव असर देखना चाहती है, इसलिए सरकार ने पहले चरण में शहरी निकायों के चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सितंबर माह में शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अक्टूबर और नवंबर में होंगे। ऐसी स्थिति में पंचायती राज चुनाव की लॉटरी को एक माह के लिए टाल दिया गया है। इससे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के उन नेताओं को भी फायदा होगा जो शहरी निकायों के चुनाव में वार्ड पार्षद, निकायों के अध्यक्ष, सभापति और मेयर नहीं बन सके। हाल ही में जो परिसीमन हुआ है उसमें अनेक ग्राम पंचायत शहरी निकायों में शामिल हो गई है। यानी ऐसे अनेक राजनेता है जिनकी राजनीति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में है। असमंजस की स्थिति: सरकार ने पंचायती राज चुनाव में लॉटरी प्रक्रिया को टाल कर चुनाव आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग जिस दिन शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा, उसी दिन से शहरी सीमा में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। लेकिन वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं होगी। जबकि प्रदेश भर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाएं आपस में मिली हुई है। कहा जा सकता है कि किसी ग्राम पंचायत की सीमाएं शहरी क्षेत्र में किसी शहरी निकाय के वार्ड की सीमा ग्रामीण क्षेत्र में घुसी हुई है। ऐसे में आचार संहिता का पालना करवाना बेहद मुश्किल होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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