- Next story शहरी चुनाव का असर देखने के लिए पंचायती चुनाव की लॉटरी प्रक्रिया को टाला। लेकिन अब राजस्थान भर में आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति। ============= राजस्थान के इतिहास में संभवत यह पहला अवसर है, जब वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत शहरी निकायों और पंचायती राज के चुनाव एक साथ हो रहे है। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को इसी वर्ष 15 नवंबर तक दोनों संस्थाओं के चुनाव करवाने है। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 अगस्त को पंचायती राज से जुड़ी जिला परिषद के वार्ड, पंचायत समितियों के प्रधान और वार्ड सदस्यों, ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षित वार्डों की लॉटरी निकालनी थी, लेकिन 16 अगस्त को रविवार के अवकाश के बावजूद राज्य सरकार ने लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया। अब अगले माह सितंबर में 71 और 18 तारीख को आरक्षित वर्गों की लॉटरी निकालने की घोषणा की गई है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि लॉटरी प्रक्रिया को अचानक स्थगित क्यों किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पहले शहरी निकायों का चुनाव असर देखना चाहती है, इसलिए सरकार ने पहले चरण में शहरी निकायों के चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सितंबर माह में शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अक्टूबर और नवंबर में होंगे। ऐसी स्थिति में पंचायती राज चुनाव की लॉटरी को एक माह के लिए टाल दिया गया है। इससे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के उन नेताओं को भी फायदा होगा जो शहरी निकायों के चुनाव में वार्ड पार्षद, निकायों के अध्यक्ष, सभापति और मेयर नहीं बन सके। हाल ही में जो परिसीमन हुआ है उसमें अनेक ग्राम पंचायत शहरी निकायों में शामिल हो गई है। यानी ऐसे अनेक राजनेता है जिनकी राजनीति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में है। असमंजस की स्थिति: सरकार ने पंचायती राज चुनाव में लॉटरी प्रक्रिया को टाल कर चुनाव आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग जिस दिन शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा, उसी दिन से शहरी सीमा में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। लेकिन वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं होगी। जबकि प्रदेश भर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाएं आपस में मिली हुई है। कहा जा सकता है कि किसी ग्राम पंचायत की सीमाएं शहरी क्षेत्र में किसी शहरी निकाय के वार्ड की सीमा ग्रामीण क्षेत्र में घुसी हुई है। ऐसे में आचार संहिता का पालना करवाना बेहद मुश्किल होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story तो क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खडग़े ने वंदेमारतम गीत को पूरा गाने पर नाराजगी जताई? कांग्रेस मुख्यालय पर हुए ध्वजारोहण समारोह में कांग्रेस के नेता असहज हुए। ================ 13 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के मुख्यालय में भी 80 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने ध्वजारोहण किया। ध्वजा रोहण के बाद जब राष्ट्रीय गीत वंदे मारतम गाया जा रहा था, तो बीच में ही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया कांधी , मौजूद अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की नाराजगी देखने को मिली। असल में वंदेमारतम गीत को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद पूरा वंदेमातरम का गायन अनिवार्य हो गया है। किसी भी समारोह में उपस्थित लोग वंदे मातरम को बीच में नहीं रुकना चाहिए , जब कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गीत गाया जा रहा था, तब दो पैराग्राफ के बाद सोनिया गांधी ने जानना चाहा कि पूरा वन्देमारतम गीत क्यों गाया जा रहा है? सोनिया की तरह खरगे ने भी नाराजगी दिखााई। इसी बीच राहुल गांधी ने जानना चाहा कि उनकी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी किस पर नाराज है तो वीडियो में तीनों नेताओं की भूमिका बता रही कि वंदेमातरम को पूरा गाने पर असहज है। जबकि राहुल गांधी के पास खड़े कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन बिना हिले डुले वंदे मातरम का गायन कर रहे है। तीन मिनट के वीडियो में सोनिया गांधी की नाराजगी पर कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पूरा वंदे मातरम गायन अनिवार्य हो गया है, इसलिए बीच में गायन को बंद नहीं किया जा सकता। वायरल वीडियो में साफ पता चलता है कि भले ही सोनिया गांधी राहुल गांधी और खरगे गायन में खड़े रहे, लेकिन उन्होंने पूरे वंदे मातरम का उच्चारण नहीं किया। यहां यह उल्लेखनीय है कि पूरे वंदेमातरम पर मुस्लिम संगठनों ने ऐतराज जताया है। संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि दो पैराग्राफ के बाद वंदे मातरम गीत में हिंदू देवी देवताओं की स्तुति की गई है, इसलिए मुसलमान वंदे मातरम का गायन दर्जा देने का प्रस्ताव रखा गया, तब कांग्रेस समाजवादी पार्टी, डीएमके आदि विपक्षी दलों के सांसदों ने बहिष्कार किया था। यानी प्रस्ताव पर विपक्षी सांसदों ने अपनी सहमति नहीं दी। वंदेनमातरम गीत को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को पहला अवसर रहा, जब वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पूरे वंदेमातरम का गायन हुआ। सोनिया गांधी और खडग़े की नाराजगी के सवाल पर कांग्रेस केवरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनया गांधी पूरे वंदमारतम के गायन से नाराज नहीं थी। असल में राष्ट्ररीय अध्यक्ष खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह गया था। जयराम रमेश की यह सफाई किसी के भी गले नहीं उतर रही है क्योंकि समारोह में खरगे के लिए कुर्सी लाई ही नहीं गई। वैसे भी तीन मिनट के वन्देमारतम को गाने के लिए कुर्सी पर बैठने की कोई आवश्यकता नहीं है। खरगे तो 82 वर्ष की उम्र में भी राज्यसभा में लगातार खड़े रहते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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