मनुस्मृति की आड़ में जातियों के भेदभाव का जो जहर अंग्रेजों ने घोला, वो ही काम अब राहुल गांधी कर रहे हैं। दलितों के साथ भेदभाव करने का झूठ पुष्कर में पकड़ा गया। सनातन संस्कृति में तो वसुधैव कुटुम्बकम यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार है कि अवधारणा है। ============= कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे और मौजूदा समय में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी इन दिनों देश भर में जातिवाद का जहर घोल रहे हैं। 29 अगस्त को दिल्ली में एक वीडियो ब्रीफिंग में राहुल गांधी ने दलितों के साथ भेदभाव के जो उदाहरण दिए उन में गत 8 अगस्त को उत्तराखंड की घटना का भी उल्लेख किया। राहुल गांधी का आरोप रहा कि जिस मंच से कांग्रेस के राट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने भाषण दिया, उस मंच को कुछ हिंदूवादियों ने शुद्धिकरण के नाम पर हवन यज्ञ किया। ऐसा इसलिए किया गया क्योंकि खडग़े दलित हैं। राहुल के इस भेदभाव के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया। इसी ब्रीफिंग में उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि रामनाथ कोविंद जब राष्ट्रपति थे, तब उन्होंने 14 मई 2018 को अजमेर के पुष्कर तीर्थ की यात्रा की थी। तब दलित होने के कारण कोविंद और उनके परिवार के सदस्यों को ब्रह्मा मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया। गौतम द्वारा बताई गई, इस घटना पर राहुल गांधी ने भी सहमति जताई, लेकिन पुष्कर के तीर्थ पुरोहितों और ब्रह्मा मंदिर के मुख्यपुजारी गोपाल कृष्ण वशिष्ठ ने गौतम के कथन को सफेद झूठ बताया है। पुरोहित संघ के अध्यक्ष पुष्कर नारायण आदाली और वशिष्ठ ने बताया कि 14 मई 2018 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पत्नी सविता कोविंद और पुत्री स्वाति कोविंद को सनातन धर्म की वैदिक परपंरा के अनुरूप पवित्र सरोवर के घाट पर पूजा अर्चना करवाई गई। सरोवर की पूजा अर्चना के बाद तीनों सदस्य ब्रह्मा मंदिर के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में आए, लेकिन सविता कोविंद के घुटने की तकलीफ के कारण मंदिर की सीढिय़ा चढऩे में परेशानी हुई। कुछ सीढिय़ा चढऩे के बाद सविता कोविंद किनारे बैठ गई। इसी स्थान पर राष्ट्रपति रामनाक कोविंद भी बैठे। चंूकि सविता कोविंद के लिए सीढिय़ा चढऩा मुश्किल हो रहा था, इसलिए मंदिर के पुजारियों ने सीढियों पर ही पूजा करवाई। राष्ट्रपति दम्पत्ति ने सीढियों पर खड़े हो कर ही ब्रह्मा जी के दर्शन किए, जबकि पुत्री स्वाति कोविंद ने मंदिर के अंदर जाकर दर्शन किए। स्वाति कोविंद ने ब्रह्मा जी की प्रतिमा की परिक्रमा भी लगाई। पुजारी वशिष्ठ और तीर्थ पुरोहित संघ के अध्यक्ष आदाली ने कहा कि पुष्कर आने वाले किसी भी यात्री के साथ जाति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाता। यहां सभी जातियों के श्रद्धालुओं को सनातन संस्कृति के अनुरूप पूजा अर्चना करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने राहुल गांधी की उपस्थिति में पुष्कर तीर्थ को बदनाम करने वाला काम किया है। इन दोनों को अपने कृत्य के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की पत्नी की परेशानी के बाद ही मंदिर परिसर में लिफ्ट लगाई गई है। अब बुजुर्ग श्रद्धालु भी लिफ्ट से ब्रह्माजी के दर्शन कर रहे हैं। वसुधैव कुटुम्बकम्: असल में राहुल गांधी वो काम कर रहे है जो अंग्रेजों ने भारत में शासन करने के लिए किया था। अंग्रेजों ने हिंदू धर्म को विभाजित करने के लिए ही जातियों के भेदभाव का जहर घोला। इतिहास बताता है कि मनुस्मृति का अंग्रेजी अनुवाद 1783-84 में कोलकाता हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस विलियम जॉनसन ने किया, लेकिन तब मनुस्मृति की मूल प्रति उपलब्ध नहीं हुई। विलियम जॉनसन ने अपने नजरिए से मनुस्मृति की व्याख्या की। असल में यह हिंदू समाज को बांटने का षडय़ंत्र था। जो काम अंग्रेजों ने किया वही काम अब राहुल गांधी कर रहे है। राहुल गांधी को यह भी समझना चाहिए जो आज जिस मनुस्मृति की आलोचना राहुल गांधी कर रहे है, उसी मनुस्मृति का संस्करण 1972 में भारती विद्या भवन द्वारा तब प्रकाशित किया गया, जब श्रीमती इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री थी। इसी प्रकार राजीव गांधी के प्रधानमंत्री रहते हुए 1985 में भारत सरकार के सहयोग से मनुस्मृति का नया संस्करण प्रकाशित हुआ। यदि मनुस्मृति ग्रंथ इतना खराब था तो फिर श्रीमती इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री रहते हुए क्यों प्रकाशित करवाया? राहुल गांधी अपने राजनीतिक स्वार्थों के खातिर भले ही हिंदू समाज को बांटने का काम करे, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति की धारणा तो वसुधैव कुटुम्बकम् यानी संपूर्ण पृथ्वी ही परिवार की शिक्षा देती है। हमारे ग्रंथ शांति विज्ञान, चिकित्सा, दर्शन और मानवता के असली स्त्रोत है। जब हम पूरी पृथ्वी को अपना परिवार मानते हें, तब हिंदू समाज जाति के आधार पर किसी से भी भेदभाव नहीं कर सकता। आज राष्ट्रपति के पद पर आदिवासी समाज की महिला विराजमान है। वहीं प्रधानमंत्री के तौर पर पिछड़ी जाति के ही नरेंद्र मोदी है। भारत में कभी भी जाति के आधार पर भेदभाव नहीं हुआ। S.P.MITTAL BLOGGER ( 31-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

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