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शहरी चुनाव का असर देखने के लिए पंचायती चुनाव की लॉटरी प्रक्रिया को टाला। लेकिन अब राजस्थान भर में आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति। ============= राजस्थान के इतिहास में संभवत यह पहला अवसर है, जब वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत शहरी निकायों और पंचायती राज के चुनाव एक साथ हो रहे है। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को इसी वर्ष 15 नवंबर तक दोनों संस्थाओं के चुनाव करवाने है। तय कार्यक्रम के अनुसार 17 और 18 अगस्त को पंचायती राज से जुड़ी जिला परिषद के वार्ड, पंचायत समितियों के प्रधान और वार्ड सदस्यों, ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच के लिए आरक्षित वार्डों की लॉटरी निकालनी थी, लेकिन 16 अगस्त को रविवार के अवकाश के बावजूद राज्य सरकार ने लॉटरी निकालने की प्रक्रिया को अचानक स्थगित कर दिया। अब अगले माह सितंबर में 71 और 18 तारीख को आरक्षित वर्गों की लॉटरी निकालने की घोषणा की गई है। हालांकि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि लॉटरी प्रक्रिया को अचानक स्थगित क्यों किया गया, लेकिन माना जा रहा है कि राज्य में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पहले शहरी निकायों का चुनाव असर देखना चाहती है, इसलिए सरकार ने पहले चरण में शहरी निकायों के चुनाव करवाने का निर्णय लिया है। हालांकि चुनाव आयोग ने अभी शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सितंबर माह में शहरी निकायों की चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। यानी पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव अक्टूबर और नवंबर में होंगे। ऐसी स्थिति में पंचायती राज चुनाव की लॉटरी को एक माह के लिए टाल दिया गया है। इससे दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के उन नेताओं को भी फायदा होगा जो शहरी निकायों के चुनाव में वार्ड पार्षद, निकायों के अध्यक्ष, सभापति और मेयर नहीं बन सके। हाल ही में जो परिसीमन हुआ है उसमें अनेक ग्राम पंचायत शहरी निकायों में शामिल हो गई है। यानी ऐसे अनेक राजनेता है जिनकी राजनीति शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में है। असमंजस की स्थिति: सरकार ने पंचायती राज चुनाव में लॉटरी प्रक्रिया को टाल कर चुनाव आचार संहिता को लेकर असमंजस की स्थिति खड़ी कर दी है। राज्य निर्वाचन आयोग जिस दिन शहरी निकायों के चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा, उसी दिन से शहरी सीमा में चुनाव आचार संहिता लागू हो जाएगी। लेकिन वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में आचार संहिता लागू नहीं होगी। जबकि प्रदेश भर में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाएं आपस में मिली हुई है। कहा जा सकता है कि किसी ग्राम पंचायत की सीमाएं शहरी क्षेत्र में किसी शहरी निकाय के वार्ड की सीमा ग्रामीण क्षेत्र में घुसी हुई है। ऐसे में आचार संहिता का पालना करवाना बेहद मुश्किल होगा। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

विकसित भारत के मुद्दे पर पीएम मोदी ने लाल किले से विपक्ष खासकर राहुल गांधी को मुंहतोड़ जवाब दिया। पहली बार स्वतंत्रता दिवस के समारोह में वन्देमारतम को राष्ट्र गीत के तौर पर गाया। राहुल गांधी सहित कांग्रेस के प्रमुख नेता नहीं आए। ================ 15 अगस्त को देश के 80 वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय समारोह में नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर लगातार 13वीं बार दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले पर तिरंगा फहराया। आजादी के बाद यह पहला अवसर रहा जब राष्ट्रगान जन गण मन से पहले राष्ट्रगीत वंदे मातरम गाया गया। मालूम हो कि वंदे मातरम को अब संवैधानिक दर्जा मिल गया है, इसलिए सरकारी समारोह में वंदे मातरम गीत का गायन अनिवार्य हो गया है। आमतौर पर वंदे मातरम गीत के शुरू के दो पैराग्राफ का ही गायन होता था, लेकिन अब पूरा वंदे मातरम गीत अनिवार्य हो गया है। पूरा वंदे मातरम गीत के गायन में तीन मिनट 10 सेकंड का समय लगता है। कहा जा सकता है कि 80 वां स्वतंत्रता दिवस का राष्ट्रीय समारोह वेद मातरम गीत के कारण ऐतिहासिक बन गया है। पीएम मोदी ने परंपरा के अनुरूप अपनी सरकार की उपलब्धियां तो बताई ही साथ ही विपक्ष खासकर लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी के नकारात्मक प्रचार का मुंह तोड़ जवाब दिया। पीएम मोदी ने कहा कि देश में नक्सलवाद समाप्त हो गया है, लेकिन कुछ लोगों के दिमाग में नक्सलवाद अभी भी भरा हुआ है, इसलिए ऐसे लोग देश को कमजोर करने वाली बातें कहते है। मध्य एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ तो ऐसे लोगों ने डराया कि अब देश में गैस, पेट्रोल और डीजल की कमी हो जाएगी, लेकिन देश की जनता ने देखा कि इस यु का भारत में तेल सप्लाई का कोई असर नहीं पड़ा। देशवासियों को मांग के अनुरूप गैस और तेज की सप्लाई होती रही। ऐसे में लोगों ने कोरोना काल में वैक्सीन को लेकर डराया लेकिन भारत ने न केवल अपने देश के लोगों को वैक्सीन उपलब्ध करवाई बल्कि दूसरे देशों के लोगो के भी दी। नक्सलवादी मानसिकता के लोगों को हर बार मार खानी पडती है, लेकिन ऐसे लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आते। मोदी ने कहा कि हमारी सरकार ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत का जो संक प लिया है, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा। मोदी ने कहा कि 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यह अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। अपने 12 वर्ष के कार्यकाल के बारे में बताते हुए मोदी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले देश के 70 शहरों में पाइप लाइन से 20 लाख घरों में रसोई गैस की सप्लाई होती थी। आज 700 शहरों के पौने दो करोड़ घरों में गैस सप्लाई हो रही है। 2014 से पहले मात्र दो गीगा वाट सोलर एनर्जी होती थी, जो आज 160 गीगा वाट हो रही है। 2014 से पहले रेलवे में विद्युतीकरण मात्र 30 प्रतिशत था। आज 100 प्रतिशत हो गया है। रक्षा उत्पादन चार गुना बढ़ा है। डिजिटल लेनदेन 100 प्रतिशत बढ़ा है। 2014 में देश में 350 विश्वविद्यालय थे, आज 620है। मोदी ने कहा कि कुछ लोग भले ही नकारात्मकता रवैया प्रदर्शित करे, लेकिन आजादी के साथ वर्ष पूरे होने पर भारत विकसित बनकर रहेगा। इसके लिए सप्त धारा यानी सात शक्तियां बनाई गई है। मोदी ने राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे चुनाव के दौरान 33 प्रतिशत उम्मीदवार महिलाओं के बनाए मोदी के भाषण की प्रमुख बातें: यहाँ दिए गए विवरण का एक संक्षिप्त और स्पष्ट रूप (Summary) दिया गया है: 1. नक्सलवाद और ‘दिमागी नक्सल’ की चुनौती उपलब्धि: 2014 के संकल्प के बाद देश में हथियारबंद नक्सलवाद अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में विकास पहुँच चुका है। नई चुनौती: जंगलों में हथियारबंद नक्सल तो खत्म हो गए हैं, लेकिन सरकारी कमेटियों और गलियारों में पैठ बनाए ‘दिमागी नक्सल’ अब भी हिंसा, अराजकता और समाज को गलत राह पर ले जाने की ताक में हैं। इन्हें पहचानकर अलग-थलग करना जरूरी है। 2. 12 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियां गरीबी व अर्थव्यवस्था: 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले। भारत ‘फ्रेजाइल फाइव’ से निकलकर एक तेज रफ्तार अर्थव्यवस्था बना। विकास के आंकड़े: डिफेंस (4 गुना), खादी (5 गुना), मोबाइल उत्पादन (33 गुना), डिजिटल ट्रांजैक्शन (100 गुना) और पेटेंट (4 गुना) में भारी बढ़ोतरी हुई। बुनियादी ढांचा: गरीबों के घर, शौचालय और मेट्रो विस्तार में रिकॉर्ड काम हुआ। लक्ष्य: ‘मेक इन इंडिया’ और ‘लोकल फॉर वोकल’ के जरिए 2047 तक ‘आत्मनिर्भर और विकसित भारत’ का निर्माण। 3. टेक्नोलॉजी, ऊर्जा और बुनियादी सुधार सेमीकंडक्टर व ऊर्जा: 3 सेमीकंडक्टर प्लांट शुरू हो चुके हैं और 5-8 नए आने वाले हैं। परमाणु ऊर्जा और क्रिटिकल मिनरल्स में भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। संसाधन विस्तार: समुद्र में ‘नो गो एरिया’ को ‘गो अहेड एरिया’ बनाकर 85,000 करोड़ की समुद्र मंथन योजना शुरू की गई। गैस व सोलर: पाइप गैस 70 शहरों से बढ़कर 700 शहरों तक पहुँची। सोलर एनर्जी 2 GW से बढ़कर 160 GW हुई। रेलवे: 90 वर्षों में सिर्फ 30% रेलवे इलेक्ट्रिफिकेशन हुआ था, जिसे बीते एक दशक में 70% पूरा किया गया। देश की पहली और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई। 4. वैश्विक संकट और किसान कल्याण संकट प्रबंधन: कोरोना और रूस-यूक्रेन व वेस्ट एशिया युद्ध के बावजूद देश में पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक (फर्टिलाइजर) की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी गई। किसानों को राहत: वैश्विक बाजार में 3,000 रुपये मिलने वाली यूरिया बोरी किसानों को 300 रुपये में और महंगी DAP सब्सिडी दरों पर उपलब्ध कराई जा रही है। 5. ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और 2047 का विजन कार्यशैली में बदलाव: जो काम पांच दशकों में नहीं हुए, उन्हें अगले 5 वर्षों में पूरा करने के लिए ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की गति से काम करना होगा। मैन्युफैक्चरिंग व क्वालिटी: ग्लोबल वैल्यू चेन में भरोसा बनाने के लिए ‘जीरो डिफेक्ट’ और उच्च गुणवत्ता (No compromise on quality) का मंत्र अपनाना होगा। युवा व स्टार्टअप: ढाई लाख से अधिक रजिस्टर्ड स्टार्टअप्स के लिए 1 लाख करोड़ रुपये का कोष रखा गया है। नारी शक्ति: ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% प्रतिनिधित्व देने के लिए सभी दलों से सहयोग का आह्वान। कांग्रेस के नेता नहीं आए : दिल्ली में लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रीय कार्यक्रम में लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रमुख का न आना स्पष्ट दर्शाता है कि उन्हें देश की आजादी से जुड़े कार्यक्रमों में रुचि नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तो क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी और खडग़े ने वंदेमारतम गीत को पूरा गाने पर नाराजगी जताई? कांग्रेस मुख्यालय पर हुए ध्वजारोहण समारोह में कांग्रेस के नेता असहज हुए। ================ 13 अगस्त को दिल्ली में कांग्रेस के मुख्यालय में भी 80 वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े ने ध्वजारोहण किया। ध्वजा रोहण के बाद जब राष्ट्रीय गीत वंदे मारतम गाया जा रहा था, तो बीच में ही कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया कांधी , मौजूद अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी की नाराजगी देखने को मिली। असल में वंदेमारतम गीत को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद पूरा वंदेमातरम का गायन अनिवार्य हो गया है। किसी भी समारोह में उपस्थित लोग वंदे मातरम को बीच में नहीं रुकना चाहिए , जब कांग्रेस मुख्यालय में वंदे मातरम गीत गाया जा रहा था, तब दो पैराग्राफ के बाद सोनिया गांधी ने जानना चाहा कि पूरा वन्देमारतम गीत क्यों गाया जा रहा है? सोनिया की तरह खरगे ने भी नाराजगी दिखााई। इसी बीच राहुल गांधी ने जानना चाहा कि उनकी माताजी श्रीमती सोनिया गांधी किस पर नाराज है तो वीडियो में तीनों नेताओं की भूमिका बता रही कि वंदेमातरम को पूरा गाने पर असहज है। जबकि राहुल गांधी के पास खड़े कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अजय माकन बिना हिले डुले वंदे मातरम का गायन कर रहे है। तीन मिनट के वीडियो में सोनिया गांधी की नाराजगी पर कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि पूरा वंदे मातरम गायन अनिवार्य हो गया है, इसलिए बीच में गायन को बंद नहीं किया जा सकता। वायरल वीडियो में साफ पता चलता है कि भले ही सोनिया गांधी राहुल गांधी और खरगे गायन में खड़े रहे, लेकिन उन्होंने पूरे वंदे मातरम का उच्चारण नहीं किया। यहां यह उल्लेखनीय है कि पूरे वंदेमातरम पर मुस्लिम संगठनों ने ऐतराज जताया है। संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि दो पैराग्राफ के बाद वंदे मातरम गीत में हिंदू देवी देवताओं की स्तुति की गई है, इसलिए मुसलमान वंदे मातरम का गायन दर्जा देने का प्रस्ताव रखा गया, तब कांग्रेस समाजवादी पार्टी, डीएमके आदि विपक्षी दलों के सांसदों ने बहिष्कार किया था। यानी प्रस्ताव पर विपक्षी सांसदों ने अपनी सहमति नहीं दी। वंदेनमातरम गीत को संवैधानिक दर्जा मिलने के बाद कांग्रेस मुख्यालय में 15 अगस्त को पहला अवसर रहा, जब वरिष्ठ नेताओं के समक्ष पूरे वंदेमातरम का गायन हुआ। सोनिया गांधी और खडग़े की नाराजगी के सवाल पर कांग्रेस केवरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि सोनया गांधी पूरे वंदमारतम के गायन से नाराज नहीं थी। असल में राष्ट्ररीय अध्यक्ष खरगे के लिए कुर्सी लाने को कह गया था। जयराम रमेश की यह सफाई किसी के भी गले नहीं उतर रही है क्योंकि समारोह में खरगे के लिए कुर्सी लाई ही नहीं गई। वैसे भी तीन मिनट के वन्देमारतम को गाने के लिए कुर्सी पर बैठने की कोई आवश्यकता नहीं है। खरगे तो 82 वर्ष की उम्र में भी राज्यसभा में लगातार खड़े रहते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आखिर राहुल गांधी झारखंड के आंदोलन को समर्थन क्यों नहीं देते? अरविंद केजरीवाल के इशारे पर नाचने वाली कॉकरोच जनता पार्टी भी चुप। सीबीआई जांच की मांग पर ऐतराज क्यों? ================ झारखंड में भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने के विरोध में प्रदेश भर के छात्र गत एक पखवाड़े से राजधानी में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। कई छात्र आमरण अनशन पर भी है। छात्रों ने पेपर लीक के मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों की इस मांग को मानने से इंकार कर दिया है। झारखंड में झारखंड मुक्ति मोर्चा वाली सरकार कांग्रेस के समर्थन से चल रही है। इसलिए यह सवाल उठ रहा है कि आखिर प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी झारखंड के छात्रों के आंदोलन को समर्थन क्यों नहीं दे रहे है? राहुल गांधी के इशारे पर ही नीट पेपर लीक को लेकर संसद की कार्यवाही ठप है। पेपर लीक के मुद्दे को लेकर ही राहुल गांधी ने 8 अगस्त को देहरादून में छात्रों से संवाद किया और कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों की वजह से देश के युवाओं का भविष्य बर्बाद हो रहा है। सवाल उठता है कि जब राहुल गांधी देहरादून जाकर केंद्र सरकार की आलोचना कर सकते हैं, तो रांची आकर छात्र आंदोलन का समर्थन क्यों नहीं करते? झारखंड के छात्र आंदोलन का समर्थन न करने से राहुल गांधी और कांग्रेस का दोहरा चरित्र उजागर होता है। इससे यह भ प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी की नजर में झारखंड के छात्रों का आंदोलन कोई मायने नहीं रखता। कॉकरोच पार्टी भी चुप: नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने गत जुलाई माह में दिल्ली में बड़ा धरना प्रदर्शन किया। कॉकरोचों के दबाव के चलते ही धर्मेन्द्र प्रधान को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा, लेकिन अब झारखंड के मुद्दे पर वही कॉकरोच पार्टी चुप है। कॉकरोच पार्टी पर आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल का दबाव है। असल में केजरीवाल की रणनीति से ही कॉकरोच पार्टी का जन्म हुआ। दिल्ली के जंतर मंतर के छात्र आंदोलन में भी परदे के पीछे से केजरीवाल की भूमिका थी। चूंकि झारखंड में कांग्रेस के समर्थन से जेएमएम की सरकार चल रही है, इसलिए केजरीवाल नहीं चाहते कि कॉकरोच पार्टी झारखंड के आंदोलन का समर्थन करें। सीबीआई जांच पर ऐतराज क्यों? झारखंड में शिक्षा विभाग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है, इसलिए प्रदर्शनकारी छात्रों को भी पता है कि हेमंत सोरेन इस्तीफा नहीं देेंगे। यही वजह है कि प्रदर्शनकारी छात्र पेपर लीक के मामलों की जांच सीबीआई से करवाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि छात्रों के दबाव के चलते सरकार ने झारखंड प्रशासनिक सेवा की परीक्षा को रद्द कर दिया है। इसके साथ ही झारखंड लोकसेवा आयोग के तीन सदस्यों का इस्तीफा भी ले लिया है, लेकिन सीएम सोरेन सीबीआई जांच की मांग स्वीकार नहीं कर रहे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

गहलोत और पायलट गुट की लड़ाई अब डोटासरा के पास पहुंची। महेंद्र सिंह रलावता ने राजनीति का पाला बदला। अजमेर में कांग्रेस की फूट चौराहे पर। ================ अजमेर शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल ने प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को एक पत्र लिखकर पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया है। डॉ. जयपाल ने पत्र में कहा कि जैन और भाटी की गतिविधियों से कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। जिसका असर नगर निगम के चुनाव पर पड़ेगा। इस पत्र पर पूर्व सीएम अशोक गहलोत के समर्थक पूर्व विधायक डॉ. श्रीगोपाल बाहेती, अजमेर डेयरी के अध्यक्ष रामचंद्र चौधरी, नगर निगम में प्रतिपक्ष की पूर्व नेता द्रौपदी कोली के भी हस्ताक्षर हैं। कांग्रेस की राजनीति में पूर्व अध्यक्ष विजय जैन और हेमंत भाटी को कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट का समर्थक माना जाता है। अजमेर में लंबे समय से गहलोत और पायलट के समर्थक आमने सामने है। डॉ. जयपाल द्वारा पत्र लिखे जाने से अब गहलोत और पायलट गुट की लड़ाई प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा के पास पहुंच गई है। डॉ. जयपाल का कहना है कि जैन ओर भाटी लगातार पार्टी का अनुशासन तोड़ रहे हैं, इसलिए प्रदेश अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है। वहीं जैन और भाटी का आरोप है कि डॉ. जयपाल आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के इशोर पर काम कर रहे है। राठौड़ की भूमिका शुरू से ही विभाजनकारी रही है।यही वजह है कि अजमेर में कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हो रही है। उन्होंने हाल ही में कार्यकर्ताओं की जो बैठक बुलाई उसमें कांग्रेस के निष्ठावान और जिम्मेदार कार्यकर्ता मौजूद थे। कार्यकर्ताओं की इस बैठक को अनुशासनहीनता नहीं माना जा सकता क्योंकि इस बैठक में नगर निगम के चुनाव में कांग्रेस को मजबूत करने की रणनीति बनी। अनुशानहीनता तो जयपाल और धर्मेन्द्र राठौड़ कर रहे हैं। निष्ठावान कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। जैन ने कहा कि हम भी प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा और राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। जैन और भाटी ने अजमेर कांग्रेस में असली विवाद की जड़ धर्मेन्द्र राठौड़ को बताया है। मालूम हो कि धर्मेन्द्र राठौड़ पूर्व सीएम अशोक गहलोत के कट्टर समर्थक हैं। रलावता ने पाला बदला: अजमेर कांग्रेस के ताजा विवाद में वरिष्ठ नेता महेंद्र सिंह रलावता की बदली हुई भूमिका सामने आई है। रलावता अभी तक सचिन पायलट के समर्थक रहे। पायलट की वजह से ही रलावता को दो बार अजमेर उत्तर क्षेत्र से कांग्रेस के उम्मीदवार बने। यह बात अलग है कि रलावता को दोनों बार हार का सामना करना पड़ा। पायलट जब भी अजमेर आए तब स्वागत करने वालों में रलावता सबसे आगे रहे लेकिन अब ऐसा प्रतीत होता है कि रलावता ने पायलट का साथ छोड़ दिया है। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. जयपाल के पायलट समर्थक विजय जैन और हेमंत भाटी के खिलाफ जो पत्र लिखा है उस पर रलावता ने भी हस्ताक्षर किए है। इससे जाहिर होता है कि रलावता ने अब गहलोत गुट का दामन थाम लिया है। मालूम हो कि डॉ. जयपाल ने अपनी कार्यकारिणी में रलावता के छोटे भाई पूर्व पार्षद गजेंद्र सिंह रलावता को शामिल किया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

ममता बनर्जी की टीएमसी वाले सांसद, यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर ने पीएम मोदी का आतिथ्य स्वीकारा। सवाल-फिर पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे। ================ 7 अगस्त को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के उन 26 सांसदों को सुबह के नाश्ते पर आमंत्रित किया, जो हाल ही में केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए में शामिल हुए हैं। इन सांसदों में टीएमसी के चुनाव चिह्न पर लोकसभा का सांसद बनने वाले यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी शामिल रहे। इन तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के पास खड़े होकर गर्व से फोटो भी खिंचवाया। तीनों ने पीएम मोदी की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि मोदी की नीतियों से देश का विकास हो रहा है। मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल में मुसलमान स्वयं को ज्यादा सुरक्षित महसूस करता है। यहां यह खासतौर से उल्लेखनीय है कि तीनों मुस्लिम सांसदों के संसदीय क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा है। भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य रहे यूसुफ पठान ने तो अपने गृह प्रदेश गुजरात को छोड़कर पश्चिम बंगाल की बहरामपुर सीट से चुनाव लड़ा था। पठान ने वर्ष 2024 में इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार अधीर रंजन चौधरी को इसलिए हराया कि यहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या ज्यादा थी। आमतौर पर यह आरोप लगता है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी है। ऐसा आरोप ममता बनर्जी के साथ साथ कांग्रेस के राहुल गांधी, सपा के अखिलेश यादव आदि भी लगाते हैं, लेकिन सवाल उठता है कि जब मुस्लिम वोटों के दम पर चुनाव जीते मुस्लिम सांसद ही पीएम मोदी की प्रशंसा कर रहे हैं, तब मोदी मुस्लिम विरोधी कैसे हो सकते हैं? तीनों मुस्लिम सांसदों ने पीएम मोदी के नेतृत्व में आस्था प्रकट की जो यह दर्शाता है कि पीएम मोदी सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास के तहत मुसलमानों का भी पूरा ख्याल रखते हैं। यदि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी होते तो यूसुफ पठान, खलीलुर्रहमान और अबु ताहिर भी भी मोदी के नेतृत्व को स्वीकार नहीं करते। ममता बनर्जी, राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे नेता मोदी के बारे में कुछ भी कहे, लेकिन मुस्लिम सांसदों ने यह प्रदर्शित किया है कि पीएम मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं है। 7 अगस्त की मुलाकात में पीएम मोदी ने टीएमसी और शिवसेना से आए सांसदों को भरोसा दिलाया कि उनके राजनीतिक हितों की रक्षा की जाएगी। यानी वर्ष 2029 में होने वाले लोकसभा के चुनाव में यह सभी सांसद भाजपा के उम्मीदवार होंगे। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तो क्या जेलर सद्दाम हुसैन की वजह से अजमेर सेंट्रल जेल में बंद मुस्लिम कैदियों की मौज हो रही है? जेल में बंद मुस्लिम कैदियों का रिश्तेदारों से संवाद वाला वीडियो उजागर। यह जेल की सुरक्षा के लिए खतरनाक स्थिति है। ================ भास्कर अखबार ने यह दावा किया कि उसके पास अजमेर सेंट्रल जेल का एक ऐसा एक्सक्लूसिव वीडियो है जो यह दर्शाता है कि जेल में बंद मुस्लिम कैदी अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉलिंग पर संवाद कर रहे हैं। गंभीर और चिंता का विषय यह है कि इस मामले में जेलर सद्दाम हुसैन की भूमिका है। जेलर सद्दाम हुसैन मुस्लिम कैदियों को अपने कक्ष में बुलाता है और फिर अपने मोबाइल से उनके रिश्तेदारों से संवाद करवाता है। अब एक ऐसा वीडियो उजागर हुआ है, जिसमें जेल में बंद ताहिर चिश्ती, उसका बेटा तौफीक चिश्ती और भांजा फखर चिश्ती जेलर सद्दाम हुसैन के कक्ष में बैठकर जेल से बाहर अपने रिश्तेदार फारुख चिश्ती से संवाद कर रहे हैं। फारुख चिश्ती ने इस वीडियो कॉलिंग के लिए जेलर सद्दाम का शुक्रिया अदा भी किया। आरोप है कि सद्दाम हुसैन जेलर के पद का फायदा उठाकर मुस्लिम कैदियों की बात मोबाइल पर उनके रिश्तेदारों से करवाता रहता है। ताजा मामला इसलिए भी गंभीर है कि तौफीक चिश्ती के संबंध बब्बर खालसा जैसे आतंकी संगठनों से भी रहे हैं। तौफिक चिश्ती पर आतंकी संगठनों को हथियार और ड्रग्स सप्लाई करने के आरोप है। ऐसे आरोपों में ही तौफिक चिश्ती पंजाब के जेलों में बंद रहा। तौफीक चिश्ती अपने पिता ताहिर चिश्ती के साथ अजमेर जेल में इसलिए बंद है कि उस पर अजमेर स्थित ख्वाजा साहब की दरगाह के खादिम हाजी बिलाल हुसैन चिश्ती पर जानलेवा हमला करने का आरोप है। तीनों आरोपी सात वर्ष की सजा अजमेर जेल में काट रहे हैं। सेंट्रल जेल से अपने रिश्तेदारों से वीडियो कॉल पर बात करने की इस घटना से जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं। सरकार को इस पूरे मामले की गंभीरता के साथ जांच पड़ताल करवानी चाहिए । अजमेर में सेंट्रल जेल के साथ साथ हाई सिक्योरिटी जेल भी है। इन दोनों जेलों में कैदियों के पास मोबाइल मिलना आम बात है। लेकिन ताजा मामले में तो कैदी जेलर का मोबाइल ही इस्तेमाल कर रहे हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर में गहलोत और पायलट गुट फिर आमने-सामने। नगर निगम चुनाव से पहले कांग्रेस की फूट चौराहे पर। पायलट समर्थकों ने धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल पर ऐतराज जताया। ================ अगले महीने जब अजमेर नगर निगम के चुनाव होने हैं, तब कांग्रेस की फूट चौराहे पर है। चुनाव से पूर्व, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट के समर्थक आमने सामने हो गए है। पायलट समर्थक माने जाने वाले पूर्व शहर अध्यक्ष विजय जैन और गत दो बार दक्षिण क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे हेमंत भाटी के नेतृत्व में पायलट समर्थकों ने 7 अगस्त को एक बैठक की। इस बैठक में बड़ी संख्या में कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल हुए। विजय जैन और हेमंत भाटी ने आरोप लगाया कि आरटीडीसी के पूर्व अध्यक्ष धर्मेन्द्र राठौड़ के दखल से अजमेर शहर में कांग्रेस को नुकसान हो रहा है। मौजूदा शहर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल भी राठौड़ के दबाव में काम कर रहे हैं। इससे पुराने और निष्ठावान कांग्रेसियों की की उपेक्षा हो रही है। मौजूदा समय में अजमेर शहर में भाजपा के खिलाफ जबरदस्त माहोल है। इस बार नगर निगम का मेयर कांग्रेस का बन सकता है, लेकिन धर्मेन्द्र राठौड़ की विभाजनकारी नीतियों के कारण कांग्रेस का कार्यकर्ता निराश है। जैन और भाटी ने कहा कि आखिर धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर की राजनीति में क्यों सक्रिय हैै? राठौड़ ने तो पूर्व में बानसूर (जयपुर ग्रामीण) से चुनाव लड़ा। उनकी राजनीतिक गतिविधियां बानसूर में ही रही है। लेकिन राठौड़ अब अजमेर में रुचि दिखा रहे हैं, जिससे कांग्रेस का कार्यकर्ता स्वीकार नहीं करेगा। जैन और भाट ने कहा कि हमारा प्रयास कांग्रेस को मजबूत करने का है। जबकि धर्मेन्द्र राठौड़ अजमेर में कांग्रेस को कमजोर कर रहे हैं। जैन और भाटी के आरोपों के जवाब में राठौड़ का कहना रहा है कि वे गत 8 वर्षों से अजमेर की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं। उनका पैतृक गांव अजमेर के निकट नांद है। उन्होंने गत 8 वर्षों से अजमेर में कांग्रेस संगठन को मजबूती दी है। आज जो लोग कांग्रेस को मजबूत करने का दावा कर रहे हैं, उन्हीं के कारण अजमेर शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर गत पांच बार से लगातार कांग्रेस उम्मीदवारों की हार हो रही है। कांग्रेस को नगर निगम में भी अपना बोर्ड बनाने का अवसर नहीं मिल रहा है। राठौड़ ने कहा कि शहर अध्यक्ष जयपाल के नेतृत्व में कांग्रेस एकजुट है। मैंने तो प्रत्येक कार्यकर्ता का सम्मान किया है। यहां यह उल्लेखनीय है कि धर्मेन्द्र राठौड़ को पूर्व सीएम गहलोत का कट्टर समर्थक माना जाता है। सितंबर 2022 में अब अशोक गहलोत के समर्थन में कांग्रेस के विधायकों की समानांतर बैठक हुई, तब जिन 3 कांग्रेसी नेताओं को हाईकमान ने अनुशासनहीनता का नोटिस दिया, उसमें धर्मेन्द्र राठौड़ भी शामिल थे। आज भी राठौड़, गहलोत के साथ खड़े हैं। राठौड़ का कहना है कि मैं अशोक गहलोत का पक्का समर्थक हंू। S.P.MITTAL BLOGGER ( 08-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

ब्यावर की भी सीमेंट फैक्ट्री से ग्रामीणों का जीना मुश्किल। प्रतिबंधित केमिकल कचरे के इस्तेमाल से पर्यावरण, पानी जमीन सब कुछ खराब हो रहा है। ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप: पर्यावरण विभाग के अधिकारी तो अंधे हैं। ================ राजस्थान के ब्यावर के निकट अंधेरी देवरी में श्री सीमेंट का जो प्लांट (फैक्ट्री) लगा हुआ है उसकी वजह से आसपास के ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। यह प्लांट देश के सुविख्यात बांगड़ औद्योगिक घराने का है। यूं तो बांगड़ घराना समाजसेवा का दावा करता है,लेकिन ब्यावर प्लांट की वजह से ग्रामीणों को सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। ग्रामीणों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग हो रहा है। यह केमिकल सीमेंट बनाने के काम आने वाले पत्थरों को बरीक किया जाता है, लेकिन कोयले की कीमत बढ़ने के कारण बांगड़ समूह श्री सीमेंट फैक्ट्री में प्रतिबंधित केमिकल का उपयोग कर रहा है। यही कारण है कि फैक्ट्री से जो धुंआ निकलता है, उसकी वजह से आस पास के लोगों को सांस लेने में मुश्किल हो रही है। कई ग्रामीणों को चर्म रोग हो गया है। घरों पर मिट्टी की परत आ रही है। इस जहरीली परत को बार बार हटाना भी कठिन है। फैक्ट्री से जो जरीला पानी निकलता है उसकी वजह से खेती की जमीन बंजर हो रही है ।आसपास के कुओं और तालाबों का पानी भी जहरीला हो गया है। पीड़ित ग्रामीण फैक्ट्री के बाहर लगातार धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन ब्यावर का जिला और पुलिस प्रशासन चुप है। उल्टे ग्रामीणों को ही धमकी दी जा रही है कि उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जाएंगे। जिला और पुलिस प्रशासन नहीं चाहता कि श्री सीमेंट के खिलाफ कोई धरना प्रदर्शन हो। जहां तक पर्यावरण विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल है तो इस विभाग के अधिकारी अंधे है। उन्हें फैक्ट्री से निकलने वाला जहरीला धुआ और पानी नजर नही नहीं आ रहा है। कहा जा सकता है कि ग्रामीणों की सुनने वाला कोई नहीं यहां यह कि ग्रामीणों को सुनने वाला कोई नहीं है। यहां यह उल्लेखनीय है कि ब्यावर की प्रभारी राज्य के उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी है, ग्रामीणों को पीड़ा मंत्री तक पहुंच गई है। लेकिन दीया कुमारी ने भी अभी तक श्री सीमेंट के खिलाफ कार्यवाही करने के निर्देश नहीं दिए है। प्रभारी मंत्री की खामोशी से ब्यावर के पुलिस और जिला प्रशासन की मौज हो गई है। श्री सीमेंट की फैक्ट्री जिस अंधेरी देवरी गांव में स्थित है, वह मसूदा विधानसभा क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में मसूदा से भाजपा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत है, लेकिन कानावत के कानों में भी ग्रामीणों की आवाज सुनाई नहीं दे रही। ब्यावर के भाजपा विधायक शंकर सिंह रावत भी विधायक कानावत के साथ ही खड़े हे। ब्यावर जिला राजसमंद संसदीय क्षेत्र में आता है। मौजूदा समय में श्रीमती महिमा कुमारी भाजपा की सांसद है। शायद महिला कुमारी को भी यह भी पता नहीं होगा कि श्री सीमेंट की फैक्ट्री की वजह से ग्रामीणों को परेशान हो रही है। महिमा कुमारी मेवाड़ राजघराने की सदस्य हे। हो सकता है कि सांसद होने के कारण महिमा कुमारी के बांगड़ समूह से अच्छे संबंध हो। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान में ओबीसी की 92 जातियों में से सिर्फ 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी। सवाल- क्या कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा वंचित 82 जातियों के लोगों को पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में उम्मीद बनाएंगे? आखिर क्यों 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, निकाय प्रमुख आदि बनते हैं? ================ 5 अगस्त को जयपुर में ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) प्रतिनिधित्व आयोग के अध्यक्ष रिटायर्ड जज मदनलाल भाटी ने 900 पन्नों वाली आयोग की रिपोर्ट मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनावों में ओबीसी वर्ग के लिए सीटों का आरक्षण होगा, लेकिन इस रिपोर्ट में चौकाने वाली बात यह है कि राजस्थान में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी की 92 जातियों हैं, लेकिन इनमें से 10 जातियों के लोगों की ही राजनीति में भागीदारी है। यानी इन 10 जातियों के लोग ही सांसद, विधायक, प्रधान, शहरी निकायों के प्रमुख आदि बनते हैं। शेष वंचित 82 जातियों के लोग पार्षद और सरपंच भी नहीं बन पाते। इस बड़े अंतर को देखते हुए ही आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश भाटी ने कहा कि उन्होंने अपनी रिपोर्ट केवल जनसंख्या को आधार मानकर नहीं बनाई है। सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक पिछड़ेपन को भी देखकर रिपोर्ट तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश भर के 74 लाख 85 हजार ओबीसी वर्ग के परिवारों से संवाद किया गया है। यह वाकई अजीत बात है कि राजस्थान में ओबीसी वर्ग की ऐसी 82 जातियां हैं, जिनका कोई भी प्रतिनिधि आज तक सांसद, विधायक आदि नहीं बन सकता है। यानी 92 जातियों का समूह होने के बाद भी सिर्फ 10 जातियों के लोग ही मलाई खा रहे हैं। सवाल उठता है कि क्या ओबीसी वर्ग की वंचित जातियों को राजनीति में प्रतिनिधित्व नहीं मिलना चाहिए? कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने जब देश भर में जाति आधारित जनगणना की मांग की तो उनका तर्क था कि वंचित जातियों को प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। राहुल गांधी कहना रहा कि जाति आधारित जनगणना से पता चल जाएगा कि अभी तक राजनीति में किन जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। केंद्र सरकार ने राहुल गांधी की मांग पर जाति आधारित जनगणना करवाने का निर्णय लिया है, लेकिन जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की रिपोर्ट उजागर हो गई है, तब सवाल उठता है कि क्या प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा इसी वर्ष होने वाले पंचायती राज और शहरी निकायों के चुनाव में ओबीसी की वंचित 82 जातियों के लोगों को उम्मीदवार बनाएंगे? राहुल गांधी का सपना तभी पूरा होगा, जब राजस्थान में ओबीसी वर्ग की 82 जातियों के लोगों को आरक्षित सीटों पर उम्मीदवार बनाया जाए। डोटासरा को अच्छी तरह पता है कि ओबीसी की वे 10 जातियां कौनसी है, जो राजनीति की मलाई खा रही है। यदि वंचित जातियों के लोगों को ओबीसी का लाभ दिया जाता है तो इस वर्ग में सामाजिक समानता भी आएगी। मौजूदा समय में सिर्फ 10 जातियों के लोग ही ओबीसी के 21 प्रतिशत कोटे का लाभ प्राप्त कर रहे है। यह स्थिति सिर्फ राजनीतिक क्षेत्र में ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों के क्षेत्र में भी है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 06-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511