S.P. MITTAL Blog

राहुल गांधी के दौरे में हुई उपेक्षा से सचिन पायलट के समर्थकों में गुस्सा। चाकसू की किसान महापंचायत में मौजूद रहे 15 से भी ज्यादा पायलट समर्थक विधायक। अब पार्टी में रह कर सम्मान की लड़ाई लड़ेंगे। जयपुर से चाकूस के बीच पायलट के साथ 700 वाहनों का काफिला। सीधे सीएम गहलोत को चुनौती।

गत 12 व 13 फरवरी को कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी के राजस्थान दौरे में जिस तरह पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट की उपेक्षा हुई उसका गुस्सा पायलट समर्थकों ने 19 फरवरी को...

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तेल मूल्यों की वृद्धि के विरोध में यदि अमिताभ और अक्षय ने ट्वीट नहीं किया तो कांग्रेस के कार्यकर्ता मुंबई में शूटिंग नहीं होने देंगे। फिर से दिल्ली कूच के लिए ट्रेक्टरों को तैयार रखें। कानून वापस नहीं हुए तो फसल भी जला देंगे-राकेश टिकैत।

स्वयं को प्रगतिशील और बुद्धिजीवी बता कर जिन लोगों ने पूर्व में अवार्ड हासिल किए उन्हें अब अक्सर देश में असहिष्णुता नजर आती है। कई बार ऐसे बुद्धिजीवी और कलाकार अपने अवार्ड वापस करने...

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बहुत फर्क है प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संदेश में। मोदी ने जहां ख्वाजा उर्स को कौमी एकता और भाईचारे की खूबसूरत मिसाल बताया तो वहीं सोनिया गांधी ने किसान आंदोलन और जम्हूरियत को कमजोर होने की बात कही। क्या किसी धार्मिक स्थल पर राजनीतिक जंग का संदेश उचित है? क्या सीएम गहलोत ने तैयार किया संदेश? ख्वाजा साहब के उर्स में सोनिया गांधी की चादर पेश करते समय खुद सीएम गहलोत ने कोविड-19 की गाइड लाइन का उल्लंघन किया।

ख्वाजा साहब के सालाना उर्स में देश के प्रमुख व्यक्तियों द्वारा सूफी परंपरा के अनुरूप मजार शरीफ पर चादर पेश करने का रिवाज है। इस मौके पर प्रमुख व्यक्ति अपना संदेश भी जारी करते...

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सोनिया गांधी, राजनाथ सिंह, इंदे्रश कुमार आदि की ओर से भेजी गई चादरें ख्वाजा साहब की मजार पर पेश हुई। सोनिया गांधी की चादर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत स्वयं लेकर आए। अजमेर में उर्स के जायरीन की भीड़ 18 फरवरी को रात 12 बजे से ही जायरीन की रवानगी शुरू हो जाएगी।

अजमेर में ख्वाजा साहब के छह दिवसीय सालाना उर्स का 18 फरवरी को अंतिम दिन रहा। उर्स की रस्मों के मुताबिक रात को दरगाह दीवान जैनुल ओबेदीन की सदारत में महफिल होगी और कुल...

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ट्रेनों को रोकने से आखिर किसी परेशानी हुई? ट्रेनों को रोकने में किसानों से ज्यादा राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता सक्रिय। लेकिन राजस्थान में हनुमान बेनीवाल की पार्टी सक्रिय नहीं।

दिल्ली की सीमाओं पर जब लगातार किसानों की संख्या कम हो रही है, तब 18 फरवरी को देश के अनेक स्थानों पर ट्रेने रोकी गईं। सवाल उठता है कि इन ट्रेनों के रुकने से...

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राहुल गांधी के किसान सम्मेलनों के बाद भी जारी हैं सचिन पायलट की किसान महापंचायतें। 19 फरवरी को चाकसू में होने वाली महापंायत को सफल बनाने में जुटे हुए हैं पायलट समर्थक। राहुल गांधी के दौरे में हुई थी उपेक्षा।

तीन कृषि कानूनों के विरोध में कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी गत 12 व 13 फरवरी को राजस्थान के गंगानगर, हनुमानगढ़, अजमेर और नागौर में किसान सम्मेलन कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश के...

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तो किसान नेता राकेश टिकैत अब पश्चिम बंगाल में भाजपा को हराने का काम करेंगे। टिकैत का यह फैसला लोकतंत्र के हित में है। दिल्ली की सीमाओं पर घटने लगी है किसानों की संख्या। 18 फरवरी को रेल रोको आंदोलन।

दिल्ली की सीमाओं पर बैठे किसानों के प्रमुख नेता राकेश टिकैत ने कहा कि अब वे पश्चिम बंगाल में किसान पंचायतें करेंगे और उन राजनीतिक दलों को सबक सिखाएंगे जो कृषि कानूनों का समर्थन...

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सोनिया गांधी की चादर सीएम अशोक गहलोत पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा अपने सिर पर रखकर ख्वाजा की मजार पर पेश करेंगे। इस बार नहीं होंगे सचिन पायलट। सीएम गहलोत ने अपनी चादर एक दिन पहले ही पेश करवाई। महाराष्ट्र के पूर्व सीएम फडणवीस की ओर से भी उर्स में पेश हुई चादर।

कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी की ओर से 18 फरवरी को राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा अजमेर में ख्वाजा साहब की मजार पर...

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सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आने से पहले ही प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधकों ने अभिभावकों को फीस वसूली का नोटिस थमाया। कोरोना काल की फीस वसूली के नोटिस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी उल्लेख। आखिर गरीब और मध्यमवर्गीय अभिभावक कहां से लाए एक लाख रुपए तक की फीस।

राजस्थान के प्राइवेट स्कूलों के प्रबंधक कोरोना काल (स्कूलें बंद रहीं) की सौ प्रतिशत फीस वसूल सकते हैं या नहीं, इस पर अभी सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निर्णय आना है। अभिभावकों, राज्य सरकार और...

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अजमेर के अधिकांश दिशा सूचक बोर्डों पर कांग्रेस और भाजपा के नेताओं का कब्जा। महावीर सर्किल वाले बोर्ड का बुरा हाल। ख्वाजा उर्स में आने वाले जायरीन परेशान हो रहे हैं, लेकिन जायरीन की परेशानी की फिक्र नहीं है जिला और नगर निगम प्रशासन को। क्या जिम्मेदार अधिकारी दबंग नेताओं से डरते हैं?

अजमेर में इन दिनों ख्वाजा साहब का सालाना उर्स भर रहा है। देश भर से हजारों जायरीन उर्स में शिरकत करने के लिए आए हुए हैं। ऐसे शहर के प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों...

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