- Next story मानसून के धोखा दे देने से अजमेर के आनासागर में मछलियां मर रही है। यदि तीन फीट पानी की निकासी नहीं की जाती तो आनासागर से अचानक निकलने वाले पानी से शहर भर में मुसीबत होती। कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन अपनी जगह है। ============== अजमेर शहर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों हजारों मछलियां प्रतिदिन मर रही है। इसका कारण आनासागर में पानी की कमी होना है। असल में मानसून को देखते हुए प्रशासन ने आनासागर से तीन फीट पानी की निकासी कर दी। प्रशासन को उम्मीद थी कि मानसून की बरसात का पानी आनासागर में आ जाएगा, लेकिन इस बार मानसून ने धोखा दे दिया। बरसात का पानी नहीं आने के कारण आनासागर सूखा रह गया और अब मछलियां मर रही है। लेकिन सवाल उठता है कि यदि बरसात से पूर्व आनासागर को खाली नहीं किया जाता और बरसात का पानी आ जाता, तब उत्पन्न होने वाले हालातों का कौन जिम्मेदार होता? आनासागर का ओवरफ्लो पानी एस्केप चैनल के जरिए शहर से होकर ही निकलता है। प्रतिवर्ष एस्केप चैनल के ओवरफ्लो होने से शहर भर के लोगों को परेशानी होती है। दक्षिण क्षेत्र की निचली बस्तियों में तो एस्केप चैनल का पानी भर ही जाता है, साथ ही शहर के प्रमुख मार्ग भी बंद हो जाते हैं। प्रमुख मार्ग कई दिनों तक बंद रहते हैं। गत वर्ष भी बरसात के दिनों में शहर के लोगों ने आनासागर के पानी से उत्पन्न हुई परेशानियों को झेला था। गत वर्ष की तरह शहरवासियों को परेशानी न हो इसको देखते हुए ही प्रशासन ने मानसून से पहले आनासागर को तीन फीट खाली कर दिया, लेकिन मानसून ने धोखा दे देने से आनासागर खाली रह गया। अब उन स्थानों पर मछलियां मर रही है, जहां पानी की कमी है या जमीन पूरी तरह सूख गई है। मछलियों के मरने से दुर्गंध का माहौल है। जिला कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर नगर निगम के सफाई कर्मियों आनासागर से मरी मछलियों को उठाने का काम कर रहे हैं। निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मृत मछलियों का निस्तारण किया जा रहा है। इसके साथ ही आनासागर में चूना डाला जा रहा है ताकि पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे, सोनगरा ने कहा कि बरसात का थोड़ा पानी आते ही मछलियों के मरने का सिलसिला बंद हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आनासागर में वर्षभर पानी का स्तर बना रहता है, क्योंकि आसपास की कॉलोनियों के पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला जाता है। इसके लिए आनासागर के भराव क्षेत्र में 13 एमएलडी पानी की क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है। विरोध अपनी जगह: आनासागर में मछलियों के मरने को लेकर 16 जुलाई को शहर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया। चूंकि कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए उसे विपक्ष का धर्म निभाना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष को शासन प्रशासन की खामियों की आलोचना करने का अधिकार है। विपक्ष के विरोध का भी प्रशासन पर असर होता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कम से कम मर्यादित आचरण तो करें। मीडिया के कैमरों के सामने हसंगे और ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहेंगे तो सरकार की बदनामी तो होगी ही। ================ कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा आदि जिलों के सरकारी अस्पतालों में हो रही प्रसूताओं की मौत को लेकर 13 जुलाई को जयपुर में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में मंत्री के साथ चिकित्सा विशेषज्ञ भी बैठे और यह जताने की कोशिश की कि प्रसूताओं की मौत चिकित्सकों की लापरवाही, गलत इंजेक्शन, गलत दवा देने आदि के कारणों से नहीं हुई, बल्कि एनीमिया, हाई बीपी, पीपीएच, लीवर किडनी फेल, न्यूटीशियन की कमी जैसे कारणों से हुई है। चिकित्सा मंत्री के संरक्षण में बैठे चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना रहा कि प्रसूताओं की मौत के मामले में दूसरे अस्पतालों से स्थानांतरित होकर आए। यानी प्राथमिक स्तर पर समुचित इलाज नहीं हुआ। खुद मंत्री खींवसर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु दर प्रदेश में 1094 थी जो वर्ष 2025-26 में घटकर 824 रह गई है। इसी प्रकार प्रसूताओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। हो सकता है कि मंत्री और चिकित्सा विशेषज्ञों के दावे सही हो,लेकिन मीडिया के कैमरों के सामने चिकित्सा मंत्री खींवसर को कम से कम मर्यादित आचरण तो करना ही चाहिए। 13 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के बीच ही मंत्री खड़े हो गए और हंसते हुए कहा कि बाकी सवालों के जवाब ब्रेक के बाद। मंत्री ने कहा कि वे भीलवाड़ा जा रहे है, जहां प्रसूताओं की मौत के कारणों का पता लगाएंगे। मंत्री ने हंसते हुए ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहे उससे साफ जाहिर था कि प्रसूताओं की मौत के मामलों में भी मंत्री खींवसर संवेदनशील नहीं है। मंत्री के हंसने और ब्रेक के बाद के शब्दों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के उन आंकड़ों पर पानी फिर गया जो चिकित्सा विशेषज्ञों ने रखे थे। मंत्री खींवसर के इस गैर जिम्मेदाराना आचरण की आलोचना अब राष्ट्रीय मीडिया में भी हो रही है। असल में गजेंद्र सिंह खींवसर चिकित्सा विभाग को लेकर कभी गंभीर नहीं रहे। उनके व्यवहार को लेकर विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक भी खुश नहीं है। जबकि चिकित्सा मंत्री तो बेहद ही गंभीर और संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान के चिकित्सा मंत्री न केवल संवेदनहीन है बल्कि अपने विभाग के प्रति वफादार भी नहीं है। जानकार सूत्रों की माने तो मंत्री खींवसर को लेकर जो शिकायतें प्राप्त हुई है उसी के आधार पर गत दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खींवसर को तलब किया था। ऐसा लगता है कि अमित शाह की हिदायतों का भी खींवसर पर कोई असर नहीं हुआ है। चूंकि चिकित्सा विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकारी अस्पतालों में होने वाली घटनाओं का असर प्रदेश की भाजपा सरकार पर पड़ता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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