- Next story आबादी में तेजी से हुए बदलाव का अध्ययन करने वाली नावलेकर कमेटी जल्द राजस्थान आएगी। सीमावर्ती क्षेत्रों के साथ साथ मेवात, जयपुर, अजमेर आदि का भी दौरा करेगी। ================ देश के कई राज्यों में आबादी तेजी से बढ़ी है। तेजी से आबादी बढ़ने की जांच के लिए केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता में चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी ऐसे प्रदेशों में जाकर आबादी में वृद्धि के कारणों की जांच कर रही है। नावलेकर की अध्यक्षता वाली कमेटी जल्द ही राजस्थान का भी दौरा तय करेगी। जानकारी के मुताबिक कमेटी के सदस्य पाकिस्तान की सीमा से लगे बाड़मेर, जैसलमेर जिलों का तो दौरा करेगी ही साथ ही अलवर, भरतपुर के मेवात क्षेत्र और अजमेर, जयपुर का भी दौरा करेगी। असल में केंद्र सरकार को जानकारी मिली कि इन क्षेत्रों में आबादी में अचानक बदलाव हुआ है। यानी जन्म के आधार पर जनसंख्या नहीं बढ़ी। जनसंख्या बढ़ने का कारण घुसपैठ रहा। अचानक आबादी बढ़ जाने से इन क्षेत्रों में अपराध भी बढऩे लगे हैं। नावलेकर कमेटी ने हाल ही में जम्मू कश्मीर का दौरा किया। कमेटी ने जो आंकड़े जुटाए उसके अनुसार कश्मीर घाटी में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों ने घुसपैठ की। अधिकृत तौर पर 10 हजार रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठिए पाए गए। जबकि अवैध तौर पर रह रहे घुसपैठियों की संख्या बहुत ज्यादा है। ऐसी ही स्थिति राजस्थान में भी बताई जा रही है। हरियाणा की सीमा से लगे अलवर और भरतपुर के मेवा क्षेत्र में बड़ी संख्या में घुसपैठ बताए जा रहे है। अब तो मेवात क्षेत्र साइबर क्राइम का बड़ा केंद्र बन गया है। मेवात में ऐसे इलाके हैं, जहां पुलिस का जाना भी मुश्किल होता है। जयपुर में भी ऐसे कई क्षेत्र विकसित हो गए हैं जहां आबादी तेजी से बढ़ी है। जयपुर के ऐसे इलाकों में भी पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा के साथ जाना पड़ता है। अजमेर में भी घुसपैठियों ने अपनी मजबूत जमीन तैयार कर ली है। यही वजह है कि कई अवसरों पर कुख्यात अपराधी अजमेर से गिरफ्तार हुए हैं। नावलेकर कमेटी के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि घुसपैठियों ने भारत में जरूरी दस्तावेज बनवा लिए है। ऐसे दस्तावेज सबसे ज्यादा पश्चिम बंगाल के है। यानी पश्चिम बंगाल का निवासी होने वाले पहचान पत्र लेकर घुसपैठिए अजमेर तक में बसे हुए है। पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन होने के बाद ऐसे पहचान पत्रों की विस्तृत जांच पड़ताल हो रही है। जानकारी के मुताबिक नावलेकर कमेटी जब आएगी, तब प्रशासन की ओर से व्यापक प्रचार प्रसार किया जाएगा। ताकि जागरूक लोग भी कमेटी के समक्ष उपस्थित होकर जानकारी दे सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 29-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
- Previous story पत्नी यदि सास-ससुर की सेवा न करे और बिना बताए पीहर चली जाए तो यह उसका अधिकार है। पत्नी से ससुराल में सेवा की अपेक्षा क्यों की जाती है? पति के माता-पिता की सेवा का दायित्व बहु का नहीं, पुत्र-पुत्री का है। कर्नाटक हाईकोर्ट का आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल। ================= कर्नाटक हाईकोर्ट के न्यायाधीश चिलकुर सुमालया का एक आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल माना जा रहा है। न्यायाधीश सुमालया के समक्ष एक युवक ने याचिका दायर की कि वह अपनी पत्नी को भरण पोषण की राशि नहीं दे सकता क्योंकि उसकी पत्नी उसके माता पिता की सेवा नहीं करती और बिना बताए पीहर चली जाती है। चूंकि पत्नी ससुराल में अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर रही है, इसलिए उसे अलग होने का भरण पोषण राशि का अधिकार नहीं है। इस याचिका पर न्यायाधीश सुमाया ने कहा कि पत्नी से ससुराल में यह अपेक्षा क्यों की जाती है कि वह सास-ससुर की सेवा करें? पत्नी को अपने पीहर जाने के लिए पति या ससुराल के किसी अन्य सदस्य से अनुमति लेने की जरूरत भी नहीं है। पत्नी जब चाहे तब अपने पीहर जा सकती है। जस्टिस सुमायला ने कहा कि माता पिता की सेवा का दायित्व पुत्र-पुत्री का है। सेवा के लिए बहु से अपेक्षा नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विवाह के बाद ससुराल में आने वाली युवती को अपने निर्णय लेने का स्वतंत्र अधिकार है। पत्नी का यह मतलब नहीं है कि वह किसी के नियंत्रण में काम करे। न्यायाधीश सुमालया ने अपने आदेश में पीहर में रह रही पत्नी को भरण पोषण की राशि देने का आदेश भी दिया। न्यायाधीश सुमालया का आदेश अपनी जगह है। हो सकता है कि उन्होंने महिला की स्वतंत्रता के अधिकारों को देखते हुए आदेश दिया हो, लेकिन कोर्ट का यह आदेश भारत की परिवार व्यवस्था में सीधा दखल हैै। भले ही कोई कानून न माने लेकिन जो भारतीय परिवार व्यवस्था है उसमें ससुराल में सास-ससुर ही माता पिता की भूमिका में होते हैं। यह सही है कि एक युवती 20-15 वर्ष अपने माता पिता के साथ रहने के बाद दूसरे परिवार में बहुत की भूमिका में आ जाती है, इसलिए उसे भी ससुराल में मान सम्मान मिलना ही चाहिए। वैसे भी अब परिवारों की सोच में बदलाव हो रहा है। पीहर जाने के लिए कोई बहुत वाकई अनुमति नहीं लेती है। सास-ससुर को तो सिर्फ यह बताया जाता है कि बहु कितने दिन के लिए पीहर जा रही है। इसके साथ ही अधिकांश सास ससुर या तो अपने बैअे और बहुत से अलग रह रहे हैं या फिर सेवा की अपेक्षा नहीं रखते। हर सास-ससुर यही चाहता है कि उसका बेटा और बहुत स्वतंत्रता के साथ आराम से रहे। कोई भी सास-ससुर अपनी बहुत से सेवा की अपेक्षा नहीं रखता। जब बेटे में ही सेवाभाव नहीं है तो फिर बहुत से अपेक्षा कैसे की जा सकती है। जस्टिस सुमालया माने या नहीं, लेकिन अब परिवार व्यवस्था में भी बहुत बदलाव आ गया है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 25-08-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511
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