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मानसून के धोखा दे देने से अजमेर के आनासागर में मछलियां मर रही है। यदि तीन फीट पानी की निकासी नहीं की जाती तो आनासागर से अचानक निकलने वाले पानी से शहर भर में मुसीबत होती। कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन अपनी जगह है। ============== अजमेर शहर के बीचों बीच बने आनासागर में इन दिनों हजारों मछलियां प्रतिदिन मर रही है। इसका कारण आनासागर में पानी की कमी होना है। असल में मानसून को देखते हुए प्रशासन ने आनासागर से तीन फीट पानी की निकासी कर दी। प्रशासन को उम्मीद थी कि मानसून की बरसात का पानी आनासागर में आ जाएगा, लेकिन इस बार मानसून ने धोखा दे दिया। बरसात का पानी नहीं आने के कारण आनासागर सूखा रह गया और अब मछलियां मर रही है। लेकिन सवाल उठता है कि यदि बरसात से पूर्व आनासागर को खाली नहीं किया जाता और बरसात का पानी आ जाता, तब उत्पन्न होने वाले हालातों का कौन जिम्मेदार होता? आनासागर का ओवरफ्लो पानी एस्केप चैनल के जरिए शहर से होकर ही निकलता है। प्रतिवर्ष एस्केप चैनल के ओवरफ्लो होने से शहर भर के लोगों को परेशानी होती है। दक्षिण क्षेत्र की निचली बस्तियों में तो एस्केप चैनल का पानी भर ही जाता है, साथ ही शहर के प्रमुख मार्ग भी बंद हो जाते हैं। प्रमुख मार्ग कई दिनों तक बंद रहते हैं। गत वर्ष भी बरसात के दिनों में शहर के लोगों ने आनासागर के पानी से उत्पन्न हुई परेशानियों को झेला था। गत वर्ष की तरह शहरवासियों को परेशानी न हो इसको देखते हुए ही प्रशासन ने मानसून से पहले आनासागर को तीन फीट खाली कर दिया, लेकिन मानसून ने धोखा दे देने से आनासागर खाली रह गया। अब उन स्थानों पर मछलियां मर रही है, जहां पानी की कमी है या जमीन पूरी तरह सूख गई है। मछलियों के मरने से दुर्गंध का माहौल है। जिला कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर नगर निगम के सफाई कर्मियों आनासागर से मरी मछलियों को उठाने का काम कर रहे हैं। निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में मृत मछलियों का निस्तारण किया जा रहा है। इसके साथ ही आनासागर में चूना डाला जा रहा है ताकि पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहे, सोनगरा ने कहा कि बरसात का थोड़ा पानी आते ही मछलियों के मरने का सिलसिला बंद हो जाएगा। उन्होंने बताया कि आनासागर में वर्षभर पानी का स्तर बना रहता है, क्योंकि आसपास की कॉलोनियों के पानी को शुद्ध कर आनासागर में डाला जाता है। इसके लिए आनासागर के भराव क्षेत्र में 13 एमएलडी पानी की क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट लगा रखा है। विरोध अपनी जगह: आनासागर में मछलियों के मरने को लेकर 16 जुलाई को शहर कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया। चूंकि कांग्रेस विपक्ष में है, इसलिए उसे विपक्ष का धर्म निभाना चाहिए। लोकतंत्र में विपक्ष को शासन प्रशासन की खामियों की आलोचना करने का अधिकार है। विपक्ष के विरोध का भी प्रशासन पर असर होता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 17-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आनासागर में आने वाले 13 में से 10 नालों का पानी ट्रीट (शुद्ध) होकर ही गिर रहा है। 7 एमएलडी क्षमता वाला ट्रीटमेंट प्लांट 8 अगस्त से शुरू हो जाएगा। गंदे पानी को ट्रीट करने की प्रक्रिया को अजमेर का कोई भी नागरिक प्लांट पर आकर देख सकता है। मछलियों को बचाने के लिए आनासागर में चूना डाला और फाउंटेन भी चले। कलेक्टर लोकबंधु के निर्देश पर प्रभावी कार्यवाही ================ अजमेर के आनासागर में मर रही मछलियों, पानी में ऑक्सीजन की कमी ओर नालों का गंदा पानी गिरने की लोकर 13 जुलाई को मैंने ब्लॉग संख्या 12353 लिखा था। इस ब्लॉग पर जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश पर नगर निगम की कार्यवाहक आयुक्त नित्या के (आईएएस) ने प्रभावी कार्यवाही करवाई। आनासागर में जिन स्थानों पर मरी हुई मछलियां पड़ी थी, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया गया है ताकि कुत्ते और मांसाहारी पक्षी गंदगी न फैलाए। आनासागर के पानी में ऑक्सीजन की मात्रा को बढ़ाने के लिए नाव से बड़ी मात्रा में चूना डाला गया है। इतना ही नहीं फाउंटेन चलाकर ऑक्सीजन को बढ़ाने के प्रयास भी किए गए है। आनासागर के संरक्षण से जुड़े नगर निगम के अधीक्षण अभियंता मनोहर सोनगरा ने बताया कि जिन स्थानों पर पानी का अभाव रहा, वहां मछलियां मरी है, लेकिन भविष्य में मछलियों के मरने की घटना न हो इसके लिए अब प्रभावी कदम उठाए हैं। आवश्यकता होने पर आनासागर में सूखे चूने को और डलवाया जाएगा। उन्होंने बताया कि चूने में मिक्स पदार्थों से पानी में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है। इस बात का भी ख्याल रखा जा रहा है कि आनासागर कि किनारे सूखी जमीन पर समुचित साफ सफाई हो, ताकि आवरा जानवर गंदगी न फैलाए। अभी जो कचरा पड़ा है, उसे भी युद्ध स्तर पर उठाने का काम किया जा रहा है। नालों का पानी ट्रीट हो रहा है: जिला कलेक्टर लोक बंधु के निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि आनासागर में नालों का पानी ट्रीट शुरू कर ही डाला जाए। सीवरेज और नालों के गंदे पानी को शुद्ध करने के संबंध में नगर निगम के अधिशासी अभियंता (सीवरेज योजना) रविंद्र जैन ने बताया कि जिन 13 नालों का पानी आनासागर में आता है, उनमें से 10 नालों के पानी को आनासागर के किनारे लगे ट्रीटमेंट प्लांट तक लाया जाता है। गंदे पानी को शुद्ध करने के बाद ही आनासागर में छोड़ा जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट में पानी की शुद्धता के जो पैरामीटर निर्धारित कर रखे हैं, उसमें एक लीटर पानी में 2.5 मिलीग्राम ऑक्सीजन की मात्रा होनी चाहिए। इस पैरामीटर को आनासागर में पूरा किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त और जो तकनीकी मापदंड है, उन्हें भी पूरा किया जा रहा है। मौजूदा प्लांट की क्षमता प्रतिदिन 13 एमएलडी पानी को शुद्ध करने की है। अभी 11 एमएलडी से ज्यादा पानी प्रतिदिन शुद्ध किया जा रहा है। एक्सईएन जैन ने प्लांट पर खड़े होकर कांच के दो बार अपने हाथ में लिए एक जार में गंदा पानी और दूसरे जार में प्लांट में शुद्ध हुआ पानी भरा। और यह बताने का प्रयास किया कि आनासागर में कितना शुद्ध पानी छोड़ा जा रहा है। जैन ने कहा कि आनासागर का ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह कम्प्यूटराइज्ड है। कम्प्यूटर से ही प्लांट की इकाइयों को संचालित किया जाता है। ऐसे में गंदे पानी को आनासागर में नहीं छोड़ा जा सकता है। ट्रीटमेंट प्लांट की इस पारदर्शी प्रक्रिया को अजमेर का कोई भी नागरिक आकर देख सकता है। उन्होंने कहा कि जब प्लांट पर पानी को मापदंड के अनुरूप शुरू किया जा हा है तो निगम प्रशासन के पास छिपाने को कुछ भी नहीं है। उन्होंने माना कि मौजूदा समय में काजी का नाला, नागफनी का नाला और महावीर कॉलोनी के नाले के पानी को शुद्ध नहीं किया जा रहा है। इन नालों का पानी फिलहाल पाइपों में ही संग्रहित रखा गया है। उन्होंने बताया कि मौजूदा प्लांट के पास ही 7 एमएलडी की क्षमता वाला एक और प्लांट लग रहा है। इन नए प्लांट में भी 8 अगस्त से गंदे पानी को ट्रीट करने का काम शुरू हो जाएगा। नए प्लांट के शुरू होने के बाद आनासागर में आने वाले सभी 13 नालों के पानी को शुद्ध किया जा सकेगा। जैन ने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि आनासागर के ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़ी सीवरेज लाइनें अब सुचारू काम कर रही है। इसलिए इस क्षेत्र में सीवरेज चैंबर के ओवरफ्लो होने की घटनाएं नहीं हो रही। यानी घरों से निकलने वाला सीवरेज का पानी पाइप लाइन के जरिए ट्रीटमेंट प्लांट तक पहुंच रहा है। जैने ने आनासागर के आसपास बसी कॉलोनियों के लोगों से भी अपील की कि वेएक बार एसटीपी प्लांट पर आकर पानी के शुद्ध होने की प्रक्रिया को देखे। आनासागर में साफ सफाई और ट्रीटमेंट प्लांट की प्रक्रिया से जुड़े फोटोज मेरे फेसबुक पेज पर देखे जा सकते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की मौत पर चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कम से कम मर्यादित आचरण तो करें। मीडिया के कैमरों के सामने हसंगे और ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहेंगे तो सरकार की बदनामी तो होगी ही। ================ कोटा, बीकानेर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा आदि जिलों के सरकारी अस्पतालों में हो रही प्रसूताओं की मौत को लेकर 13 जुलाई को जयपुर में राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस कॉन्फ्रेंस में मंत्री के साथ चिकित्सा विशेषज्ञ भी बैठे और यह जताने की कोशिश की कि प्रसूताओं की मौत चिकित्सकों की लापरवाही, गलत इंजेक्शन, गलत दवा देने आदि के कारणों से नहीं हुई, बल्कि एनीमिया, हाई बीपी, पीपीएच, लीवर किडनी फेल, न्यूटीशियन की कमी जैसे कारणों से हुई है। चिकित्सा मंत्री के संरक्षण में बैठे चिकित्सा विशेषज्ञों का यह भी कहना रहा कि प्रसूताओं की मौत के मामले में दूसरे अस्पतालों से स्थानांतरित होकर आए। यानी प्राथमिक स्तर पर समुचित इलाज नहीं हुआ। खुद मंत्री खींवसर ने बताया कि वर्ष 2023-24 में मातृ मृत्यु दर प्रदेश में 1094 थी जो वर्ष 2025-26 में घटकर 824 रह गई है। इसी प्रकार प्रसूताओं की मृत्यु दर में भी कमी आई है। हो सकता है कि मंत्री और चिकित्सा विशेषज्ञों के दावे सही हो,लेकिन मीडिया के कैमरों के सामने चिकित्सा मंत्री खींवसर को कम से कम मर्यादित आचरण तो करना ही चाहिए। 13 जुलाई को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों के बीच ही मंत्री खड़े हो गए और हंसते हुए कहा कि बाकी सवालों के जवाब ब्रेक के बाद। मंत्री ने कहा कि वे भीलवाड़ा जा रहे है, जहां प्रसूताओं की मौत के कारणों का पता लगाएंगे। मंत्री ने हंसते हुए ब्रेक के बाद जैसे शब्द कहे उससे साफ जाहिर था कि प्रसूताओं की मौत के मामलों में भी मंत्री खींवसर संवेदनशील नहीं है। मंत्री के हंसने और ब्रेक के बाद के शब्दों से प्रेस कॉन्फ्रेंस के उन आंकड़ों पर पानी फिर गया जो चिकित्सा विशेषज्ञों ने रखे थे। मंत्री खींवसर के इस गैर जिम्मेदाराना आचरण की आलोचना अब राष्ट्रीय मीडिया में भी हो रही है। असल में गजेंद्र सिंह खींवसर चिकित्सा विभाग को लेकर कभी गंभीर नहीं रहे। उनके व्यवहार को लेकर विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक भी खुश नहीं है। जबकि चिकित्सा मंत्री तो बेहद ही गंभीर और संवेदनशील होना चाहिए, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि राजस्थान के चिकित्सा मंत्री न केवल संवेदनहीन है बल्कि अपने विभाग के प्रति वफादार भी नहीं है। जानकार सूत्रों की माने तो मंत्री खींवसर को लेकर जो शिकायतें प्राप्त हुई है उसी के आधार पर गत दिनों केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खींवसर को तलब किया था। ऐसा लगता है कि अमित शाह की हिदायतों का भी खींवसर पर कोई असर नहीं हुआ है। चूंकि चिकित्सा विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकारी अस्पतालों में होने वाली घटनाओं का असर प्रदेश की भाजपा सरकार पर पड़ता है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 14-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अदृश्य शक्ति ने बीकानेर में गैंगस्टर रोहित गोदारा के आलीशान मकान को मिट्टी में मिलाया। अपराधियों के खिलाफ ऐसी तरकीब तो यूपी के सीएम योगी के पास भी नहीं होगी। ============= गैंगस्टर रोहित गोदारा का नाम इन दिनों देशभर में चर्चित हे। उसके गुर्गे देश विदेश में बैठकर वसूली का काम कर रहे हैं। गैंग के कई सदस्य गिरफ्तार भी हुए हैं। आए दिन अखबारों में रोहित गोदारा के नाम से धमकियां मिलने की खबरें छप रही है। कारोबारियों में रोहित गोदारा के नाम का भय है। ऐसे माहौल में ही रोहित गोदारा के राजस्थान के बीकानेर के लूणकरणसर स्थित एक मकान मिट्टी में मिल गया है। सरकारी दस्तावेज में यह आलीशान मकान रोहित के पिता संत दास स्वामी के नाम दर्ज है। 14 जुलाई को इस मकान को किसने तोड़ा यह अभी तक भी पता नहीं चला है। बीकानेर की किसी भी सरकारी एजेंसी ने मकान तोड़ने की जिम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस का कहना है कि यदि कोई शिकायत प्राप्त होगी तो मकान तोड़ने वाले का पता लगाया जाएगा। भले ही अभी रोहित गोदारा के परिवार की ओर से कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई गई है। लेकिन जिस तरह से गैंगस्टर के मकान को मिट्टी में मिलाया गया है, उसकी चर्चा राजस्थान भर में हो रही है। ऐसा नहीं की रात के अंधेरे में गुपचुप तरीके से गैंगस्टर का मकान तोड़ दिया गया हो। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दिन दहाड़े जेसीबी आई और रोहित गोदारा के मकान को मिट्टी में मिला दिया। किसी ने भी मकान को तोड़ने पर ऐतराज नहीं किया। सब जानते हैं कि राजस्थान में मौजूदा समय में भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में भाजपा की सरकार चल रही है। 13 जुलाई को ही मुख्यमंत्री शर्मा ने प्रदेश के रेंज आईजी और पुलिस अधीक्षकों से वीसी के जरिए संवाद किया। सीएम ने कहा कि अपराधियों के खिलाफ ऐसी सख्त कार्यवाही की जाए, जिससे उनकी रूह कांप उठे। सीएम ने यह भी कहा कि अपराध गठित होने पर रेंज आईजी और पुलिस अधीक्षक को जिम्मेदार माना जाएगा। 13 जुलाई को सीएम ने अपराधियों की रूह कांपने की बात कही तो 14 जुलाई को बीकानेर में गैंगस्टर रोहित गोदारा के आलीशान मकान को मिट्टी में मिलाने की खबर आई। माना जा रहा है कि किसी अदृश्य शक्ति ने रोहित गोदारा और उनके गुर्गे की रूह को कंपा दिया। राजस्थान में अपराधियों के खिलाफ जो अदृश्य शक्ति का उपयोग किया गया है, वैसी तरकीब तो योगी आदित्यनाथ के उत्तर प्रदेश में भी देखने को नहीं मिली है। यह सही है कि यूपी पुलिस अपराधियों के खिलाफ कभी ऑल आउट तथा कभी लंगड़ा अभियान चलाती है। इन सब की जिम्मेदारी यूपी सरकार की होती है। कई बार सरकार को अदालतों में जवाब भी देना पड़ा है। लेकिन राजस्थान में अपराधियों के खिलाफ जो अदृश्य शक्ति की तरकीब अपनाई गई, इसमें किसी को भी जवाब देने की जरूरत नहीं है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

तो क्या राजस्थान में भजन सरकार का खजाना खाली हो गया है? निजी स्कूलों को भी आरटीई के तहत फीस पुनर्भरण की राशि नहीं मिल रही। सेवा निवृत्त हो रहे कार्मिक भी भुगतान के इंतजार में है। ============= 15 जुलाई को अजमेर के कलेक्ट्रेट पर राजस्थान निजी शिक्षण संस्था संघर्ष समिति की ओर से धरना प्रदर्शन किया गया। यह धरना प्रदर्शन निजी स्कूलों को आरटीई के तहत फीस पुनर्भरण राशि का भुगतान नहीं होने के विरोध में किया गया। समिति के अध्यक्ष कैलाश चंद शर्मा ने बताया कि अजमेर शहर और उसके पास की 430 निजी स्कूलों का करीब चार करोड़ रुपए बकाया है। निजी स्कूल सरकार के निर्देशों के मुताबिक गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्रवेश देते हैं। इन विद्यार्थियों को आरटीई के तहत प्रवेश दिया जाता है और फीस का पुनर्भरण सरकार की ओर से होता है। अजमेर जैसी स्थिति पूरे प्रदेश में है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरकार के खजाने में पैसा नहीं है। इसलिए फीस पुनर्भरण राशि का भुगतान निजी स्कूलों को नहीं हो रहा है। शर्मा ने बताया कि अजमेर की 430 निजी स्कूलों में 17 हजार से अधिक विद्यार्थी आरटीई के तहत अध्ययन कर रहे हैं। अब यदि निजी स्कूलों को विद्यार्थियों की फीस ही नहीं मिलेगी तो फिर स्कूल का संचालन कैसे होगा। सरकार का दबाव रहता है कि आरटीई वाले विद्यार्थियों को भी स्कूल की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाए, लेकिन वहीं सरकार फीस पुनर्भरण की राशि नहीं दे रही है। पूरे प्रदेश में करोड़ों रुपया बकाया है। यदि सरकार के खजाने में पैसा नहीं है तो निजी स्कूलों पर आरटीई के तहत दबाव क्यों बनाया जाता है? एक और प्रदेश भर के निजी स्कूल बकाया भुगतान को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं तो वहीं सेवानिवृत्त हो रहे कर्मचारियों को भी पीएफ आदि की राशि नहीं मिल रही है। कायदे से तो सेवानिवृत्ति वाले दिन ही कर्मचारी को सभी प्रकार का भुगतान हो जाना चाहिए, लेकिन सरकार के खजाने में पैसा नहीं होने के कारण कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी भुगतान के लिए 6 माह तक का इंतजार करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं सरकारी काम करने वाले ठेकेदारों को भी भुगतान नहीं हो रहा। जलदाय विभाग में पेयजल की सप्लाई को संभालने वाले ठेकेदार भी बकाया भुगतान के लिए विरोध कर रहे हैं। सरकार के अधिकांश विभागों के ठेकेदारों को समय पर भुगतान नहीं हो रहा है। निजी स्कूलों के बकाया भुगतान के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9079873621 पर कैलाश चंद शर्मा से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आखिर जिस बात का डर था वो ही हुआ। होर्मुज में ईरान का दो तेल टैंकरों पर हमला। इसमें एक भारतीय नाविक की मौत, 9 घायल। मोदी सरकार भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। नाविकों की सुरक्षा विदेशी कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है। ============= 11 जुलाई को होर्मुज मार्ग से गुजर रहे साइप्रस के झंडे वाले जहाज पर ईरान की ओर से हमला किया गया। इस हमले में जहाज पर सवार 10 भारतीय नाविकों को बचा लिया गया, लेकिन एक नाविक अभी तक लापता है। इस घटना के बाद 13 जुलाई को मैंने एक ब्लॉग लिखा, जिसमें भारत की मोदी सरकार से भारतीय नाविकों की सुरक्षा का आग्रह किया गया था। इस ब्लॉग को मैंने बताया था कि समुद्र मार्ग पर जितने भी जहाज चल रहे हैं, इनमें अधिकांश में भारतीय नाविक तैनात है। जहाज और गैस तेल टैंकर किसी भी विदेशी कंपनी का हो, लेकिन उस पर अधिकतर नाविक भारतीय ही होंगे, ऐसे में यदि किसी भी जहाज पर हमला होता है तो सबसे ज्यादा भारतीय नाविका ही प्रभावित होंगे। इसी ब्लॉग में मैंने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध में भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात लिखी, लेकिन जिस बात का डर था वही हुआ। 14 जुलाई को होर्मुज मार्ग से गुजर रहे यूएई के दो तेल टैंकरों पर ईरान ने भीषण हमला किया। एक तेल टैंकर पर 12 और दूसरे टैंकर पर 18 भारतीय नाविक सवार थे। 30 भारतीय नाविकों में से एक की मौत हो गई तथा 9 घायल है, जिनका अब ओमान के अस्पताल में इलाज चल रहा है। जब यह बात सार्वजनिक है कि जहाजों पर भारतीय नाविक कार्यरत है, तब भारत की मोदी सरकार की जिम्मेदारी है कि वह भारतीय नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करे। यह सही है कि अधिकांश जहाज और टैंकर विदेशी कंपनियों के हैं, लेकिन भारतीय नाविकों की सुरक्षा विदेशी कंपनियों के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती है। हर भारतीय नाविक की सुरक्षा की जिम्मेदारी भारत सरकार की है। सरकार को यह पता लगाना चाहिए कि होर्मुज क्षेत्र में जो जहाज खड़े हैं, उनमें कितने भारतीय नाविक कार्यरत है। ऐसे नाविकों से संपर्क कर उनकी सुरक्षित भारत वापसी के इंतजाम किए जाने चाहिए। हालांकि मोदी सरकार ने ईरान के दिल्ली स्थित दूतावास के अधिकारियों को बुलाकर विरोध जताया है। लेकिन इस विरोध का ईरान पर कोई असर नहीं होगा। ईरान कह सकता है कि हम भारतीय जहाजों पर हमला नहीं कर रहे। लेकिन दूसरे देशों के जहाजों पर अधिकांश नाविक भारतीय ही है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 15-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

अजमेर के निकट ऊंटड़ा में होगा मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन। पंजीयन 15 जुलाई से। सामाजिक संस्था इदरा-ए- दावातुल हक की ओर से 65 हजार रुपए का घरेलू सामान और 21 हजार रुपए का सरकारी अनुदान प्रत्येक जोड़े को मिलेगा। ================ अजमेर के निकट ऊंटड़ा गांव में अगले वर्ष 6 जनवरी 2027 को मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इसके लिए 15 जुलाई से 15 अगस्त 2026 तक पंजीयन किया जाएगा। सामाजिक संस्था इदारा-ए-दावातुल हक के मौलाना अयूम कासमी ने बताया कि संस्था की ओर से पिछले सात वर्षों से प्रति वर्ष मुस्लिम सामूहिक निकाह सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। इस वर्ष भी 6 जनवरी 2027 को यह सम्मेलन होगा। सम्मेलन में पंजीयन करवाने वाले जोड़ों को संस्था की ओर से करीब 65 हजार रुपए का घरेलू सामान भी दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों पक्षों की ओर से आए मेहमानों के भोजन की भी निशुल्क व्यवस्था संस्था की ओर से की जाएगी। उन्होंने बताया कि इस सामूहिक निकाह वाले दिन ही निकाह का सर्टिफिकेट भी उपलब्ध करवा दिया जाएगा। इस सर्टिफिकेट के आधार पर ही सरकार से 21 हजार रुपए का अनुदान भी लिया जा सकेगा। सरकारी अनुदान दिलवाने में संस्था का पूरा सहयोग रहेगा। उन्होंने बताया कि समाज में निकाह पर अधिक खर्च होने लगा है, इसलिए संस्था प्रतिपक्ष मुस्लिम समाज के जरूरतमंद परिवारों के लिए सामूहिक निकाह का आयोजन कर रहा है। सामूहिक निकाह वाले दिन देश भर के मुस्लिम विद्वान भी अपने विचारों को रखते हैं। मौलाना कासमी ने जरूरतमंद परिवारों से अपील की है कि वे 15 अगस्त तक पंजीयन करवा ले क्योंकि 15 अगस्त के बाद पंजीयन करना संभव नहीं होगा। इस सामूहिक निकाह के बारे में और अधिक जानकारी मोबाइल नंबर 9950578600 पर मौलाना अयूब कासमी तथा 9636434373 पर मोहम्मद अलताफ से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

आलोचनाओं का स्वयं मौका देते हैं राहुल गांधी। भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। ================ कांग्रेस के सर्वोच्च नेता और लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी एक बार फिर विदेश दौरे पर है। आमतौर पर विदेश में राहुल गांधी की गतिविधियां सार्वजनिक नहीं होती। राहुल गांधी के बार बार विदेश दौरों को लेकर भाजपा और अन्य दलों के नेता विरोध करते हैं। असल में आलोचनाओं का अवसर राहुल गांधी स्वयं देते हैं। बार बार विदेश चले जाने से ऐसा प्रदर्शित होता है कि राहुल गांधी भारत में पार्ट टाइम राजनीति करते हैं। राहुल गांधी सिर्फ कांग्रेस के नेता ही नहीं है, बल्कि लोकसभा में पूरे विपक्ष के नेता भी है। ऐसे में राहुल गांधी की जिम्मेदारी है कि वे सरकार की नीतियों को लेकर विपक्ष के साथ आंदोलन करे। यह बताए कि मोदी सरकार की नीतियों कैसे जन विरोधी है, लेकिन राहुल गांधी बार बार जिस तरह विदेश यात्रा पर चले जाते हैं, उस विपक्षी दल भी एकजुट नहीं हो पाते। राहुल गांधी के प्रतिपक्ष का नेता होते हुए ही पश्चिम बंगाल की टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा के सांसदों ने अलग दल बना लिया। इसी प्रकार महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भी दूसरी बार बड़ी बगावत हो गई। सवाल उठता है कि क्या प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्ष को एकजुट रखने की जिम्मेदारी राहुल गांधी की नहीं है? पंजाब में भी जिस तरह आम आदमी पार्टी में बगावत हुई उससे राहुल गांधी के प्रतिपक्ष के नेता होने पर सवाल उठते हैं। आमतौर पर देखा गया है कि राहुल गांधी भारत में थोड़ी राजनीतिक गतिविधियां करने के बाद विश्राम के लिए विदेश चले जाते हैं। भारत में 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है। अच्छा होता कि राहुल गांधी प्रतिपक्ष के नेता के नाते विपक्षी दलों के साथ बैठकर सरकार के विरुद्ध कोई रणनीति बनाते, लेकिन मानसून सत्र शुरू होने से पहले राहुल गांधी विदेश चले गए। देश के युवा वर्ग को मोदी सरकार के विरुद्ध जगाने के लिए राहुल गांधी ने छात्रों की गूंज अभियान शुरू किया था। कोटा के बाद राहुल को बिहार के पटना में दूसरा कार्यक्रम करना था, लेकिन राहुल गांधी का अब पटना वाला कार्यक्रम रद्द हो गया है। कहा जा रहा है कि पटना की जगह देहरादून में कार्यक्रम होगा। असल में राहुल गांधी के बार बार विदेश चले जाने के कारण कांग्रेस संगठन में भी असमंजस की स्थिति रहती है। लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है, लेकिन इसके लिए विपक्षी नेताओं को जन आंदोलन करने पड़ेंगे। जन आंदोलन तभी सफल हो सकते हैं, जब विरोधी दल के नेता वर्षभर सक्रिय रहे। बार बार विदेश जाने से भारत में मोदी सरकार के विरुद्ध मजबूत विपक्षी दल खड़े नहीं हो सकते। राहुल गांधी को इस मामले में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव से सीख लेनी चाहिए। यादव वर्ष भर अपने ही उत्तर प्रदेश में रहकर विपक्षी नेता की भूमिका निभाते हैं। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब करने वाले नेता और मीडिया अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के भीषण युद्ध को देख लें। ================ अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जो युद्ध चल रहा है, उसमें 11 जुलाई को एक नया मोड़ तब आ गया, जब खाड़ी के मुस्लिम देश कुवैत, बहरीन आदि से भी कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान पर भीषण हमले शुरू हो गए है। यह सही है कि खाड़ी देशों में अमेरिका के सैन्य ठिकाने हैं, लेकिन अब तक खाड़ी देशों से ईरान पर बड़े हमले नहीं किए जा रहे थे। रणनीति के तहत अरब सागर में खड़े अमेरिकी जहाजों और इजरायल से मिसाइलों के जरिए ही ईरान पर हमले किए जा रहे थे। लेकिन अब अमेरिका ने अपने समर्थक खाड़ी के मुस्लिम देशों को भी युद्ध करने के लिए मैदान में खड़ा कर दिया है। 11 जुलाई से अधिकांश खाड़ी देशों से ईरान पर ताबड़तोड़ हमले किए जा रहे है। ईरान पर खाड़ी देशों से हमले होने के बाद अमेरिका को युद्ध में मजबूती मिली है। खाड़ी देशों से हमला करना अमेरिका के लिए आसान काम है। हालांकि ईरान ने भी खाड़ी के मुस्लिम देशों पर जवाबी कार्यवाही की है। जो नेता और मीडिया भारत में चढ़ावा चोरी के प्रकरण में अयोध्या के राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अब खाड़ी के मुस्लिम देशों और कट्टरपंथी इस्लामिक देश ईरान के बीच भीषण युद्ध को देख लेना चाहिए। चढ़ावा चोरी की आड़ में सुनियोजित तरीके से भारत की सनातन संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जबकि अयोध्या में मंदिर का निर्माण पांच सौ वर्ष के संघर्ष के बाद हो पाया है। अयोध्या का राम मंदिर सीमेंट कंक्रीट की इमारत नहीं बल्कि भारत के सौ करोड़ से ज्यादा हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। भगवान राम के जन्मस्थान पर मंदिर बनने से हर सनातनी गौरवान्ति है। जो नेता और मीडिया चढ़ावा चोरी की आड़ में राम मंदिर की छवि खराब कर रहे हैं, उन्हें अपनी हरकतों से बाज आना चाहिए। दुनिया में सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जो सभी धर्मों और विचारों को साथ लेकर चलता है। जबकि वहीं अन्य धर्मों में एक ही धर्म के लोगों में जबरदस्त विरोधाभास है और इसका उदाहरण खाड़ी के देशों और ईरान के बीच हो रहा युद्ध है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 12-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511

कांग्रेस की तरह भाजपा के शासन में भी शिक्षकों के तबादले हो रहे हैं। यदि नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले होने हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति में आने की छूट दी जाए-विजय सोनी शिक्षक नेता। ================ राजस्थान में स्कूली शिक्षा के शिक्षकों के तबादले बड़ी संख्या में हुए है। ये तबादले किसी नीति के बगैर हुए है। तबादलों में भाजपा के नेताओं की सिफारिशों को प्राथमिकता दी गई है। यहां तक कि भाजपा के जयपुर स्थित मुख्यालय में शिक्षकों ने अपने तबादले का प्रार्थना पत्र जमा करवाया है। सरकार में बैठे मंत्रियों ने भी माना है कि हजारों शिक्षक डिजायर के लिए उनके पास आ रहे हैं। यानी शिक्षकों के तबादले जिस प्रकार कांग्रेस के शासन में होते थे, उसी प्रकार भाजपा के शासन में भी हो रहे हैं। कांग्रेस के शासन में भाजपा के नेता तबादले में राजनीतिक द्वेषता के आरोप लगाते थे। वही अब कांग्रेस के नेता राजनीतिक द्वेषता से तबादला करने के आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का तो कहना है कि संघ और भाजपा की विचारधारा वाले शिक्षकों को उनकी इच्छानुसार पोस्टिंग दी गई है। जबकि कांग्रेस विचारधारा वाले शिक्षकों का तबादला दूर कर दिया गया है। डोटासरा ने अपने निर्वाचन क्षेत्र लक्ष्मणगढ़ (सीकर) के तबादलों के आंकड़े भी प्रस्तुत किए हैं। राजनीति में आने की छूट मिले: राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्ण) के प्रदेश अध्यक्ष विजय सोनी ने कहा कि यदि नेताओं की सिफारिश से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीति करने की छूट दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक ओर सेवा नियमों में उल्लेख है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी राजनीतिक गतिविधियों में भाग नहीं लेगा, लेकिन अब जब नेताओं की सिफारिशों से ही तबादले हो रहे हैं तो फिर शिक्षकों को भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने की छूट मिलनी चाहिए। वैसे भी शिक्षक सभी प्रकार के कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार यूनिवर्सिटी के शिक्षकों को राजनीति में भाग लेने की छूट है, उसी प्रकार स्कूली शिक्षकों को भी छूट मिलनी चाहिए। विजय ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने भी बगैर कोई नीति बनाए शिक्षकों के तबादले किए और अब भाजपा के शासन में भी बगैर नीति के ही तबादले हो रहे है। एक ओर कहा जा रहा है कि तृतीय श्रेणी के शिक्षकों के तबादले पर रोक है, लेकिन वही इस श्रेणी के कंप्यूटर अनुदेशकों के तबादले धड़ल्ले से किए जा रहे है। तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादला न करने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इन शिक्षकों की वरिष्ठता जिला स्तर पर निर्धारित होती है। यदि एक जिले से दूर जिले में तबादला किया गया तो वरिष्ठता प्रभावित होगी, लेकिन इसके उलट वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले किए गए है। जबकि वरिष्ठ अध्यापकों की वरिष्ठता संभाग स्तर पर निर्धारित होती है। वरिष्ठ अध्यापकों के तबादले एक संभाग से दूसरे संभाग में किए गए है। सोनी ने कहा कि चूंकि तबादला नीति नहीं है, इसलिए तबादलों में अनेक विसंगतियां हो रही है। विजय सोनी ने प्रदेश भर में शिक्षकों को राजनीति करने को लेकर अभियान चला रखा है। इस संबंध में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को भी पत्र दिया गया है। मोबाइल नंबर 9829087912 पर इस अभियान की जानकारी विजय सोनी से ली जा सकती है। S.P.MITTAL BLOGGER ( 10-07-2026) Website- www.spmittal.in Facebook Page- www.facebook.com/SPMittalblog Follow me on Twitter- https://twitter.com/spmittalblogger?s=11 Blog- spmittal.blogspot.com To Add in WhatsApp Group- 9166157932 To Contact- 9829071511