गुर्जर अफसर ने अपने ही समाज के मृत्यु भोज की जानकारी दी। अब इसे रोकने की चुनौती अजमेर प्रशासन की है। 29 नवम्बर को बलवंता गांव में होना है 52 गांवों का भोज।

#3327
गुर्जर अफसर ने अपने ही समाज के मृत्यु भोज की जानकारी दी। अब इसे रोकने की चुनौती अजमेर प्रशासन की है। 29 नवम्बर को बलवंता गांव में होना है 52 गांवों का भोज।
======
नागौर जिले के कुचामन उपखंड के एसडीएम रामसुख गुर्जर ने अजमेर के कलेक्टर गौरव गोयल और पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र सिंह चैधरी को एक पत्र. लिखकर सूचित किया है कि अजमेर के निकटवर्ती बलवंता गांव में गुर्जर समाज का मृत्यु भोज हो रहा है। विश्वस्त सूत्रों के हवाले से गुर्जर ने बताया कि 52 गांवों का यह भोज 29 नवम्बर को होगा। पत्र में कहा गया है कि मृत्यु भोज रूढ़ीवादी कलंक है और साथ ही कानूनी अपराध। गुर्जर ने अपने ही समाज के इस भोज को रोकने का आग्रह किया है। गुर्जर ने इस पत्र के बाद ही अजमेर प्रशासन को यह पता चला कि बलवंता में कोई मृत्यु भोज हो रहा है। कलेक्टर गौरव गोयल के निर्देश पर एसडीएम अंकित कुमार ने जानकारी एकत्रित की तो पता चला कि बवलंता में महाभोज की तैयारियां हो रही है। बलवंता गांव ग्राम पंचायत राता के अधीन आता है। यहां के सरपंच डाल सिंह मेघवंशी ने भी माना कि बलवंता में 29 नवम्बर को महाभोज हो रहा है। मेघवंशी ने कहा कि उन्हें गुर्जर समाज के मृत्यु भोज की कोई जानकारी नहीं है। लेकिन 29 नवम्बर को बलवंता में 52 गांवों के ग्रामीण एकत्रित होंगे। इसकी तैयारियां चल रही है। पुलिस भी अब इस महाभोज पर नजर लगाए हुए हैं। हालांकि ऐसे महाभोज ग्रामीण क्षेत्रों में होना सामान्य घटना है। सरकार और प्रशासन की लाख कोशिश के बाद भी ऐसी सामाजिक कुरीतियां नहीं रुकती है। ऐसे आयोजनों को लेकर ग्रामीण समुदाय खास कर संबंधित समाज के लोग एकजुट होते हैं। वोटो की खातिर सरपंच विधायक और सासंद भी विरोध नहीं कर पाते। उल्टे जनप्रतिनिधि ऐसे समारोह में अपनी उपस्थिति दर्जा करवाते हैं। इसलिए इस महाभोज को रोकना अब अजमेर प्रशासन के लिए चुनौती बन गया है।
कानूनी अपराध है-गुर्जरः
कुचामन सिटी के दबंग एसडीएम रामसुख गुर्जर ने कहा है कि मृत्यु भोज करना कानूनी अपराध है। चूंकि मैं एक कानूनी पद पर बैठा हंू इसलिए मेरा दायित्व बनता है कि ऐसे आयोजनों पर रोक लगवाऊ। मैंने एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी होने के नाते अजमेर प्रशासन को लिखित में सूचना दी है। मैं स्वयं भले ही गुर्जर समाज से संबंध रखता हंू लेकिन ऐसे अपराधों को रोकने के लिए जिम्मेदारी मेरी भी हैं।
नागौर जिले में चर्चित है गुर्जरः
रामसुख गुर्जर कुचामन सिटी के एसडीएम हैं, लेकिन उनकी कार्यशैली की चर्चा पूरे नागौर जिले में है। अभी हाल ही में स्कूलों में मिड डे मील का आकस्मिक निरीक्षण कर गुर्जर ने जिले भर में वाहवाही ली है। गत स्वतंत्रता दिवस पर कुचामन के स्टेडियम में उपखंड स्तर पर समारोह कर गुर्जर ने सभी को आश्चर्य चकित कर दिया। पिछले कई वर्षों से यह स्टेडियम कचरा डिपो बना हुआ था। लेकिन गुर्जर ने हजारों ट्रक कचरा उठवा कर स्टेडियम को फिर से उपयोगी बना दिया। अपने कार्यालय में भी गुर्जर रोजाना लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं। गुर्जर भारतीय सेना से रिटायर होकर राज्य प्रशासनिक सेवा में आए हैं।
एस.पी.मित्तल) (28-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

फारुख अब्दुल्ला खुद क्यों नहीं फहराते लाल चैक पर तिरंगा? हर बार अपने ही देश को चिढ़ाने वाला बयान। हिम्मत हो तो बिना सुरक्षा के घूम कर दिखाएं श्रीनगर में।

#3326
फारुख अब्दुल्ला खुद क्यों नहीं फहराते लाल चैक पर तिरंगा? हर बार अपने ही देश को चिढ़ाने वाला बयान। हिम्मत हो तो बिना सुरक्षा के घूम कर दिखाएं श्रीनगर में।
======
लम्बे अर्से तक जम्मू कश्मीर के सीएम और केन्द्र में मंत्री रहे फारुख अब्दुल्ला ने कहा है कि जो लोग पाक अधिकृत कश्मीर को अपने कब्जे में लेने की बात करते हैं वे पहले भारत के कश्मीर के श्रीनगर के ऐतिहासिक लाल चैक पर तो तिरंगा फहरा कर दिखाएं। कश्मीर और उसका श्रीनगर व लाल चैक भारत का अभिन्न अंग है, ऐसे में वहां तिरंगा फहराया जाना चाहिए, लेकिन वर्तमान हालातों में लाल चैक पर तिरंगा फहराना कितना कठिन है, इस सच्चाई को फारुख अब्दुल्ला अच्छी तरह जानते हैं। पहले पिता शेख अब्दुल्ला फिर स्वयं फारुख अब्दुल्ला तथा अंत में पुत्र अमर अब्दुल्ला ने सीएम का पद संभाला है। अब्दुल्ला खानदान ने जिस तरह शासन किया उसी का परिणाम है कि आज लाल चैक पर तिरंगा फहराना कठिन हो गया है। इन हालातों को पैदा भी अब्दुल्ला खानदान ने ही किया है। इस खानदान के शासन में ही कश्मीर घाटी से चार लाख हिन्दुओं को पीट-पीट कर भगा दिया गया। आज जब कश्मीर घाटी हिन्दू विहीन हो गई है, तब फारुख अब्दुल्ला लाल चैक में तिरंगा फहराने की चुनौती दे रहे हैं। फारुख खुद श्रीनगर के सांसद हैं। संसद में भारतीय संविधान की शपथ लेने वाले फारुख खुद लाल चैक पर तिरंगा नहीं फहरा सकते? इतना ही नहीं देश की जनता जो टैक्स देती है उसी से फारुख ने जेडप्लस की सुरक्षा ले रखी है। यानि इतनी सुविधा प्राप्त करने के बाद भी फारुख हर बार देश को चिढ़ाने वाला बयान देते हैं। फारुख भी अच्छी तरह जानते हैं कि हमारे सुरक्षा बल अपनी जान जोखिम में डाल कर कश्मीर को बचाए हुए हैं। फारुख अब्दुल्ला इन दिनों जिस तरह पाकिस्तान के पैरोकार बने हुए हैं उसी पाकिस्तान में प्रशिक्षित आतंकी आए दिन हमारे कश्मीर में हिंसक वारदातें कर रहे हैं। यदि फारुख अब्दुल्ला लाल चैक में तिरंगा फहराने की चुनौती देते हैं तो उनमें हिम्मत हो तो अपने निर्वाचन क्षेत्र श्रीनगर में बिना सुरक्षा के घूमकर दिखाएं। जो सांसद अपने निर्वाचन क्षेत्र में बिना सुरक्षा के घूम नहीं सकता वह लाल चैक पर तिरंगा फहराने की चुनौती दे रा है। फारुख अब्दुल्ला को कुछ तो शर्म आनी चाहिए। सब जानते हैं कि फारुख अब्दुल्का अब विपक्ष में होते हैं तो इंग्लैंड में रहते हैं। कभी कभार घूमने के लिए भारत में आ जाते हैं। जब आते हैं तो अपने ही देश को चिढ़ाने वाला काम करते हैं।
एस.पी.मित्तल) (28-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

मांस तस्करी के मामले में अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं टोंक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नवेद बर्फवाला। नगर परिषद में भाजपा को दे रखा है समर्थन। प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के साथ फोटो।

#3325
मांस तस्करी के मामले में अदालत में उपस्थित नहीं हो रहे हैं टोंक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नवेद बर्फवाला। नगर परिषद में भाजपा को दे रखा है समर्थन। प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के साथ फोटो।
=====
मांस तस्करी के आरोप में लगातार अदालत में अनुउपस्थित चल रहे टोंक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नवेद बर्फवाला पर अब राजस्थान वक्फ बोर्ड ने भी संज्ञान लिया है। 28 नवम्बर को राजस्थान वक्फ बोर्ड के सीईओ अमानउल्ला खान ने नवेद को नोटिस जारी कर आरोपों का जवाब देने के लिए कहा है। सीईओ ने कहा है कि यदि निर्धारित अवधि में जवाब नहीं दिया तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। यानि नवेद को टोंक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद से भी हटाया जा सकता है। असल में सीईओ को शिकायत मिली थी कि मांस तस्करी कथित आरोप में रेवाड़ी की अदालत में जो मुकदमा चल रहा है उसमें नवेद उपस्थित नहीं हो रहे हैं। अदालत ने अब तक 17 बार नोटिस भी जारी किए हैं। इस मुकदमे की जानकारी राजस्थान वक्फ बोर्ड को भी है, लेकिन नवेद के द्वारा टोंक नगर परिषद में भाजपा को समर्थन देने की वजह से उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं हो रही। 45 पार्षदों की नगर परिषद में कांग्रेस के 22 तथा भाजपा के 18 पार्षद हैं। लेकिन निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से टोंक में भाजपा का बोर्ड बना हुआ है। नवेद बर्फवाला भी निर्दलीय पार्षद हैं। टोंक में भाजपा का बोर्ड बनवाने के एवज में ही सरकार ने नवेद को वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष बनवाया। नवेद समय समय पर भाजपा के समर्थन में प्रचार प्रसार करतें रहे हैं। इसलिए उनके फोटो भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, मदरास बोर्ड की चेयरमैन मेहरुनिशा टांक आदि के साथ हैं। लेकिन अब नवेद के मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। टोंक में नवेद को लेकर अनेक चर्चाएं व्याप्त हैं।
गिरफ्तारी वारंट की जानकारी नहीं -नवेदः
वहीं दूसरी ओर टोंक वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष नवेद बर्फवाला ने कहा कि रेवाड़ी की किसी अदालत से उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। वे कभी भी मांस तस्करी में लिप्त नहीं रहे हैं। पूर्व में जो वाहन पकड़ा गया था उसे वे चार माह पहले ही बेच चुके हैं। नवेद ने आरोप लगाया कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वद्वी दुष्प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान वक्फ बोर्ड के सीईओ द्वारा नोटिस दिए जाने की भी कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि मेरे प्रतिद्वंद्वी मुझे राजनीतिक नुकसान पहुंचाने के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं। आरोप लगाने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाएगी।
एस.पी.मित्तल) (28-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

इस बार पीएम नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी याद किया। देशवासियों से मांगे पाॅजेटिव विचार।

#3318
इस बार पीएम नरेन्द्र मोदी ने मन की बात में पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी याद किया। देशवासियों से मांगे पाॅजेटिव विचार।
======
26 नवम्बर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रेडियों के माध्यम से एक बार फिर मन की बात की। पीएम ने इस बार पैगम्बर मोहम्मद साहब को भी याद किया। उन्होंने देशवासियों को 2 दिसम्बर को मनाए जाने वाले पैगम्बर मोहम्मद साहब के जन्म दिन ईद मिलादुन्नबी पर शुभकामनाएं भी दी। इसके साथ ही पीएम ने देशवासियों से अपील की कि वे पाॅजेटिव विचारों को उनके पास भेजे ताकि अगले मन की बात कार्यक्रम में शामिल किया जा सके। पीएम ने कहा कि इस समय पूरी दुनिया आतंकवाद से पीड़ित है और भारत पिछले चालीस वर्षों से इस पीड़ा को झेल रहा है। लेकिन अब दुनिया में माहौल बदल रहा है। लोग आतंकवाद को जवाब देने के लिए तैयार हैं। पीएम ने कहा कि देश में शांति और भाई चारा बरकरार रहना चाहिए। पीएम के 26 नवम्बर के मन की बात के कार्यक्रम को गुजरात के विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है। इस कार्यक्रम को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए गुजरात के पचास हजार से भी ज्यादा मतदान केन्द्रों वाले स्थानों पर कार्यक्रम का प्रसारण किया गया। केन्द्रीय और राज्य के मंत्रियों की पूरी फौज इस कार्यक्रम में शामिल हुई। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी एक स्थान पर बैठे और लोगों के बीच पीएम की बात को सुना। माना जा रहा है कि मन की बात के माध्यम से गुजरात में भाजपा ने चुनाव प्रचार भी किया। चूंकि नरेन्द्र मोदी 12 वर्ष तक गुजरात के सीएम रह चुके हैं इसलिए पूरे प्रदेश में उनकी लोकप्रियता आज भी बनी हुई है।
एस.पी.मित्तल) (26-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

तो भारत के सिने जगत को जनभावनाओं की परवाह नहीं है। फिल्म पद्मावती के समर्थन में 15 मिनट के लिए शूटिंग बंद की।

#3317
तो भारत के सिने जगत को जनभावनाओं की परवाह नहीं है। फिल्म पद्मावती के समर्थन में 15 मिनट के लिए शूटिंग बंद की।
====
इसे दुर्भाग्यपूर्ण ही कहा जाएगा कि 26 नवम्बर को भारतीय सिने जगत से जुड़े लोगों ने फिल्म पद्मावती के समर्थन में 15 मिनट तक शूटिंग के काम को बंद रखा। यानि मुम्बई सहित देश-विदेश में किसी भी निर्माता निर्देशक ने फिल्म की शूटिंग का कोई कार्य नहीं किया। यह एकजुटता फिल्म सेंसर बोर्ड पर दबाव बनाने और देश के लोगों की भावनाओं की परवाह नहीं करने के लिए दिखाई गई। सब जानते हैं कि संजय लीला भंसाली द्वारा बनाई गई फिल्म पद्मावती का इन दिनों राजस्थान सहित पूरे देश में विरोध हो रहा है। हालांकि अभी सेंसर बोर्ड ने फिल्म को मंजूरी नहीं दी है, लेकिन माना जा रहा है कि यह फिल्म राजपूत समाज सहित सम्पूर्ण हिन्दू समाज की भावनाओं के विरुद्ध है। लोगों की भावनाओं का ख्याल करते हुए ही राजस्थान सहित अनेक राज्य सरकारों ने अपने यहां फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। यदि सिने जगत के लोग अपनी किसी मांग को लेकर एकजुटता दिखाते तो कोई ऐतराज नहीं होता, लेकिन सिने जगत के लोग जनभावनाओं का मजाक उड़ाने के लिए एकजुटता दिखा रहे हैं। फिल्मों से जुड़े लोग यह अच्छी तरह समझ लें कि आम व्यक्ति ही उनके फिल्मों को बाॅक्स आॅफिस पर हिट करता है। यदि आम व्यक्ति फिल्मों को देखना बंद कर देगा तो फिल्म उद्योग का क्या होगा? जिन लोगों के दम पर निर्माता निर्देशक करोड़ों रुपए कमाते हैं उन लोगों की भावनाओं का भी ख्याल रखना चाहिए। यदि एक फिल्म डिब्बे में बंद रह जाएगी तो फिल्म उद्योग पर कौन सा पहाड़ टूट पडे़गा? इस उद्योग के पास तो कमाने के और भी जरिए हैं। लेकिन यदि देश के आम आदमी की भावनाएं आहत होती है तो फिल्म उद्योग को भारी पड़ेगा। जिस पद्मावती ने अपनी इज्जत के खातिर अग्निकुंड में कूद कर जान दे दी, वह पद्मावती किसी फिल्म में मनोरंजन का पात्र नहीं हो सकती है। सिने जगत यह भी समझे कि फिल्म के प्रदर्शन से कानून व्यवस्था के बिगड़ने की आशंका है, क्योंकि आंदोलन की अगुवाई करने वाली राजपूत करणी सेना ने खुले आम कहा है कि जिस सिनेमा घर में फिल्म का प्रदर्शन होगा, उसे आग के हवाले कर दिया जाएगा। फिल्म जगत को ऐसी कोई जिद नहीं करनी चाहिए जिससे देश का माहौल खराब होता हो।
एस.पी.मित्तल) (26-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

स्वामी अनादि सरस्वती ने महिला सशक्तिकरण का अपना अवार्ड पीड़ित महिलाओं को समर्पित किया।

#3316
स्वामी अनादि सरस्वती ने महिला सशक्तिकरण का अपना अवार्ड पीड़ित महिलाओं को समर्पित किया।
=====
अजमेर स्थिति चित्ती संघान योग केन्द्र की आध्यात्मिक गुरु स्वामी अनादि सरस्वती ने महिला सशक्तिकरण पर मिले अपने अवार्ड को पीड़ित महिलाओं को समर्पित किया है। 25 नवम्बर को नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में स्वामी अनादि सरस्वती को महिला सशक्तिकरण अवार्ड 2017 से नवाजा गया। केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से जुड़ी संस्था प्रतिवर्ष स्त्री उत्पीड़न के खिलाफ महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली महिलाओं और संस्थाओं को सम्मानित करती है। इस बार चुनिंदा महिलाओं में अजमेर की स्वामी अनादि सरस्वती भी शामिल रही। समारोह में भाजपा के सांसद उदित राज, पूर्व केन्द्रीय मंत्री शाहनवाज हुसैन, केन्द्रीय मंत्री आदि भी उपस्थित थे। अनादि सरस्वती ने अवार्ड मिलने पर कहा कि आज भी समाज में अनेक महिलाएं हैं जो किसी न किसी कारण से पीड़ित हैं। यह अवार्ड उन्हीं महिलाओं को समर्पित कर रही हंू ताकि उन्हें विपरीत परिस्थितियों से मुकाबला करने की प्रेरणा मिल सके। उन्होंने कहा कि पुरुष प्रधान समाज में किसी महिला को अपना स्थान बनाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन महिलाओं को कभी भी संघर्ष से नहीं घबराना चाहिए। उन्होंने कहा कि योग के माध्यम से किसी भी संघर्ष से पार पाया जा सकता है। उनका संस्थान इस संबंध में समाज में खासकर महिलाओं के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। स्वामी अनादि सरस्वती को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने के लिए मोबाइल नम्बर 9829071877 पर शुभकामनाएं दी जा सकती है।
एस.पी.मित्तल) (26-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

अलगाववादियों के हिमायती बताएं शोपिया में अपने घर आए जवान इरफान अहमद की हत्या क्यों की गई? क्या किसी कश्मीरी का देश की हिफाजत करना गुनाह है?

#3314
अलगाववादियों के हिमायती बताएं शोपिया में अपने घर आए जवान इरफान अहमद की हत्या क्यों की गई? क्या किसी कश्मीरी का देश की हिफाजत करना गुनाह है?
========
25 नवम्बर को कश्मीर में शोपियां में भारतीय सेना के जवान इरफान अहमद डार का शव बरामद किया गया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार इरफान उत्तरी कश्मीर के बांडीपोरा जिले में नियंत्रण रेखा के पास गुरेज सेक्टर में तैनात था, लेकिन इन दिनों छुट्टियां बिताने के लिए अपने घर आया था। एक दिन पहले ही इरफान का अपहरण हुआ और आज तड़के उसका शव बरामद किया गया। माना जा रहा है कि भारतीय सेना में काम करने की वजह से ही आतंकवादियों ने इरफान की हत्या की है। इस हत्या का जवाब अब कश्मीर के अलगाववादियों के हिमायतियों को देना चाहिए। अनेक मौकों पर राजनेता, लेखक, प्रगतिशील विचारक आदि अलगाववादियों की हिमायत में आकर खड़े हो जाते हैं। ऐसे हिमायती यह बताएं कि क्या कोई कश्मीरी देश की हिफाजत का काम नहीं कर सकता है? जो लोग दिल्ली में बैठ कर अलगाववादियों की हिमायत करते हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि कश्मीर में सेना के जवान भी अपना बलिदान देकर दिल्ली की सुरक्षा कर रहे हैं। आज कश्मीर में राजस्थान से लेकर असम और तमिलनाडु से लेकर दिल्ली के युवा सैनिक के तौर पर तैनात हैं। किसी भी प्रांत के सैनिक ने कभी भी कश्मीरियों की सुरक्षा से इंकार नहीं किया। उल्टे कश्मीरियों के विरोध के बाद भी हमारे जवान तैनात रहते हैं। कई बार तो एक तरफ से आतंकवादियों की गोलियां और दूसरी तरफ से अलगाववादियों के पत्थर खाने पड़ते हैं। कल्पना की जा सकती है कि तब हमारे सैनिकों के मन की स्थिति कैसी होती होगी? जिन कश्मीरियों की सुरक्षा के लिए आतंकियों की गोलियां खानी पड़ रही है वे ही पत्थर फेंक रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद भी अलगाववादियों की हिमायत की जाती है। ऐसे हिमायतियों को अब कम से कम इरफान की हत्या की निंदा तो करनी ही चाहिए। हिमायती यह भी बताएं कि इरफान के हत्यारों के साथ क्या किया जाए? इससे पहले भी आतंकियों ने सुरक्षा बल में कार्यरत अधिकारियों की हत्या की है। भारतीय सेना के जवान इरफान की हत्या के बाद कश्मीर के उन अधिकारियों की सुरक्षा को भी खतरा हो गया है जो राजस्थान सहित अन्य राज्यों से नियुक्त हंैं।
एस.पी.मित्तल) (25-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

नाहरगढ़ किले का मामला आपराधिक है। असल में पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल हो गया है। 22 पत्थरों पर लिखे की भनक तक नहीं लगी।

#3313
नाहरगढ़ किले का मामला आपराधिक है। असल में पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल हो गया है। 22 पत्थरों पर लिखे की भनक तक नहीं लगी।
=====
जयपुर के ऐतिहासिक नाहरगढ़ किले की दीवार पर लटके मिले चेतन सैनी के शव की चर्चा इस समय पूरे देश में हो रही है। कुछ लोग इसे साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश भी कर रहे हैं। लेकिन सही में यह घटना एक आपराधिक घटना है। इसे फिल्म पद्मावती के विवाद से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। 25 नवम्बर को चेतन सैनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चलता है कि मौत दम घुटने से हुई है। चेतन सैनी के परिजनों ने भी हत्या की आशंका जताई है। ऐसे में पुलिस को आपराधिक घटना मानकर जांच करनी चाहिए। लेकिन इतना जरूर है कि अब पुलिस का सूचना तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है। यूं कहने को तो राजस्थान पुलिस में गुप्तचार शाखा भी बनी हुई है, लेकिन यह शाखा कैसे काम करती है सब को पता है। नाहरगढ़ का किला जयपुर शहर की सीमा में ही आता है। 22 पत्थरों पर लिखने का मतलब कोई व्यक्ति घंटों तक यह कृत्य करता रहा। चेतन सैनी ने भी इसी किले पर खड़े होकर अपनी सेल्फी भी ली। यानि इस पूरे घटनाक्रम में एक से अधिक लोग शामिल थे और उन्हें लम्बा वक्ता भी लगा। यदि पुलिस का सूचना तंत्र मजबूत होता तो कोई न कोई व्यक्ति पुलिस को सूचना दे देता। लेकिन अब तो गुप्तचर शाखा में तैनात अधिकारियों की रुचि भी अपने मुखबीर बनाने में नहीं होती है। पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी कथित तौर पर भ्रष्टाचार में लगे रहते हैं। थानों पर तो जांच और सूचना एकत्रित करने का काम खत्म सा हो गया है, क्योंकि थाने पर तैनात पुलिस कार्मिक या तो वीआईपी ड्यूटी में या फिर चैराहे पर खड़ा होकर वसूली में लगा रहता है। यह माना कि अब पुलिस से ज्यादा साधन और तकनीक अपराधियों के पास हो गए हैं, लेकिन यदि पुलिस का सूचना तंत्र मजबूत हो तो ऐसे अपराधों पर काबू पाया जा सकता है। चेतन सैनी के किले की दीवार पर लटकने से जयपुर पुलिस की सक्रियता पर भी सवाल उठता है। जयपुर में आए दिन आपराधिक घटनाएं हो रही हैं। लेकिन उन पर कोई अंकुश नहीं लग रहा। जयपुर ही नहीं बल्कि राजस्थान भर में आपराधिक घटनाओं की संख्याएं लगातार बढ़ रही है। गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया का बार-बार यह कहना होता है कि मैं हर स्थान पर पुलिस वाले को तैनात नहीं कर सकता हंू। यह बात कटारिया की काफी हद तक सही भी है, क्योंकि आबादी के लिहाज से राजस्थान पुलिस में कार्मिकों की संख्या बहुत कम है। लेकिन यदि कटारिया पुलिस के सूचना तंत्र को मजबूत करें तो नाहरगढ़ के किले जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सकती है।
एस.पी.मित्तल) (25-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

अब ममता बनर्जी ने दिया फिल्म पद्मावती पर चिढ़ाने वाला बयान।

#3312
अब ममता बनर्जी ने दिया फिल्म पद्मावती पर चिढ़ाने वाला बयान।
=====
पश्चिम बंगाल की सीएम और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने घोषणा की है कि फिल्म पद्मावती के प्रदर्शन के समय पश्चिम बंगाल के सिनेमा घरों को पूर्ण सुरक्षा दी जाएगी। इतना ही नहीं बनर्जी ने फिल्म के निर्माता निर्देशक संजय लीला भंसाली को भी अपने रज्य में फिल्म चलाने के लिए आमंत्रित किया है। बनर्जी के बयान से साफ जाहिर है कि वे सम्पूर्ण हिन्दू समाज को चिढ़ा रही हैं। जब पूरे देश में पद्मावती फिल्म का विरोध हो रहा है, तब एक चुने हुए जनप्रतिनिधि को ऐसा बयान नहीं देना चाहिए। भले ही बंगाल में राजपूत समाज की संख्या कम हो, लेकिन ममता को यह तो पता ही है कि राजस्थान सहित देशभर में राजपूतों ने फिल्म के प्रदर्शन को अपने सम्मान से जोड़ रखा है। वैसे भी ममता बनर्जी एक जुझारू नेत्री हैं और बंगाल में 25 वर्षों के वामपंथी शासन को उखाड़ कर सीएम बनी हैं। ममता ने संघर्ष के दिनों में कई बार वामपंथियों से अपमान भी सहा है। यहां तक कि उनकी हत्या की भी कोशिश की गई। ऐसी जुझारू महिला यदि वीरांगना पद्मावती को लेकर जनभावना के विरुद्ध कोई बयान दे तो आश्चर्य होता है। ममता को यह समझना चाहिए कि चित्तौड़ की रानी पद्मावती कोई फिल्म की पात्र नहीं हो सकती, क्योंकि पद्मावती ने एक आक्रमणकारी अलाउद्दीन खिलजी और उसकी अत्याचारी सेना से बचने के लिए पद्मावती ने 16 हजार स्त्रियों के साथ अग्निकुंड में कूद कर जान दे दी। क्या ऐसी वीर महिला किसी फिल्म में मनोरंजन का साधन हो सकती है? संजय लीला भंसाली तो पैसा कमाने के लिए फिल्म के प्रदर्शन पर उतारू हैं। भले ही इस फिल्म को भारतीय सेंसर बोर्ड ने अनुमति न दी हो, लेकिन ब्रिटेन में अनुमति लेकर फिल्म प्रदर्शन की कोशश जारी है। जिस भंसाली को अपने देश के कानून की परवाह नहीं है, उसकी मानसिकता कैसी होगी, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। ममता बनर्जी का बयान भी ऐसे समय आया है, अब अभी सेंसर बोर्ड ने फिल्म को अनुमति नहीं दी है। जब फिल्म को अनुमति ही नहीं मिली है तो फिर भंसाली को पश्चिम बंगाल आने का निमंत्रण क्यों दिया जा रहा है? क्या ममता बनर्जी सिर्फ जनभावनाओं को चिढ़ाने वाला काम कर रही हैं? ममता बनर्जी को यह गलतफहमी है कि फिल्म पद्मावती को देखने से बंगाल के मुसलमान खुश हो जाएंगे। ममता को यह पता होना चाहिए कि अजमेर स्थित सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह के दीवान और मुस्लिम धर्मगुरु जैनुल आबेदीन ने एक बयान जारी कर इस फिल्म का विरोध किया है। दीवान आबेदीन ने मुसलमानों को भी आव्हान किया है कि वे राजपूत समाज से जुड़ कर फिल्म का विरोध करें।
एस.पी.मित्तल) (25-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)

तो क्या अजमेर के व्यापारियों के साथ हथियार सप्लायर उस्मान और जुबेर ने धोखाधड़ी की? एटीएस की पूछताछ में व्यापारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया। =====

#3311
तो क्या अजमेर के व्यापारियों के साथ हथियार सप्लायर उस्मान और जुबेर ने धोखाधड़ी की? एटीएस की पूछताछ में व्यापारियों ने स्वयं को निर्दोष बताया।
=====
जम्मू-कश्मीर के फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदने के प्रकरण में राजस्थान की एटीएस ने अब तक अजमेर के कई प्रमुख व्यापारियों को गिरफ्तार किया है। एटीएस का आरोप है कि इन व्यापारियों ने अजमेर के हथयारों के कारोबारी उस्मान और उसके पुत्र जुबेर से जम्मू-कश्मीर में बने फर्जी लाइसेंस के आधार पर हथियार खरीदे हैं। इन व्यापारियों ने अपने दस्तावेज देकर जम्मू-कश्मीर से लाइसेंस बनवाए। एटीएस के अफसरों का मानना है कि उस्मान और जुबेर से डील करते हुए इन व्यापारियों को फर्जीवाड़े के बारे में पता था। वहीं वयापारियों का कहना रहा कि उस्मान और जुबेर ने उनके साथ धोखा किया है। पीड़ित व्यापारियों का माल और माजना (इज्जत) दोनों गए हैं। अजमेर के बिल्डर राजीव मालू ने भी पूछताछ में बताया कि एक रिवाल्वर के लिए जुबेर को चार लाख रुपए दिए थे, तब जुबेर ने कहा था कि अजमेर के जिला मजिस्ट्रेट का लाइसेंस दिलवा देगा, लेकिन रिवाल्वर देते समय जुबेर ने जम्मू-कश्मीर में बना लाइसेंस दे दिया। जुबेर ने जम्मू-कश्मीर में उसके नाम का लाइसेंस कैसे बनवाया, जिसकी जानकारी उसे नहीं है। उसने लाइसेंस के लिए कोई दस्तावेज भी जुबेर को नहीं दिए थे। जुबेर से तब भी साफ-साफ कहा गया कि अजमेर का लाइसेंस चाहिए। जुबेर ने भरोसा दिलाया था कि वह जम्मू-कश्मीर के लाइसेंस का रजिस्ट्रेशन अजमेर में करवा देगा। मालू ने एटीएस को बताया कि जम्मू-कश्मीर वाला लाइसेंस भी जुबेर को लौटा दिया था तथा चार लाख रुपए में खरीदा रिवाल्वर भी पूर्ण ईमानदारी के साथ संबंधित पुलिस स्टेशन पर जमा करवा दिया। मालू का कहना रहा कि धोखाधड़ी तो हमारे साथ हुई है। हमारा तो इतना ही कसरू है कि हमने जुबेर जैसे चालक व्यक्ति से हथियार खरीदा। पूछताछ के बाद मालू को जमानत पर छोड़ दिया गया। हालांकि एटीएस का मानना है कि व्यापारियों को उस्मान और जुबेर की गतिविधियों के बारे में सब पता था, लेकिन हथियार रखने के शौक की वजह से जुबेर से डील की। अब जांच पड़ताल में वह भी यह पता चल रहा है कि उस्मान और जुबेर के तार कश्मीर के आतंकवादियों से भी जुड़े हुए हैं। एटीएस यह भी पता लगा रही है कि जुबेर ने कश्मीर में किन सरकारी कर्मचारियों एवं अधिकारियों की मिली भगत से लाइसेंस बनवाए। अभी अजमेर के अनेक व्यापारी एटीएस के निशाने पर हैं।
एस.पी.मित्तल) (24-11-17)
नोट: फोटो मेरी वेबसाइट www.spmittal.in
https://play.google.com/store/apps/details? id=com.spmittal
www.facebook.com/SPMittalblog
Blog:- spmittalblogspot.in
M-09829071511 (सिर्फ संवाद के लिए)
================================
M: 07976-58-5247, 09462-20-0121 (सिर्फ वाट्सअप के लिए)